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जानें क्यों आसानी से ठीक नहीं हो रहे मामली दाद-खाज-खुजली, विशेषज्ञों ने इन कारणों पर जताई चिंता

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देशभर में बिना डॉक्टरों की सलाह के बिकने वाले क्वाडीडर्म जैसे मलहमों के चलते फंगल इन्फेक्शन (दाद,खाज-खुजली) की दवाएं बेअसर होती जा रही हैं।

दरअसल, इन मलहमों में स्टेरॉयड की मात्रा मौजूद रहती है, जिसके लगातार उपयोग के चलते फंगल इन्फेक्शन में वर्तमान दवाएं बेअसर साबित हो रही हैं। इसका परिणाम है कि जिन दवाओं से पहले फंगल इन्फेक्शन मात्र हफ्तेभर में ठीक हो जाता था, अब उन्हीं दवाओं से ठीक होने में दो महीने या इससे अधिक का वक्त का वक्त लग जा रहा है।

त्वचा रोग विशेषज्ञ डॉक्टरों के संगठन आईएडीवीएल के उपाध्यक्ष डॉक्टर ऋषि पाराशर ने ‘हिन्दुस्तान' से बातचीत में कहा कि फिलहाल ज्यादातर मरीज फंगल इन्फेक्शन के लिए बाजार में प्रचिलित मलहम का इस्तेमाल करते हैं। इन मलहमों में स्टेरॉयड मौजूद होता है, जो तुरंत राहत तो देता है लेकिन इससे फंगल पूरी तरह से खत्म नहीं होता। बल्कि फंगल में प्रतिरोधक क्षमता विकसित हो जाती है और दवाएं बेअसर कम हो जाता है।

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सिर्फ दो दवाएं ही असरदार 

आईएडीवीएल के उपाध्यक्ष डॉक्टर ऋषि पाराशर ने कहा कि अभी एक या दो ही ओरल दवाएं बची हैं, जिनका असर कायम है। इनके भी बेअसर होने के बाद सिर्फ इन्जेक्टेबल दवाएं ही विकल्प के रूप में बचेंगी, जिनका अच्छा खासा साइड इफेक्ट होता है। 

घरेलू उपाय से बचाव संभव
फंगल इंफेक्शन प्रभावित हिस्से को हल्दी मिले पानी से धोना फायदेमंद होता है। साथ ही नीम की पत्तियों को पानी में उबालकर इस पानी का प्रयोग दिन में कई बार त्वचा पर करने से भी संक्रमण को खत्म किया जा सकता है।

72 फीसदी लोग स्टेरॉयड युक्त मलहम लगा रहे
आईएडीवीएल के ही एक अन्य पदाधिकारी डॉक्टर दिनेश कुमार ने कहा कि हमारा एक अध्ययन बताता है कि देश में फंगल इन्फेक्शन के लिए 53 से 72 फीसदी तक लोग स्टेरॉयड युक्त मलहम का इस्तेमाल करते हैं। इससे फंगल में प्रतिरोधक क्षमता बढ़ने के साथ अन्य परेशानियां जैसे त्वचा का पतला होना और चेहरे पर बाल आने जैसी समस्याएं बढ़ रही हैं।

नामी दवाओं के लिए अलर्ट जारी
नई दिल्ली। दवा नियामक ड्रग कट्रोलर जनरल ऑफ इंडिया ने कई नामी फार्मा कंपनियों के बड़े ब्रांड्स की दवाओं को लेकर अलर्ट जारी किया है। ड्रग कट्रोलर ने पेनकिलर और एंटीबायोटिक श्रेणी की इन दवाओं के कई बैच को प्रयोग के लिए सुरक्षित नहीं पाया है। इन दवाओं में ट्रायोका फार्मासुटिकल की डायनापार जेल, कैडिला फार्मासुटिकल की स्टॉपवॉम और टर्क फार्मासुटिकल की टॉरडेस्क जैसी दवाएं शामिल हैं।

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