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जानिए कौन सी हैं वो चीजें, जो फास्ट फूड को बना देती हैं नुकसानदेह

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फास्ट फूड सेहत के लिए हानिकारक हैं, यह तो आप जानती हैं। पर क्या यह जानती हैं कि फास्ट फूड में पाए जाने वाले कौन-से तत्व उसे नुकसानदेह बनाते हैं? जानकारी दे रही हैं मोनिका अग्रवाल

फास्ट फूड का चटपटा स्वाद, बच्चे को ही नहीं, बड़ों को भी खूब भाता है। खासकर आज की युवा पीढ़ी तो है ही इसकी दीवानी। लेकिन क्या कभी आपने सोचा है कि फास्ट फूड जितनी जल्दी तैयार होते हैं, इन्हें खाने से बीमारियों को भी उतनी ही जल्दी आमंत्रण मिलता है? एक शोध से पता चला है कि फास्ट फूड खाने से दिल संबंधी बीमारियों के होने की आशंका 52 से 55प्रतिशत तक बढ़ जाती है। चूंकि इसमें अजीनोमोटो समेत और भी कई तरह के केमिकल्स मिले होते हैं, जिनके सेवन से मेटाबोलिक और न्यूरोलॉजिकल डिसऑर्डर का खतरा भी बढ़ जाता है। फास्ट फूड में पाए जाने वाले कौन-कौन से तत्व हमारी सेहत पर करते हैं वार, आइए जानें:

रिफाइंड शुगर का असर

ठंडा, गाढ़ा और मीठा मिल्क शेक पीना किसे अच्छा नहीं लगता? कुछ लोग तो इसे स्वास्थ्य के लिए अच्छा भी मानते हैं, पर वास्तव में ऐसा है नहीं। मिल्क शेक का नियमित सेवन खून में शुगर के स्तर को बढ़ा और घटा सकता है, क्योंकि इन चीजों में रिफाइंड शुगर की मात्रा अधिक होती है। इसकी वजह से खून में शुगर की मात्रा को संतुलित करने के लिए आमाशय को अत्यधिक मात्रा में इंसुलिन का स्राव करना पड़ता है। शुगर के स्तर में वृद्धि का होना सेहत संबंधी समस्याओं को बढ़ा सकता है। इसके असर से हड्िडयां कमजोर तो होती ही हैं, शरीर में ब्लड शुगर का स्तर बढ़ने से टाइप-2 मधुमेह का खतरा भी बढ़ जाता है। 

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अजीनोमोटो है घातक

ज्यादातर फास्ट फूड में अजीनोमोटो का इस्तेमाल किया जाता है, जिसका सेहत पर खराब असर होता है। डाइटीशियन की मानें तो 400 से 500 मिलीग्राम सोडियम का सेवन करने से स्ट्रोक का खतरा 17 प्रतिशत बढ़ जाता है। इस प्रकार के खानपान से जब हमारे शरीर में जरूरत से ज्यादा सोडियम की मात्रा मिलती है, तो ऑस्टियोपोरोसिस का खतरा भी बढ़ जाता है, जिस वजह से हड्िडयां पतली और कमजोर होने लगती हैं। फास्ट फूड के अत्यधिक सेवन से शरीर में कोलेस्ट्राल की मात्रा बढ़ती है और यहीं से शुरू होती है दिल संबंधी समस्याएं।

ट्रांस फैट्स का दिमाग पर असर

क्या आपको पता है कि फास्ट फूड खाने से दिमागी शक्ति पर भी विपरीत प्रभाव पड़ता है? इन खाद्य पदार्थों में मौजूद ट्रांस फैट शरीर में मौजूद लाभदायक फैट्स को हटा कर दिमाग की कार्यक्षमता को बुरी तरह से प्रभावित करने लगता है। शरीर में गैस या कब्ज जैसी शिकायतें होने लगती हैं और मोटापा, तनाव, कैंसर, सिर दर्द, बदन दर्द, पेट से संबंधित समस्याएं (पेप्टिक, अल्सर) घर करने लगती हैं । पेट से संबंधित बीमारियों के बढ़ने से कैंसर, कोलोन कैंसर का खतरा भी बढ़ता है। यही नहीं, इस तरह के खाद्य पदार्थों में ओमेगा-6 फैटी एसिड का बढ़ा स्तर भी सेहत को प्रभावित करता है। वैसे तो ओमेगा-6 फैटी एसिड सेहत के लिए अच्छा माना गया है, लेकिन इसकी अधिकता हमारे लिए नुकसानदेह भी है।

विशेषज्ञों के अनुसार ओमेगा-3 और ओमेगा-6 का अनुपात शरीर में 1:1 के अनुपात में होना चाहिए, लेकिन फास्ट फूड की अधिकता होने पर यह अनुपात 1:20 से 1:25 तक पहुंच जाता है। सिर्फ जो बाजार में बिकता है वही फास्ट फूड है, ऐसा नहीं है। घर में बनने वाली बहुत-सी चीजें भी इस श्रेणी में आती हैं, जैसे कि परांठा, कुलचा, कचौरी, कोफ्ता, पकौड़ा आदि। खास कर तब, जब इनमें वैसी चीजों का इस्तेमाल किया गया हो, जो फास्ट फूड में प्रयोग होते हैं। तब ये सेहत के लिए हानिकारक हो जाते हैं।

खरीदारी के वक्त रखें ध्यान

बाजार से कोई भी चीज खरीदते समय उसकी पैकिंग पर दी गई जानकारी को ध्यान से जरूर पढ़ें। खाद्य सामग्री में स्वाद लाने के लिए बहुत-सी कंपनियां कृत्रिम रंगों और केमिकल का उपयोग करती हैं, जिनके कई तरह के साइड इफेक्ट्स होते हैं। यदि किसी चीज को बनाने के लिए अधिक शुगर या सोडियम वाले खाद्य पदार्थों का प्रयोग किया गया है, तो उसे नहीं खरीदें। अगर किसी सामग्री को बनाने के लिए साबुत अनाज का प्रयोग किया गया है या उसमें फाइबर, पोटैशियम, कैल्शियम, मैग्नीशियम और विटामिन ए, सी और ई जैसे पोषक तत्व मौजूद हैं, तो वह खाद्य पदार्थ सेहतमंद है।

(सीनियर डाइटीशियन शालिनी श्रीवास्तव से बातचीत पर आधारित)

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  • Web Title:know what are the things that make fastfood damaging to health