It should not be late in finding out breast cancer it is important to detect the disease in time - कहीं देर न हो जाए स्तन कैंसर का पता लगने में, जरूरी है बीमारी का समय रहते पता लगाना DA Image
12 नबम्बर, 2019|4:06|IST

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कहीं देर न हो जाए स्तन कैंसर का पता लगने में, जरूरी है बीमारी का समय रहते पता लगाना

breast cancer (symbolic image)

Breast Cancer Month : भारत में स्तन कैंसर पीड़ित एक तिहाई महिलाओं की असमय मृत्यु हो जाती है। कारण एक ही है, बीमारी का देरी से पता चलना, क्योंकि कैंसर के स्टेज 4 तक पहुंचते-पहुंचते मरीज के बचने की संभावना महज 22% रह जाती है। 

स्तन कैंसर के शून्य से चार तक, पांच चरण होते हैं। 0 और 1 चरण के कैंसर में मरीज के जीवित रहने की संभावना 100% होती है, वहीं जीवित रहने की यह संभावना चरण 2 में 93%, चरण 3 में 72% और चरण 4 में घटकर 22% तक रह जाती है।

भारत में स्तन कैंसर से बचने की दर 66 फीसदी है, जबकि वैश्विक स्तर पर यह आंकड़ा 80 फीसदी है। देश में स्तन कैंसर की मृत्यु दर को कम करने का तरीका है इसके नियमित परीक्षण के बारे में जागरुकता फैलाना। यही कारण है कि अक्टूबर को दुनियाभर में स्तन कैंसर जागरुकता माह के रूप में मनाया जा रहा है। 

जानिए स्तन कैंसर के बारे में जरूरी बातें और समय रहते इसका पता लगाने के लिए क्या किया जाना चाहिए - 

स्तन कैंसर के शुरुआती चरण कौन-से हैं?

स्टेज 0, जिसे कार्सिनोमा इन-सीटू (सीआईएस) के रूप में भी जाना जाता है, एक प्री-कैंसर स्टेज है जब "एटिपिकल" सेल्स स्तनों में लोब्यूल या दूध नलिकाओं को प्रभावित करना शुरू करती हैं। लोब्यूल वह जगह है जहां स्तन में दूध बनता है, और नलिकाएं उन्हें निपल्स तक ले जाती हैं।

चरण 1 में, कैंसर 2 सेमी से छोटा होता है, लेकिन फैला हुआ नहीं होता है। अथवा ट्यूमर छोटे होते हैं, लेकिन दो या तीन लिम्फ नोड्स में फैल चुके होते हैं। संक्षेप में, कैंसर जन्म ले चुका होता है। रेडिएशन या सर्जरी, या दोनों से इसका इलाज है। इस स्तर पर, डॉक्टर आमतौर पर कीमोथैरेपी की जरूरत नहीं समझते हैं।

परेशानी यह है कि इस स्टेज पर कैंसर का पता लगाना मुश्किल है, जब तक कि मरीज खुद अपनी जांच न करे या नियमित रूप से डॉक्टर के पास जाकर जांच न करवाए। निश्चित रूप से भारत में इसके बचाव की दवाओं का चलन बढ़ा है, इसलिए भारतीय महिलाओं के लिए उम्मीद बढ़ी है और सही जानकारी होने से इस कैंसर का समय रहते पता लगाया जा सकता है।

स्वयं की जांच का सही तरीका क्या है

स्वयं की जांच केवल तभी संभव है जब मरीज अपने शरीर को अच्छी तरह से जानते हो। विचार यह है कि प्रत्येक कर्व, बम्प और मॉल से परिचित हो ताकि अगर कुछ बदलाव होता है, तो तुरंत जान सकें। इस परीक्षण के अलग-अलग तरीके हैं और इनमें महज 5 मिनट का समय लगता है।

अपने आप को एक दर्पण में देखें: 

नए डिम्पल, पिम्पल, कहीं कुछ उठा हुआ या धंसा हुआ हिस्सा, आकार या समरूपता में कोई परिवर्तन जैसी चीजों को देखें। अपनी बाहों को ऊपर उठाएं, और फिर से देखें।

स्पर्श करें और महसूस करें: 

स्तन में किसी भी तरह की गांठ को महसूस करने के लिए हथेली या इसके पीछे वाले हिस्से का उपयोग करें। अंडरआर्म्स से शुरुआत करते हुए अंदर की ओर जांचें। गांठ की जांच के लिए उन्हें थोड़ा दबाव डाल कर देखें। ऐसा करते समय कुछ डॉक्टर्स लेटने की सलाह देते हैं, क्योंकि लेटने से ब्रेस्ट टिश्यू फैल जाते हैं। 

