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5 जुलाई, 2020|1:49|IST

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कोरोना वायरस महामारी के दौरान एंडोक्राइन बीमारी से पीड़ित लोगों का ऐसे रखें ध्यान

endocrine disease

कोरोना वायरस महामारी ने पूरी दुनिया में हडकंप मचा दिया है। यह उन लोगों के लिए ज्यादा तनाव और जोखिम का कारण बन गया है जो कि पहले से ही किसी बीमारी से पीड़ित हैं। इन लोगों में ऐसे रोगी भी आते हैं जो कि एंडोक्राइन रोग से जूझ रहे हैं। यहां यह जानना जरूरी है कि एंडोक्राइन बीमारी से पीड़ित व्यक्ति अगर कोविड-19 की चपेट में आता है तो कितना जोखिम होता है। एम्स के डॉ. उमर अफरोज का कहना है कि शरीर की एंडोक्राइन प्रणाली उन कोशिकाओं से बनी होती है जो हार्मोन्स पैदा करती है। हार्मोन वे रसायनिक पदार्थ हैं जो खून के जरिए शरीर के आंतरिक अंगों और कोशिकाओं तक पहुंचते हैं। इन आंतरिक अंगों और कोशिकाओं पर हार्मोन्स का विशेष प्रभाव होता है। अपने हार्मोन के स्तर बहुत अधिक या बहुत कम कर रहे हैं, तो हार्मोन डिसऑर्डर हो सकता है।
 
यदि मधुमेह है : 

अगर एंडोक्राइन की सबसे आम बीमारी मधुमेह के शिकार हैं और इस वायरस की चपेट में आ गए हैं तो अधिक गंभीर जटिलताएं पैदा होने का ज्यादा जोखिम है। वायरस के प्रतिकूल प्रभाव टाइप 1 और टाइप 2 डायबिटीज में कोई भेदभाव नहीं करता है। इसके अतिरिक्त यदि अनियंत्रित डाटबिटीज या हृदय रोग भी है तो स्थिति और भी गंभीर है। चीन में देखा गया है कि ऐसे व्यक्ति जो कोविड-19 से संक्रमित थे और जिन्हें मधुमेह था, उनकी सामान्य आबादी की तुलना में गंभीर जटिलताएं और मृत्यु की उच्च दर थी। 

द चाइनीज सेंटर फॉर डिजीज कंट्रोल एंड प्रिवेंशन के अनुसार, वायरस से संक्रमित मधुमेह वाले रोगियों में 7.3 प्रतिशत की घातक स्थिति दर्ज की गई थी। विश्व स्वास्थ्य संगठन की एक रिपोर्ट के अनुसार, पूरी दुनिया में करीब 400 मिलियन से भी ज्यादा लोग डायबिटीज से पीड़ित हैं। संगठन द्वारा जारी गाइडलाइंस में ऐसे लोगों को भीड़ में जाने से बचने को कहा है, क्योंकि ऐसे लोगों की रोग प्रतिरोधक क्षमता भी कमजोर होती है और आसानी से संक्रमित हो सकते हैं। डॉक्टरों के द्वारा यह सुझाया गया है कि डायबिटीज के मरीजों को समय-समय पर अपना ब्लड शुगर लेवल चेक करते रहना चाहिए।
 
एड्रिनल इंसफिशिएंसी : 
डॉ. आयुष शर्मा का कहना है कि जब शरीर में एड्रिनल ग्रंथियों द्वारा बनाए जाने वाले कुछ विशेष हार्मोन का अपर्याप्त मात्रा में उत्पादन होता है तो यह विकार होता है। इस रोग में एड्रिनल ग्रंथि बहुत कम मात्रा में कोर्टिसोल बना पाती है। अक्सर एड्रिनल ग्रंथि एल्डोस्टेरोन को भी अपर्याप्त मात्रा में उत्पादन करती है। एड्रिनल ग्रंथि गुर्दे की चोटी पर स्थित होती है। कोरोना वायरस के समय अपने स्टेरॉयड को बंद न करें, जब तक कि डॉक्टर सलाह न दें। इस समय के दौरान याद रखने वाली सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि अपने स्टेरॉयड को अचानक बंद न करें। यह न केवल एड्रिनल इंसफिशिएंसी वाले लोगों के लिए है, बल्कि किसी भी ऐसे व्यक्ति के लिए जो गंभीर स्थितियों के लिए लंबे समय से स्टेरॉयड ले रहे हैं।
 
हालांकि, कुछ यह मान सकते हैं कि स्टेरॉयड दवाएं इम्यून सिस्टम से समझौता कर सकती हैं, शरीर में स्टेरॉयड की सही मात्रा होना सामान्य शारीरिक कार्यों के लिए जरूरी है और संक्रमण से निपटने के दौरान जीवन रक्षक साबित हो सकती हैं।
 
थायराइड के शिकार : 
आज तक थायरॉइड रोग के रोगियों के वायरस के चपेट में आने के परिणामों की जांच करने के लिए कोई अध्ययन नहीं किया गया है। हालांकि, हाइपोथायरायडिज्म और हाइपरथायरायडिज्म जैसे थायराइड रोगों वाले रोगियों को डॉक्टर के साथ पहले परामर्श के बिना अपनी दवाएं लेना बंद नहीं करना चाहिए। ब्रिटिश थायराइड एसोसिएशन के पास ऐसे कई लोगों के सवाल आए जो कि थायराइड से ग्रसित हैं। एसोसिएशन ने बताया कि चूंकि कोविड-19 नया वायरस है तो यह जानकारी नहीं है कि थायराइड रोग के साथ व्यक्ति को कैसे प्रभावित करता है। हालांकि, थायराइड रोग को सामान्य रूप से वायरल संक्रमण के बढ़ते जोखिम से जुड़ा नहीं जाना जाता है, न ही थायराइड रोग और वायरल संक्रमण की गंभीरता के बीच संबंध है। यह भी बताया कि इम्यून सिस्टम का हिस्सा जो ऑटोइम्यून थायरॉयड स्थितियों के लिए जिम्मेदार है, वह कोविड-19 जैसे वायरल संक्रमण से लड़ने के लिए जिम्मेदार इम्यून सिस्टम के लिए अलग है।
 
अधिक जानकारी के लिए देखें : https://www.myupchar.com/tips/adrenaline-hormone

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  • Web Title:Health Tips: Tips to take care of persons suffering from endocrine disease during the corona virus epidemic