keep yourself fit good fitness will give you sharp mind - फिट रहिए, तेज दिमाग से है फिटनेस का सीधा संबंध DA Image

अगली स्टोरी

class="fa fa-bell">ब्रेकिंग:

फिट रहिए, तेज दिमाग से है फिटनेस का सीधा संबंध

fitness

एक ताजा शोध के मुताबिक, चार वर्ष के बच्चे से लेकर 80 वर्ष के बुजुर्ग तक कार्डियो वर्कआउट, दिमाग के कामकाज और याददाश्त को सुधारता है। कार्डियो वर्कआउट यानी दिल की धड़कन तेज करने और साथ ही हमारी मांसपेशियों (मसल्स) को मजबूत बनाने वाली कसरत जैसे साइकिल चलाना, दौड़ना, ट्रेडमिल एक्सरसाइज आदि। 

इंसुलिन प्रतिरोध का मतलब है कि आपका शरीर इंसुलिन को ठीक से प्रतिक्रिया नहीं दे पाता है। समय के साथ, यह आपके रक्त शर्करा के स्तर को बढ़ाता है। जो आपको टाइप 2 डायबिटीज, साथ ही दिल की बीमारी के लिए सेट कर सकता है।

सवाल यह है कि कार्डियो वर्कआउट से दिमागी सेहत सुधारने में कैसे मदद मिलती है? इस एक्सरसाइज का सबसे बड़ा फायदा है हमारा शरीर में शकर को स्तर को नियंत्रित करने वाले हार्मोन इंसुलिन अच्छी तरह काम करने में मदद मिलती है। शरीर में सूजन और जलन भी कम होती क्योंकि वर्कआउट से हमारी रोगों से लड़ने की क्षमता बढ़ती है। कार्डियो कसरत से पूरे शरीर को स्वस्थ रखने में मदद मिलती है। साथ ही साथ यह हमारे हिप्पोकेम्पस (दिमाग का निचला हिस्सा, जो अश्वमीन यानी घोड़े जैसी दिखने वाली समुद्री मछली के समान नजर आता है) के आकार में परिवर्तन करके भी मदद करता है। यही हिस्सा नई यादों को सहेजने और नई बातों को सीखने में हमारी मदद करता है।

यूनिवर्सिटी ऑफ जॉर्जिया के एक्सरसाइज साइंस विभाग के फिलिप डी. टोम्पोरोवस्की ने वर्ष 2003 में लिखा था, “दिमाग की सोचने-समझने की शक्ति पर एयरोबिक्स जैसी तीव्र गति की एक्सरसाइज का असर होता है। सबमैक्सिकल एयरोबिक एक्सरसाइज (एक्सरसाइज करने की क्षमता को मापना) को तकरीबन 60 मिनट तक करने से सूचना के विश्लेषण के कुछ गुणों में इजाफा होता है। लेकिन थका देने वाली एक्सरसाइज हमारी सूचना के विश्लेषण और याददाश्त दोनों की क्षमता को प्रभावित करती है।”

चलना, दौड़ना, साइक्लिंग, तैराकी, रस्सी कूदना, झुम्बा और फिल्मी गीतों पर नाचना, ये सभी एयरोबिक्स एक्सरसाइज के ही प्रकार हैं क्योंकि यह कैलोरी को जलाने के लिए ऑक्सीजन का इस्तेमाल करती हैं। अधिकांश एयरोबिक एक्सरसाइज ‘सबमैक्सिकल’ होती हैं क्योंकि वह हमें अपनी क्षमता से ज्यादा एक्सरसाइज नहीं करने की सलाह देती हैं।

यहां कुछ ऐसे वर्कआउट्स जो दिल के स्वास्थ्य के साथ-साथ दिमाग के कामकाज को भी बेहतर बनाते हैं-

अब समय है जागने का
हम सभी के फिटनेस को लेकर कुछ लक्ष्य होते हैं-जैसे तोंद कम करने से लेकर शरीर को लचीला बनाना और खुद को जीवनशैली से जुड़े मधुमेह और हाइपरटेंशन जैसे रोगों से बचाना। अनुसंधान के मुताबिक सधा हुआ शरीर हासिल करने के लिए की जाने वाली एयरोबिक्स एक्सरसाइज से दिमाग का कामकाज और याददाश्त में भी सुधार में भी मदद मिलती है।

