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आठ घंटे नही सोएंगे तो ग्रेजुएट नहीं हो पाएंगे

अंतिम वर्ष के जो छात्र रात को आठ घंटे नही सोएंगे उनके ग्रेजुएट होने की संभावना 40 फीसदी तक कम हो जाएगी। एक हालिया शोध में यह दावा किया गया है। शोध में नींद की कमी और कम ग्रेड पॉइंट एवरेज (जीपीए) में संबंध पाया गया है। इससे ग्रेजुएट होने की संभावना कम हो जाती है।.

हालांकि, प्रथम वर्ष में नींद की कमी से जूझ रहे छात्रों के ग्रेजुएट होने की संभावना कम नहीं होती अगर वो अंतिम वर्ष तक आते-आते अपने सोने की बुरी आदतें सुधार लें तो, शोधकर्ताओं ने कहा कि नींद की कमी उन लोगों में ज्यादा होती है जो पढ़ाई, सामाजिक जिंदगी और पार्ट टाइम नौकरी के बीच में उलझे होते हैं। शोधकर्ताओं के अनुसार नींद की कमी के कारण पढ़ने की क्षमता प्रभावित होती है और याददाश्त में भी कमी आती है। 

ऐसे किया शोध : माउंट क्लियर स्टेट यूनिवर्सिटी ऑल रटगर्स यूनिवर्सिटी के शोधकर्ताओं ने 7000 लोगों पर यह अध्ययन किया। 7000 प्रतिभागियों में से आधे लोग कॉलेज के छात्र थे जिनके साथ उनकी जीपीए की जानकारी भी मौजूद थी। वहीं बाकी लोग पहले से ही ग्रेजुएट कर चुके छात्र थे। अध्ययन के दौरान प्रथम वर्ष के छात्रों हर साल इंटरव्यू लिया गया। शोधकर्ताओं ने इंटरव्यू के दौरान उनके सोने के तरीके के बारे में पता लगाया। प्रथम वर्ष के 42 फीसदी छात्रों ने कहा कि वह अत्यधिक नींद की कमी से जूझ रहे हैं। यह शोध प्रीवेंटेटिव मेडिसिन नामक पत्रिका मे प्रकाशित किया गया है। 

शोध के दौरान शोधकर्ताओं को यह भी पता चला कि अंतिम वर्ष के दिन छात्रों में नींद की अत्यधिक कमी थी उनके ग्रेजुएट होने की संभावना 40% तक कम थी। वहीं जिन छात्रों में प्रथम वर्ष और अंतिम वर्ष दोनों सालों में नींद की कमी पाई गई उनके ग्रेजुएट होने की संभावना 25 फीसदी तक कम थी। शोध के दौरान छात्रों के ग्रेजुएट होने की संभावना और उनके स्वास्थ्य व अनुभवों के बीच कोई संबंध नहीं पाया गया। 

प्रोफेसर ओ नील ने कहा था कि स्पेस कॉलोनियां पृथ्वी की तरह ही घूमेंगी ताकि कृत्रिम गुरुत्वाकर्षण पैदा किया जा सके। ऐसा सेंट्रीफ्यूगल की मदद से किया जा सकता है। गुरुत्वाकर्षण पैदा होने से लोगों को बिल्कुल पृथ्वी पर रहने जैसा एहसास होगा। एक कॉलोनी कई मील लंबी होगी और इसमें 10 लाख लोगों को रहने के लिए घर मुहैया कराया जाएगा।

शोध के दौरान शोधकर्ताओं को यह भी पता चला कि अंतिम वर्ष के दिन छात्रों में नींद की अत्यधिक कमी थी उनके ग्रेजुएट होने की संभावना 40% तक कम थी। वहीं जिन छात्रों में प्रथम वर्ष और अंतिम वर्ष दोनों सालों में नींद की कमी पाई गई उनके ग्रेजुएट होने की संभावना 25 फीसदी तक कम थी। शोध के दौरान छात्रों के ग्रेजुएट होने की संभावना और उनके स्वास्थ्य व अनुभवों के बीच कोई संबंध नहीं पाया गया। 

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  • Web Title:If you do not sleep for eight hours then you will not be able to graduate