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जानिए क्या होता है सदमा लगना, इसके लक्षण और कैसे होता है इलाज

myupcharPublished By: Anuradha
Thu, 30 Jan 2020 01:45 PM
जानिए क्या होता है सदमा लगना, इसके लक्षण और कैसे होता है इलाज

अक्सर बातचीत में सदमा शब्द का प्रयोग किया जाता है, लेकिन हकीकत में यह स्थिति उतनी सामान्य नहीं होती, जितनी मानी जाती है। सदमा लगना एक गंभीर स्वास्थ्य समस्या है। इसे शॉक लगाना या झटका लगना भी कहा जाता है। यदि समय पर इसके लक्षण पहचानते हुए इलाज न किया जाए तो इंसान में अनियंत्रित व्यवहार और पागलपन के लक्षण नजर आ सकते हैं या उसके शरीर के अहम अंग काम करना बंद कर सकते हैं। www.myupchar.com से जुड़े एम्स के डॉ. आयुष पांडे के अनुसार, आमतौर पर किसी हादसे का शिकार होने या अचानक बड़ा दुख झेलने के कारण लोगों को सदमा लगता है। इस स्थिति में मरीज सुधबुध खो बैठता है। उसे पता नहीं होता कि उसके आसपास क्या हो रहा है। वह यही सोचता है कि जिंदगी खत्म हो चुकी है और उसके जीवन में कोई खुशी नहीं बची है। मरीज को इस मानसिकता से बाहर लाना जरूरी होता है। 

सदमा क्यों लगता है
किसी प्रियजन को खोना
बिजनेस में नुकसान
भारी आर्थिक क्षति
नौकरी छूटना
प्यार में नाकाम रहना
जिंदगी का सपना टूट जाना
पालतू जानवर को खोना
एक्सिडेंट का शिकार होना

सदमा लगने का लक्षण
परिजन और दोस्तों से अलग-थलग रहना
किसी कमरे या एकांत में अकेले बैठे रहना
बार-बार उसी दुखद घटना के बारे में सोचना
जिंदगी में कुछ भी अच्छा नहीं लगना
किसी काम में मन नहीं लगना
किसी पर भरोसा नहीं करना

सदमा लगने के जोखिम
सदमा लगने का सीधा असर कई अहम अंगों पर पड़ता है। सबसे बड़ा असर दिमाग पर पड़ता है। इंसान पागल हो सकता है। इसके अलावा मरीज को हार्ट अटैक आ सकता है। उसके मन में आत्महत्या का विचार आ सकता है। मानसिक संतुलन खोने पर मरीज कोई बड़ा कदम भी उठा सकता है। ब्लड प्रेशर तेजी से कम या ज्यादा होता है। तनाव से ग्रस्त होकर बड़ी संख्या में मरीज नशा करने लगते हैं, जो सेहत को और कमजोर कर देता है।

सदमे के लक्षण दिखे तो क्या करें
सदमे से सबसे कारगर इलाज है सकारात्मक विचार। सदमे के शिकार मरीज को समझाएं कि जो हुआ उसे भूलने की कोशिश करे और नई जिंदगी की शुरुआत करे। सकारात्मक विचार आएंगे तो सदमे से उबर पाएगा। इसके लिए दिमाग को मजबूत करने के लिए जरूरत होगी। प्राणायाम इसमें फायदेमंद हो सकता है। ताज़ा हवा में गहरी सांस लें। अपने दुख को मन में न रखें। उसके बारे में परिजन या दोस्त से जरूर बात करें। इससे अच्छा महसूस होगा और आगे बढ़ने की प्रेरणा मिलेगी। खान-पान और नींद का नियम बनाए। सही समय पर पौष्टिक आहार खाएंगे और पर्याप्त मात्रा में नींद लेंगे तो सदमा दूर होता जाएगा। अच्छी किताबें पढ़ें। महापुरुषों की सकारात्मक कहानियां सोच बदल सकती हैं। इन उपायों के बाद भी राहत न मिले तो काउंसलर को दिखाएं। अपने डॉक्टर से कुछ न छुपाएं। डॉक्टर की सलाह पर एपिनेफ्रिन, नोरपिफ्रिन या डोपामाइन जैसी दवाएं लें। इनसे रोगी के रक्त प्रवाह को सुनिश्चित कर महत्वपूर्ण अंगों से नुकसान होने से बचाया जा सकता है। जिन लोगों का दिल कमजोर है, वे अपना ध्यान रखें। हर बात पर तुरंत विचलित न हो जाएं।

अधिक जानकारी के लिए देखें: https://www.myupchar.com/disease/grief

स्वास्थ्य आलेख www.myUpchar.com द्वारा लिखे गए हैं

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