यदि कोई गांठ महसूस होती है, या निपल्स कुछ अलग दिखते हैं, या स्तन सामान्य की तुलना में अलग या भरे हुए लगते हैं, तो डॉक्टर से मिलें। मासिक धर्म के दौरान कुछ बदलाव सामान्य होते हैं, लेकिन समय के साथ अंतर बताना सीख जाएंगे।

कैंसर का जल्दी पता लगाने के आसान टूल्स

स्तन कैंसर की जांच के लिए मैमोग्राम, स्तन अल्ट्रासाउंड और एमआरआई (मैग्नेटिक रेसोनेंस इमेजिंग) का विश्व स्तर पर उपयोग किया जाता है। डॉक्टर सलाह देते हैं कि 45 वर्ष से अधिक उम्र  की महिलाओं को हर दो साल में जांच करवाना चाहिए। जिन परिवारों में स्तन कैंसर का इतिहास है, वहां महिलाओं को ये जांच जल्द करवाना चाहिए।

मैमोग्राम एक्स-रे हैं जिन्हें इन्सानों में स्तन की इमेजिंग के लिए तैयार किया गया है। मैमोग्राम के दौरान कुछ महिलाएं असहज महसूस कर सकती हैं, या हल्का दर्द भी हो सकता है क्योंकि मशीन प्लेटों के बीच स्तन को दबाती है। दो कारणों से ऐसा किया जाता है: पहला - यह देखने के लिए कि क्या फैटी टिशू, स्तन में तंतुओं और नलिकाओं  के बीच कैल्शियम जमा है या नहीं, दूसरा - एक्स-रे के दौरान स्तन को सही जगह पर रखने के लिए।

डॉक्टर दो प्रकार के मैमोग्राम में से किसी एक की सलाह दे सकते हैं: नियमित या 3डी मैमोग्राम। दोनों में अंतर यह है कि नियमित मैमोग्राफी मशीन स्तन के सामने और किनारे से चित्र लेती है, वहीं  3डी मैमोग्राफी मशीन एक 3डी इमेज बनाने के लिए कई एक्स-रे को जोड़ती है। एक अनुमान के मुताबिक, 3डी मैमोग्राफी 25 फीसदी मामलों में गलत जानकारी देती है (जब किसी को कैंसर नहीं होता है, लेकिन एक्स-रे कुछ सफेद डॉट्स दिखती है और कैल्सीफिकेशन का संकेत देती है)। वहीं 3डी मैमोग्राफी महंगी भी है।

स्तन अल्ट्रासाउंड में ट्यूमर का पता लगाने के लिए हाई-फ्रिक्वेंसी तरंगों का उपयोग किया जाता है। घने स्तन ऊतक वाली महिलाओं में ट्यूमर का पता लगाने के लिए ये अधिक उपयोगी हैं (ऐसी महिलाओं में मैमोग्राम प्रोसेस लगभग पूरी तरह से सफेद इमेज दिखाती है।)।

जिन महिलाओं में स्तन के घने ऊतक होते हैं, और जिनके परिवार में स्तन कैंसर का इतिहास है, उनमें सबसे छोटे और बिखरे हुए ट्यूमर का पता लगाने का सबसे प्रभावी तरीका है एमआरआई । एमआरआई मजबूत मैग्नेट का उपयोग करती है और अल्ट्रासाउंड मशीन से छूटे हर बदलाव को पकड़ सकती है।

भलाई के लिए जारी है यह लड़ाई

स्तन कैंसर महिलाओं के जीवन को लंबे समय से प्रभावित कर रहा है। ताजा अध्ययन के अनुसार, दुनियाभर में यह स्थिति खराब होती जा रही है, लेकिन भारत में अब जागरुकता बढ़ी है। 

अगस्त में जर्नल ऑफ ग्लोबल ऑन्कोलॉजी में प्रकाशित अपने लेख में रॉबर्ट डी. स्मिथ और मोहनदास के. मल्ल्थ ने लिखा है कि भारत में कैंसर से होने वाली मृत्यु का आंकड़ा 1990 से 2016 तक दोगुना हो गया है। 2018 में भारत में कैंसर के नए रोगियों की संख्या  1.15 मिलियन पहुंच जाएगी और 2040 तक मरीजों की संख्या फिर दो दोगुना हो जाएगी। 

स्तन कैंसर के बारे में जागरुकता बढ़ाने के लिए इस महीने नैनीताल से त्रिची तक, पूरे भारत में महिलाएं रैलियां निकाल रही हैं और बाइक रैली कर रही हैं। इस अभियानों में आप भी मदद कर सकते हैं: अपने शरीर पर थोड़ा अधिक ध्यान दें और सम्पूर्ण स्वास्थ्य सुनिश्चित करने के लिए जरूरी कदम उठाएं।

अधिक जानकारी के लिए देखें: https://www.myupchar.com/disease/breast-cancer

स्वास्थ्य आलेख www.myUpchar.com द्वारा लिखे गए हैं।

 

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