Know about spinal stroke how deadly it is and ways to avoid it - जानिए स्पाइनल स्ट्रोक के बारे में, कितना घातक होता है यह और बचने के तरीके DA Image
9 दिसंबर, 2019|8:01|IST

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जानिए स्पाइनल स्ट्रोक के बारे में, कितना घातक होता है यह और बचने के तरीके

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31 वर्षीय प्रशांत कुमार के कामकाज की प्रकृति ऐसी है कि ज्यादातर समय उसकी रीढ़ की हड्डी यानी स्पाइन पर जोर पड़ता है और जब कमर दर्द होता है तो यह नीचे एड़ी तक जाता है। लगातार कंप्यूटर के सामने सही पोश्चर में न बैठकर काम करने वाले इस सॉफ्टवेयर प्रोफेशनल को एक दिन अचानक ऐसा असहनीय कमर दर्द हुआ कि स्पाइन ने काम करना बंद कर दिया। डॉक्टरों ने जांच में पाया कि उसे स्पाइनल अटैक हुआ था। इसी तरह हाल ही में ओलिंपिक में तीन गोल्ड मेडल जीत चुके अमेरिका के पीट रीड को रीढ़ की हड्डी में चोट के बाद शरीर से निचले हिस्से में लकवा मार गया है। 38 वर्षीय रीड ने इंस्टाग्राम पर लिखा कि उन्हें स्पाइनल अटैक हुआ है और पूरी तरह स्वस्थ्य होने की उम्मीद नहीं हैं। स्पाइनल स्ट्रोक तब होता है जब रीढ़ की हड्डी को रक्त की आपूर्ति बाधित हो जाती है। पर्याप्त रक्त की आपूर्ति के बिना रीढ़ की हड्डी को ऑक्सीजन और पोषक तत्व प्राप्त नहीं होंगे, जो इसके कार्य करने के लिए जरूरी है।

यूनिवर्सिटी ऑफ रोचेस्टर मेडिकल सेंटर के अनुसार, रक्त की आपूर्ति में कोई भी रुकावट रीढ़ की हड्डी को नुकसान पहुंचा सकती है। इससे शरीर के अन्य हिस्सों के साथ रीढ़ का संपर्क कट जाता है। स्पाइनल स्ट्रोक से लकवा हो सकता है। साथ ही जानलेवा स्थिति भी खड़ी हो सकती है।  अन्य स्ट्रोक में ब्रेन को जाने वाला ब्लड भी रुक जाता है। हालांकि स्पाइनल स्ट्रोक में ऐसा नहीं होता है।

myupchar.com से जुड़े एम्स के डॉ. नाधीर के. एम. के अनुसार, कुछ मामले में रीढ़ की हड्डी का दर्द किसी अन्य प्रकार के रोग या रीढ़ की हड्डी संबंधी विकार का संकेत दे सकता है। यदि समय पर इलाज नहीं किया जाए, तो यह दर्द शरीर के अन्य हिस्सों में भी फैल सकता है। जैसे - कंधे, बाजू, पीठ का निचला हिस्सा, कूल्हे, टांग, यहां तक की पैर।

स्पाइनल अटैक के लक्षण

मांसपेशियों की ऐंठन

चलने में कठिनाई

पैर सुन्न होना, झुनझुनी

मूत्राशय पर नियंत्रण खोना

मांसपेशी में कमज़ोरी

लकवा

सांस लेने मे तकलीफ

गंभीर मामलों में, एक रीढ़ की हड्डी में स्ट्रोक मौत का कारण भी बन सकता है।

डॉ. नाधीर के. एम. के अनुसार, जो लोग अत्यधिक नशा करते हैं या डिप्रेशन में रहते हैं,  उन्हें भी रीढ़ की हड्डी को नुकसान पहुंचने की आशंका रहती है। नशा करने से नसें क्षतिग्रस्त होने का डर रहता है।

 

क्यों होता है स्पाइनल स्ट्रोक?

लगातार हाई कोलेस्ट्रॉल

हाई ब्लड प्रेशर

हार्ट संबंधी कोई बीमारी या परिवार में हार्ट अटैक का इतिहास

मोटापा

डायबिटीज

धूम्रपान

अत्यधिक शराब का सेवन

व्यायाम की कमी

स्पाइनल स्ट्रोक की ऐसे होती है जांच

स्पाइनल स्ट्रोक के लक्षण नजर आने पर तत्काल मरीज को तत्काल इलाज की जरूरत होती है। डॉक्टर लक्षणों के बारे में पूछेगा, और जरूरत पड़ने पर टेस्ट करवाएगा। सबसे पहले पैरों में झनझनी या मांसपेशियों की कमजोरी के बारे में पूछेंगे। यदि रीढ़ की हड्डी में स्ट्रोक का संदेह है, तो एमआरआई करवाई जाती है। इससे रीढ़ की हड्डी को हुए हर तरह के नुकसान का चला जाता है। एमआईआई से उस स्थान का पता चलता है जहां खून की रुकावट हुई है। इसके बाद पहले दवाओं और गंभीर स्थिति में सर्जरी से इलाज किया जाता है। इस्केमिक स्पाइनल स्ट्रोक की स्थिति में डॉक्टर मरीज को खून पतला करने और खून के थक्कों का जोखिम कम करने के लिए दवाएं देगा। इन्हें एंटीप्लेटलेट और एंटीकोआगुलेंट दवाओं के रूप में जाना जाता है। इनमें एस्पिरिन जैसी सामान्य दवाएं शामिल हैं।

डॉ. नाधीर के. एम. के अनुसार, रीढ़ की हड्डी की जांच के लिए डॉक्टर एक्सरे या सिटी स्कैन भी करवाते हैं। डॉक्टर हाई ब्लड प्रेशर या हाई कोलेस्ट्रॉल को कंट्रोल करने के लिए भी दवाएं देंगे और लाइफ स्टाइल सुधारने को कहेंगे। लकवा होने की स्थिति में फिजिकल थेरेपी करवाई जाती है। 

अधिक जानकारी के लिए देखें: https://www.myupchar.com/disease/spinal-pain

स्वास्थ्य आलेख www.myUpchar.com द्वारा लिखा गया है। 

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