Do you know what is type-1 and type-2 diabetes symptoms and prevention - क्या है टाइप-1 और टाइप-2 डायबिटीज, जानें इसके लक्षण और बचाव DA Image
15 दिसंबर, 2019|8:26|IST

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क्या है टाइप-1 और टाइप-2 डायबिटीज, जानें इसके लक्षण और बचाव

diabetes patients

टाइप-1 में शरीर में इन्सुलिन बनना कम हो जाता है या बंद हो जाता है। इन्सुलिन एक तरह का हार्मोन है जो शुगर को रक्त में मिलने में सहायक होता है। इसकी कमी डायबिटीज का कारण बनती है। टाइप-1 डायबिटीज को दवाओं से नियंत्रित किया जा सकता है, लेकिन टाइप-2 के लक्षण ज्यादा खतरनाक होते हैं। 

एम्स के डॉ अनुराग शाही के मुताबिक टाइप-1 डायबिटीज के लक्षण इस प्रकार हैं- बहुत ज्यादा प्यास लगना, ज्यादा बार पेशाब आना, थकावट और सुस्ती महसूस होना, त्वचा पर कट या घाव धीरे-धीरे ठीक होना, अक्सर भूखा महसूस होना, खुजली, त्वचा संक्रमण, धुंधला दिखना, बगैर कारण पता चले शरीर का वजन घटना, बार-बार मूड बदलना, सिर दर्द, चक्कर आना, टांग की मांसपेशियों में ऐंठन आदि। 

अगर हाथ पैर सुन्न हो रहे हों, धुंधला दिखाई देने लगे, अत्यधिक पेशाब आ रही हो या पेशाब के लिए बार-बार जाना पड़ रहा हो और घाव या छाले ठीक होने में ज्यादा समय लग रहा हो तो ऐसे लोगों को डॉक्टर से मिलकर यह पता लगाने के लिए कोशिश करनी चाहिए कि कहीं ये लक्षण डायबिटीज तो नहीं? 

टाइप-1 मधुमेह से बचने के लिए जीवनशैली पर ध्यान देना जरूरी है। अपना खानपान संतुलित रखें और एक्सरसाइज करें। बचाव या रोकथाम के लिए कोई विशेष उपचार नहीं है लेकिन फिर भी सावधानियां बरतना आवश्यक है।

टाइप-2 डायबिटीज-
डॉक्टर शाही का कहना है कि टाइप-2 डायबिटीज के लक्षण कई लोगों को महसूस ही नहीं होते। टाइप-2 डायबिटीज का पता अक्सर किसी अन्य बीमारी की जांच के दौरान ही लगता है लेकिन अगर यह लक्षण लगातार नजर आए तो सतर्क हो जाना चाहिए। टाइप-1 के लक्षणों के अलावा जननांगों के आसपास खुजली महसूस होना, त्वचा पर कट या घाव ठीक होने में जरूरत से ज्यादा समय लगना, अक्सर चिड़चिड़ापन होना और बार-बार मूड बदलना टाइप-2 के अन्य लक्षण हैं। कुछ लोगों को त्वचा पर काले रंग के चकत्ते भी दिखाई देते हैं। जांघ गर्दन पर भी ऐसे काले धब्बे बनते नजर आते हैं।

टाइप-2 डायबिटीज से कैसे बच सकते हैं-
टाइप-2 डायबिटीज का सबसे बड़ा खतरा यह है कि इसे रोका नहीं जा सकता। माता-पिता में है तो बच्चों में यही बीमारी होने की आशंका कई गुना बढ़ जाती है। इससे बचने के सामान्य तरीके हैं- खान-पान पर नियंत्रण, जीवन शैली में सुधार और नियमित व्यायाम। फलों का सेवन ज्यादा करें। ऐसे मरीजों के लिए सुबह टहलना, साइकिल चलाना फायदेमंद होता है। तनाव न लें।

टाइप-2 डायबिटीज के मरीजों को क्या करना चाहिए
जिन परिवारों में यह बीमारी अनुवांशिक है, वहां के सदस्यों को हर 2 से 3 माह में हीमोग्‍लोबिन की जांच करनी चाहिए। हीमोग्‍लोबिन A1c टेस्‍ट से रक्त में ग्लाइकोसिलेटेड हीमोग्लोबिन की मात्रा को जांचा जाता है। यदि रक्त में इसकी मात्रा 6.5 फीसदी से अलग है तो खतरा है। दूसरी जांच फास्टिंग ग्लूकोज ब्लड टेस्ट है। अगर आपके फास्टिंग ग्लूकोज ब्लड का स्तर 126 से अधिक है तो समझिए डायबिटीज का खतरा है। दोनों ही स्थितियों में तत्काल डॉक्टर से संपर्क करें और इलाज शुरू करें।

अधिक जानकारी के लिए देखें: https://www.myupchar.com/disease/diabetes
 

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