Health Tips: जानिए क्या है साइलेंट स्ट्रोक, कारण और इससे बचने के तरीके - jaanie kya hai sailent stroke jaane kaaran aur isase bachane ke tareeke DA Image

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Health Tips: जानिए क्या है साइलेंट स्ट्रोक, कारण और इससे बचने के तरीके

heart attack

स्ट्रोक यानी खून का थक्का जमना। यह भारत में लोगों की अपंगता और मौत का एक बड़ा कारण है। बीते कुछ दशकों में भारत समेत अन्य विकसित देशों में स्ट्रोक के मामले दो गुना हो गए हैं। इंडियन स्ट्रोक एसोसिएशन के अनुसार, दुनियाभर में 1.7 करोड़ लोगों को स्ट्रोक होता है, जिनमें से 62 लाख की मौत हो जाती है। इस बीच, हेल्थ मैग्जीन The Lancet में अगस्त के मध्य में प्रकाशित एक स्टडी में बताया गया है कि उम्रदराज लोगों में नॉन-कॉर्डियक सर्जरी के बाद साइलेंट स्ट्रोक का खतरा बढ़ जाता है। जानिए साइलेंट स्ट्रोक के बारे में -

क्या है कोवर्ट या साइलेंट स्ट्रोक?

स्ट्रोक एक तरह की मेडिकल इमरजेंसी है, जिसमें धमनियों में खून का थक्का जमने के कारण ब्रेन को जाने वाली ब्लड सप्लाय रुक जाती है। साइलेंट स्ट्रोक बिना किसी वार्निंग या लक्षण के हमला करता है। इसके प्रमुख कारण होते हैं - खून का थक्का जमना, धमनियों का सिकुड़ना, ब्लड प्रेशर हाई होना, डायबिटीज और कोलेस्ट्रॉल हाई होना। 65 साल की उम्र के बाद लोगों में साइलेंट स्ट्रोक का खतरा बढ़ जाता है, क्योंकि रक्त वाहिकाएं कठोर होने के साथ ही सिकुड़ जाती हैं।  स्ट्रोक के कारण ब्रेन को नुकसान पहुंचता है। मरीज अचेत हो जाता है। अपंग हो सकता है और कई मामलों में उसे जान से भी हाथ धोना पड़ता है। यही कारण है कि स्ट्रोक के संकेतों को पहचानना और तत्काल एक्शन लेना जरूरी होता है।

क्या आपके परिवार में भी है कोई 65+

यदि आपके परिवार या परिचितों में भी कोई 65 वर्ष से ज्यादा उम्र का है, तो नीचे दिए कदम उठाने से जिंदगी बचाई जा सकती है  -

-ऐसे मरीज को अकेला न छोड़े। यदि उसे स्ट्रोक आया है तो उसके पास ही रहें। एम्बुलेंस को बुलाने के लिए किसी ओर की मदद लें। तत्काल अस्पताल ले जाएं।

-सुनिश्चित करें कि मरीज आरामदायक स्थिति में रहे।

-यदि उल्टी हो तो मरीज का सिर उठाकर बैलेंस बनाने में मदद करें।

-जांचते रहें कि मरीज की सांस चल रही है। शर्ट के बटन खोल दें। दुपट्टा हटा दें।

-मरीज को कुछ भी खाने या पीने को न दें।

-जरूरी हो तो मरीज को कंबल ओढ़ा दें।

-स्ट्रोक के बाद डॉक्टर की बताई बातों का जरूर ध्यान रखें।

हृदय फुप्फुसीय चिकित्सा (सीपीआर)-

जरूरी हो तो मरीज को हृदय फुप्फुसीय चिकित्सा दें। अंग्रेजी में इसे कार्डियोपल्मोन रीरेसुसीटेशन Cardiopulmonary Resuscitation (CPR) कहते हैं। यह किसी ऐसे व्यक्ति के लिए प्राथमिक उपचार है जो बीमारी की वजह से अचानक गिर गया हो या कॉलेप्स हो गया हो, जिसकी नाड़ी नहीं चल रही हो और उसका सांस लेना बंद हो गया हो। यह एक आपातकालीन प्रक्रिया है जिसमें बाहर से हृदय की मालिश (external cardiac massage) और कृत्रिम सांस देना शामिल है। यह प्रक्रिया रक्त के संचरण को बहाल करने और ऑक्सीजन की कमी के कारण मृत्यु या मस्तिष्क को होने वाले नुकसान को रोकने का प्रयास करती है।

अधिक जानकारी के लिए देखेंः https://www.myupchar.com/disease/stroke  

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