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महिलाओं की वो 5 बीमारियां जिन्हें वो चुपचाप सहन कर जाती हैं

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शुक्र है, अनुष्का शंकर ने गर्भाशय संबंधी अपने रोग को सोशल मीडिया में चर्चा का विषय बनाया। मशहूर सितारवादक अनुष्का शंकर ने बीती 30 अगस्त को सोशल मीडिया में अपने गर्भाशय से जुड़े रोग, उनके निदान और फिर उपचार का काफी विस्तार से सिलसिलेवार खुलासा किया है। 38 वर्षीय अनुष्का के इस खुलासे की दो कारणों से बहुत ज्यादा अहमियत है: एक, यह महिलाओं के प्रजनन संबंधी स्वास्थ्य को भारत और दुनियाभर में सामान्य बातचीत का विषय बनाने की दिशा में बड़ा कदम है।

दूसरा, अनुष्का शंकर ने कुछ ऐसी बड़ी बीमारियों का सामना किया हैं, जिन्हें महिलाएं अक्सर चुपचाप सहन करती हैं: इनमें मेनरेजिया (असामान्य रूप से ज्यादा दिनों तक अत्यधिक रक्त स्राव वाला मासिक धर्म),  गर्भनिरोधक गोलियों के सेवन से उपजा माइग्रेन और गर्भाशय में ट्यूमर (फाइब्रॉएड) का होना शामिल हैं। गर्भाशय के ट्यूमर युवतियों या महिलाओं को किसी भी उम्र में हो सकते हैं। गर्भाशय के ट्यूमर निकालने के लिए अनुष्का को पहले मायोमेक्टॉमी नामक सर्जरी की जरूरत थी और बाद में हिस्टेरेक्टॉमी जैसी सर्जरी की।

मायमेक्टॉमी एक ऐसी सर्जरी है, जिसमें गर्भाशय के ट्यूमर को ऑपरेशन के जरिये निकाला जाता है। हिस्टेरेक्टॉमी ऐसा ऑपरेशन है, जिसमें महिला के यूट्रस या गर्भाशय को निकाल दिया जाता है। इससे भविष्य में मां बनने की संभावना खत्म हो जाती है।      

अनुष्का के शरीर में अब गर्भाशय क्यों नहीं है और यह बात उन्होंने आपको बताने का निर्णय क्यों लिया? जानने के लिए यहां क्लिक करें, pic.twitter.com/60laJGTWTg

आइये अनुष्का ने गर्भाशय संबंधी जिन स्थितियों का सामना किया, उन्हें जानें और समझें:

मेनरेजिया (Menorrhagia) और गर्भनिरोधक गोलियां-

लड़कियों या महिलाओं का जब मासिक धर्म (menstrual periods) सात या इससे ज्यादा दिन का होता है और जब अक्सर बहुत ज्यादा खून जाता है तो इस हालत को मेनरेजिया कहते हैं। स्त्रीयों को मेनरेजिया रोग होने के कई कारण हैं जिनमें एंडोमेट्रियोसिस, एडेनेमायोसिस (Adenomyosis) और यूट्राइन फाएब्रॉइड (Uterine Fibroids) शामिल हैं। 

एंडोमेट्रियोसिस (Endometriosis) दर्दनाक विकार है, जिसमें सामान्य रूप से किसी स्त्री के गर्भाशय के अंदर की रेखाएं (एंडोमेट्रियम) गर्भाशय के बाहर बढ़ती है और वे गर्भाशय नलियों (फैलोपियन ट्यूब), अंडाशय (ओवरीज़) और शरीर के अन्य अंगों पर विकसित होने लगती हैं। डॉक्टर अब तक यह नहीं जानते कि ऐसा क्यों होता है। भारत की 2.5 करोड़ महिलाएं एंडोमेट्रियोसिस से पीड़ित हैं। अंडाशय वह अंग है जहां पर औरत को मां बना सकने वाले अंडे बनते हैं। अंडे वह, जो स्पर्म (शुक्राणु) के साथ मिलकर बच्चा बना सकें। 

एडेनोमायोसिस (Adenomyosis) में गर्भाशय की सबसे अंदर की रेखाएं (एंडोमेट्रियम) गर्भाशय की भीतरी दीवार (मायोमेट्रियम myometrium) के साथ मिल जाती हैं जिससे पीरियड्स ज्यादा लंबे और तकलीफदेह हो जाते हैं।  

यूट्राइन फाएब्रॉइड-
गर्भाशय में पनपने वाले ट्यूमर को यूट्राइन फाएब्रॉइड कहते हैं। गर्भाशय फाइब्रॉएड, गर्भाशय में मांसपेशियों के ऊतकों (tissues) से गैर-कैंसरजन्य वृद्धि है। कुछ महिलाओं के शरीर में गर्भाशय फाइब्रॉएड क्यों बनते हैं इसका सटीक कारण मालूम नहीं है।  हालांकि शोधकर्ताओं का कहना है कि शरीर में फाइब्रॉएड पनपने की वजह आनुवांशिक, या हार्मोनल असंतुलन हो सकती है।

डॉक्टर अक्सर मेनरेजिया और गर्भाशय फाइब्रॉएड दोनों को मैनेज करने के लिए जन्म रोकने वाली दवा-गोलियां देते हैं। इन गोलियों में मौजूद एस्ट्रोजन हार्मोन कुछ महिलाओं को तेज सरदर्द और माइग्रेन दे सकता है। अनुष्का शंकर को भी महीने में तीन से चार बार माइग्रेन होता था।

