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International Yoga Day 2019 : योग है भीतर की ओर मुड़ने की विद्या

world yoga day

योग का अर्थ है एकीकरण। एकीकरण का अर्थ होता है, सब कुछ के साथ एकाकार हो जाने का अनुभव। योग का तात्पर्य है- परमात्मा के साथ जीवात्मा के एकाकार होने का विज्ञान। योग मनुष्य की चेतना को ऊपर उठाने की प्रक्रिया है। योग संतुलन बनाने की प्रक्रिया है, जो खुशी को जन्म देता है, उन्मुक्तता का भाव उत्पन्न करता है।

आज योग विज्ञान पहले किसी भी समय के मुकाबले ज्यादा महत्वपूर्ण है। इतिहास में पहली बार, हमारे पास धरती की हर समस्या- पोषण, स्वास्थ्य, शिक्षा- को हल करने की क्षमता है। हमारे पास विज्ञान और तकनीक के जबरदस्त साधन है, जिनमें पूरी दुनिया को कई बार बनाने या तबाह करने की क्षमता है। 

लेकिन अगर इतने शक्तिशाली साधनों का इस्तेमाल करने की काबिलियत के साथ संतुलन, परिपक्वता और शामिल करने की एक गहरी भावना न हो, तो हम विश्वस्तरीय तबाही के काफी करीब हो सकते हैं। हमारी बाहरी खुशहाली की बेरहमी से चल रही खोज की वजह से, धरती भी आज तबाह होने की कगार पर है। 

आज से पहले कभी भी लोगों की किसी पीढ़ी को इतनी सुख-सुविधाएं नहीं मिली थीं, जितनी हमें आज मिल रही हैं। पर फिर भी, हम इतिहास की सबसे आनंदित या प्रेममय पीढ़ी होने का दावा नहीं कर सकते। लोगों की एक बड़ी आबादी लगातार निराशा और तनाव में रहती है। कुछ अपनी नाकामयाबी की वजह से दुखी हैं, लेकिन दुर्भाग्य से बहुत से लोग अपनी सफलता के परिणाम भुगत रहे हैं। कुछ  लोग अपनी सीमाओं से दुखी हैं, लेकिन बहुत से लोग अपनी आजादी से दुखी हैं। 

जिस चीज की कमी है, वह है मानवीय चेतना। बाकी सब कुछ सही स्थिति में है, लेकिन इनसान सही स्थिति में नहीं है। अगर इंसान अपनी खुशहाली की राह को खुद रोकना बंद कर दें, तो हर समाधान तक हमारी पहुंच है। 

यहीं योग एक महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है। बहुत से लोग, योग शब्द सुनकर शरीर को मरोड़ने की कल्पना करने लगते हैं। लेकिन जब हम योग विज्ञान की बात करते हैं, तो हमारा मतलब वह नहीं होता। योग कोई अभ्यास, कसरत या तकनीक नहीं है। योग शब्द का अर्थ है मिलन। इसका मतलब है, किसी के अनुभव में सब कुछ एक हो गया है। 

योग विज्ञान, मानव के भीतरी स्थान का एक गहरा विज्ञान है, जो पूरे अस्तित्व के साथ पूरी सीध और तालमेल में होने की क्षमता देता है। खुशहाली और आजादी की स्थिति में जीने, और चेतना को ऊंचा उठाने की प्रणाली के रूप में योग जितनी विस्तृत प्रणाली कोई नहीं है। 

योग सभी धर्मों से पुराना है। ये हमें यह याद दिलाता है कि अगर हम अपने अंदर देखें और मान्यताएं तथा निष्कर्ष एक ओर रख दें, तो सत्य हर हाल में हमारे अनुभव में आ जाएगा। सत्य कोई मंजिल नहीं है। ये हमारे रात के अनुभव की तरह है- सूरज कहीं नहीं जाता, बात बस इतनी है कि धरती दूसरी तरफ देख रही होती है। ज्यादातर समय लोग दूसरी तरफ देखने में बहुत मग्न होते हैं! उन्होंने इस चीज को जानने के लिए पर्याप्त ध्यान नहीं दिया है कि आत्मा असल में है क्या? योग कोई निष्कर्ष नहीं देता, बल्कि आपको भीतर मोड़ देता है। 

हजारों साल पहले, हिमालय के ऊपरी हिस्सों में एक योगी अवतरित हुए। उन्हें आदियोगी या पहले योगी के नाम से जाना गया। उन्होंने अपने सात शिष्यों को योग विज्ञान प्रदान की, जिन्होंने बाद में इसे पूरे विश्व में फैलाया। ये विज्ञान एक क्रांतिकारी बुनियाद पर आधारित था- कि हर इनसान चेतन होकर विकास कर सकता है। बस भीतर देखने की इच्छा होना जरूरी है। उनके ज्ञान के सार को सिर्फ एक वाक्य में कहा जा सकता है- ‘समाधान सिर्फ भीतर है।’ 

एक बार ऐसा हुआ। कोई दक्षिण भारत में ईशा योग केंद्र खोजता हुआ आया। वो पास के एक गांव में आया और वहीं रहने वाले एक बच्चे से पूछा ‘ईशा योग केंद्र कितनी दूर है?’
बच्चे ने कुछ देर सोचा और फिर कहा- ‘24,996 मील।’ 

आदमी भौचक्का रह गया, ‘क्या? इतनी दूर?’ बच्चा बोला, ‘हां, जिस दिशा में आप जा रहे हैं। अगर आप उल्टा मुड़ जाएं, तो वह बस चार मील दूर है।’

अगर मानव आबादी का एक निश्चित प्रतिशत भीतर मुड़ जाए, तो विश्व में जीवन की गुणवत्ता निश्चित रूप से बदल जाएगी। खासकर अगर विश्व के नेताओं में ऐसा बदलाव आ जाए, तो विश्व के काम करने में जबरदस्त बदलाव आ जाएगा। भीतर कोई दिशा नहीं है। ये एक आयाम है। अंतरराष्ट्रीय योग दिवस मानवता के एक नए आयाम में प्रवेश करने की शुरुआत हो सकता है। 

सद्गुरु

 

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  • Web Title:international yoga day 2019 sadguru says yoga is finding your inner self