DA Image
19 जनवरी, 2020|5:40|IST

अगली स्टोरी

class="fa fa-bell">ब्रेकिंग:

Human Rights Day 2019: मानवाधिकार दिवस पर जानिए भारत में एक मरीज को कौन-कौन से अधिकार हासिल हैं

Human Rights Day 2019: हमारे यहां डॉक्टर को भगवान का दूसरा रूप माना जाता है। जब कोई बीमार होता है तो इस भरोसे के साथ डॉक्टर के पास जाता है या अस्पताल में भर्ती होता है कि उसका सही-सही इलाज होगा। कहने का मतलब यह नहीं है कि कोई इस भरोसे का गलत फायदा उठाता है, लेकिन फिर भी एक मरीज को भारतीय संविधान द्वारा दिए गए उसके अधिकारों की जानकारी जरूर होना चाहिए। केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय ने ‘चार्टर ऑफ पेशेंट्स राइट्स’ जारी किया है। इसमें विस्तार से बताया गया है कि मरीज को कौन-कौन से अधिकार प्राप्त हैं? वे बिना किसी भय या संकोच के डॉक्टर से क्या-क्या पूछ सकते हैं? 10 दिसंबर मानवाधिकार दिवस के मौके पर जानिए इसी बारे में - 

सूचना का अधिकार: मरीज अपनी बीमारी और डॉक्टर द्वारा किए जा रहे इलाज के बारे में पूरी-पूरी जानकारी मांग सकता है। मरीज को यह जानने का अधिकार है कि डॉक्टर उसकी बीमारी का इलाज किस प्रकार कर रहा है, जो जांच करवा रहा है, उसका क्या मकसद है। डॉक्टर की यह भी जिम्मेदारी है कि वह सरल भाषा में मरीज या उसकी देखभाल करने वाले को ये सारी बातें बताएं। जो डॉक्टर इलाज कर रहा है, उसकी योग्यता जानने का पूरा अधिकार मरीज को है। इलाज में कितना खर्च आएगा, यह भी डॉक्टर या अस्पताल को बताना होगा। यदि डॉक्टर किसी तरह का ड्रग ट्रायल कर रहा है तो मरीज को इसकी जानकारी देना और उसकी अनुमति लेना जरूरी है। 

रिकॉर्ड और रिपोर्ट का अधिकार:  मरीज या उसकी देखभाल करने वाले को केस पेपर, मरीज के रिकॉर्ड और जांच रिपोर्ट हासिल करने का पूरा अधिकार है। जांच रिपोर्ट भर्ती होने के 24 घंटे के भीतर या डिस्चार्ज के 72 घंटे के भीतर उपलब्ध कराई जानी है। डिस्चार्ज समरी में अस्पताल बताता है कि मरीज को क्यों डिस्चार्ज किया गया और मौत होने पर बताया है कि ऐसा क्यों हुआ। इन सभी दस्तावेजों की मूल प्रति मरीज या उसके परिवार को दी जाती है। 

आपातकालीन इलाज का अधिकार: आपातकालीन स्थिति में देश का कोई भी नागरिक किसी भी सरकारी या निजी अस्पताल में अपना इलाज करवा सकता है। संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत यह अधिकार दिया गया है, जो तय करता है कि प्रत्येक व्यक्ति को जीवन का अधिकार है। इसके तहत बगैर भुगतान के भी डॉक्टरों को तत्काल इलाज करना होगा।

गोपनीयता का अधिकार: डॉक्टर मरीज की बीमारी और उसकी स्थिति के बारे में मरीज या उसके परिवार के अलावा किसी अन्य को जानकारी नहीं देगा। यदि यह एक असाधारण मामला है और इसकी जानकारी को साझा करने से अन्य लोगों को फायदा हो सकता है तो भी मरीज की अनुमति से भी ऐसा किया जाएगा। यदि महिला मरीज का इलाज या जांच कोई पुरुष डॉक्टर कर रहा है तो मरीज किसी दूसरी महिला की उपस्थिति की मांग कर सकती है। कुल मिलाकर अस्पताल हर मरीज की गरिमा को बनाए रखने के लिए जिम्मेदार है।

वैकल्पिक इलाज का अधिकार : मरीज चाहे तो अपना डॉक्टर या अस्पताल बदल सकता है। अस्पताल प्रबंधन या डॉक्टर किसी मरीज को ऐसा करने से नहीं रोक सकते हैं। यहां तक कि उन्हें इलाज के लिए उपलब्ध अन्य विकल्पों के बारे में मरीज को बताना होगा। इसी तरह मरीज के पास अधिकार है कि वह अपनी बीमारी या स्थिति के बारे में सेकंड ओपिनियन यानी दूसरे डॉक्टर से सलाह ले।  

डिस्चार्ज का अधिकार: हर मरीज जब चाहे डिस्चार्ज हो सकता है। यदि मरीज का निधन हो गया है तो डॉक्टर किसी भी स्थिति में परिवार को उसका शव देने से इन्कार नहीं कर सकता है। यदि भुगतान नहीं हुआ है या भुगतान को लेकर विवाद 8ै तो भी डॉक्टर को मरीज को डिस्चार्ज करना होगा।

अन्य जानकारी के लिए देखें: https://www.myupchar.com/first-aid

स्वास्थ्य आलेख www.myUpchar.com द्वारा लिखे गए हैं।

  • Hindi News से जुड़े ताजा अपडेट के लिए हमें पर लाइक और पर फॉलो करें।
  • Web Title:Human Rights Day 2019: Know the rights which a patient has in India on Human Rights Day