यूनिवर्सिटी ऑफ ब्रिटिश कोलंबिया द्वारा किए गए एक रिसर्च के मुताबिक पसीनी निकालने वाली नियमित एयरोबिक एक्सरसाइज हमारे हिप्पोकेम्पस को इस तरह से प्रभावित करती हैं, जो कि रेसिस्टेंस ट्रेनिंग, बेहतर संतुलन और मांसपेशियों को मजबूत करने वाली एक्सरसाइज से संभव नहीं है। 

बर्मिंघम महिला अस्पताल में एसोसिएट न्यूरोलॉजिस्ट और हारवर्ड मेडिकल स्कूल में न्यूरोलॉजी के इंस्ट्रक्टर डॉ. स्कॉट मैकगिन्निज ने हाल ही में हारवर्ड हैल्थ पब्लिशिंग की वेबसाइट पर लिखाः “यह खोज तो बेहद उत्साहित कर देने वाली है कि सामान्य या कुछ अधिक तीव्रता वाली एक्सरसाइज छह महीने या एक साल की जाए तो उससे हमारे दिमाग के कुछ चुनिंदा हिस्सों (हिप्पोकेम्पस) के विकास में मदद मिलती है।”

उम्रदराज बनाम युवा
नेचर न्यूरोल़ॉजी के 2008 के अंक में प्रकाशित अनुसंधान के मुताबिक खेलना, पढ़ाई में फायदेमंद होता है। अनुसंधान से पता चला है कि 4 से 18 वर्ष आयु के बच्चों में शारीरिक गतिविधियों का समझने, बौद्धिक क्षमता, मौखिक परीक्षण, गणित परीक्षण, विकासीय स्तर और शिक्षा पर सकारात्मक असर पड़ता है। ज्यादा उम्र वाले लोगों में अध्ययन ने दलील दी है कि एयरोबिक एक्सरसाइज के रूटीन्स से सामाजिक संबंध और बौद्धिकता को गति मिलती है, जो हमारी केंद्रीय नर्वस सिस्टम के बुढ़ापे के प्रभावों को सीमित करता है।

हम जानते हैं कि दौड़ने जैसी एक्सरसाइज से लोगों को बहुत खुशी महसूस होती है क्योंकि उनका दिमाग हार्मोन एंडोर्फिन्स छोड़ता है जिसे फीलगुड हार्मोन्स कहा जाता है। चौंकाने वाली बात है कि अनुसंधान के मुताबिक एयरोबिक एक्सरसाइज डिप्रेशन से बचाने वाली दवाओं की तरह भी काम करती है-वह न्यूरोट्रॉफिक फेक्टर्स (दिमाग की कोशिकाओं और न्यूरॉन्स के विकास और परिपक्वता के लिए जरूरी छोटे प्रोटीन) का बनना बढ़ाती हैं और हिप्पोकेम्पस में नर्व सेल्स का बनना बार-बार बढ़ाती है।

एक आकलन के मुताबिक, वर्ष 2050 तक 60 वर्ष की उम्र से ज्यादा के 20 प्रतिशत भारतीय डिमेंशिया का शिकार होंगे। एक्सरसाइज और दिमाग के कामकाज में संबंध को समझ लेने से हमारी यह चिंता दूर  हो सकती है। खुशी की बात है कि विशेषज्ञों के मुताबिक एक सप्ताह में केवल 150 मिनट की मध्यम स्तर की गतिविधियां भी हमारे दिमाग और दिल के स्वास्थ्य में उल्लेखनीय सुधार कर सकती हैं।

 

(यह स्वास्थ्य आलेख www.myupchar.com द्वारा लिखा गया है, जो सेहत संबंधी भरोसेमंद सूचनाएं प्रदान करने वाला देश का सबसे बड़ा स्रोत है।)

इस विषय पर ज्यादा जानकारी हासिल करने के लिए जरूर पढ़ें 

  • Hindi Newsसे जुडी अन्य ख़बरों की जानकारी के लिए हमें पर ज्वाइन करें और पर फॉलो करें
  • Web Title:keep yourself fit good fitness will give you sharp mind