यूट्राइन फाइब्रॉएड और मायोमेक्टोमी-

गर्भाशय में मौजूद ट्यूमर को निकालने के लिए जो सर्जिकल प्रोसिजर या ऑपरेशन किए जाते हैं उन्हें मायोमेक्टॉमी कहते हैं। इस ऑपरेशन के दौरान गर्भाशय को किसी प्रकार का नुकसान नहीं होता। अपने ट्वीट में, अनुष्का ने कहा कि 26 साल की उम्र में उनकी एक सफल मायोमेक्टोमी हुई थी। इस ऑपरेशन के बाद उसके दो बेटे पैदा हुए।

myUpchar की मेडिकल ऑफिसर, स्त्री रोग विशेषज्ञ डॉ. अर्चना निरुला का कहना है, "फाइब्रॉएड रोगियों के लिए निराशाजनक हो सकते हैं। ऐसा बहुत कम है, जो हम फाइब्रॉएड के बारे में निश्चित तौर पर कह सकते हैं। पहली बात यो यह है कि शरीर में फाइब्रॉएड कहीं भी दिखाई दे सकते हैं। ये गर्भाशय की बाहरी सतह पर, इसकी दीवार के भीतर, या यह एक छोटे से तंतु के जरिए गर्भाशय की दीवार से जुड़ा होते हैं। फाइब्रॉएड धीरे-धीरे बढ़ सकते हैं, या वे कई वर्षों तक छोटे रह सकते हैं और फिर अचानक बढ़ सकते हैं। फाएब्रॉइड की मौजूदगी के लक्षण भी अलग-अलग पेशेंट्स के लिए काफी अलग-अलग हो सकते हैं-बेहद तकलीफदेह पीरियड्स से लेकर रक्त की कमी वाली बीमारी एनीमिया, पीठ के निचले हिस्से में दर्द या तकलीफदेह संभोग जैसी भिन्नताएं देखी जा सकती हैं। हम ऐसी भिन्न स्थितियां बनने के कारणों के बारे में भी कुछ निश्चित कहने की स्थिति में नहीं हैं। डॉ. निरुला ने कहा, “ऐसे में यह वाकई सराहनीय है कि अनुष्का इस चर्चा को एक ऐसे सार्वजनिक मंच पर ला रही हैं, जहां यह होनी चाहिए।”

अनुष्का शंकर के मामले में हुआ यह है कि मायोमेक्टोमी के बाद उनके शरीर में फाइब्रॉएड्स की वापसी हुई। कुछ महीने पहले डॉक्टरों को उसके गर्भाशय में फिर से बड़े आकार के फाइब्रॉएड का पता लगा। इस बार, अनुष्का ने गर्भाशय को निकालने के लिए हिस्टेरेक्टॉमी नामक सर्जरी का फैसला लिया। डॉक्टरों ने इस प्रक्रिया के दौरान उनके पेट सहित शरीर से 13 ट्यूमर भी निकाले।

हिस्टेरेक्टॉमी और डिप्रेशन-

अपनी सोशल मीडिया पोस्ट में अनुष्का ने लिखा, हिस्टेरेक्टॉमी के विचार ने उन्हें “शॉर्ट-टर्म डिप्रेशन” यानी "अल्पकालिक अवसाद" की हालत में भेज दिया। उन्होंने लिखा, "इस खबर से मेरे मन में कई किस्म के डर थे। जैसे, अपने स्त्रीत्व को लेकर भय, भविष्य में और बच्चे पैदा करने की मेरी संभावित इच्छा, सर्जरी में मरने का डर, मेरे बच्चों को बिना माँ के छोड़ने का भय, मेरी सेक्स लाइफ में बदलाव और असर का भय... और भी बहुत कुछ।" 

शोध आधारित एक अनुमान के अनुसार, हिस्टेरेक्टॉमी के दौरान वैश्विक मृत्यु दर 1% है। आंत्र, मूत्राशय या मूत्रवाहिनी को नुकसान, रक्तस्राव, डिम्बग्रंथि विफलता और संक्रमण जैसी जटिलताओं की आशंका भी बनी रहती है। 

इस संबंध में डॉ. निरुला ने कहा, "दुर्भाग्य से, प्रजनन संबंधी बीमारियों का सामना कर रही महिलाओं का उनके निदान के बारे में उदास महसूस करना आम है।“  उन्होंने आगे स्पष्ट किया, “भारत ही नहीं, पूरी दुनिया में ही हिस्टेरेक्टोमी को लेकर ऐसी धारणा है। हमें यह समझना होगा कि यह एक चिकित्सा प्रक्रिया है, जो महिलाओं का जीवन बचा सकती है।

महिलाओं पर एक निश्चित तरीके से रहने और एक निश्चित तरीके से चीजों को देखने के लिए बहुत दबाव है। यह उनके साथ ज्यादती है।” यह भी कारण है कि शंकर का लंबा ट्वीट इतना धमाकेदार है। डॉ. निरुला का कहना है, "पीरियड्स, हिस्टेरेक्टॉमी और कठिन गर्भधारण जैसे जटिल विषयों पर बात करने के लिए अनुष्का वास्तव में तारीफ की हकदार हैं।"

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