Do not ignore throat infection - गले के संक्रमण की न करें अनदेखी DA Image
17 नबम्बर, 2019|5:10|IST

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गले के संक्रमण की न करें अनदेखी

sore throat

गले में संक्रमण यानी थ्रोट इन्फेक्शन बेशक आम समस्या है, लेकिन बढ़ जाए तो काफी गंभीर हो जाती है। खासकर बदलते मौसम के दौरान काफी लोग इसके शिकार होते हैं। बेहद तकलीफ देने वाली इस बीमारी के बारे में बता रही हैं सुमन

गले में संक्रमण की मुख्य वजह बैक्टीरिया (जीवाणु) व वायरस (विषाणु) के संपर्क में आना है। गले में दोनों तरफ झिल्लीयुक्त ऊतक होते हैं, जिन्हें टॉन्सिल कहते हैं। इनमें बैक्टीरिया या वायरस का हमला होने पर सूजन आ जाती है और दर्द होता है। 

गले की स्थिति
हमारा गला शरीर का ऐसा हिस्सा है, जो सबसे ज्यादा बाहरी स्थितियों से प्रभावित होता है। जैसे मौसम में परिवर्तन, प्रदूषण, दूषित हवा में सांस लेना, विषाक्त भोजन करना आदि। इसकी वजह से विभिन्न जीवाणु हमला करते हैं, जिसकी वजह से गले का संक्रमण हो जाता है। ये जीवाणु मुख्यत: तीन प्रकार के होते हैं-बैक्टीरिया, वायरस व फंगी। 

बैक्टीरियल थ्रोट इन्फेक्शन 
बैक्टीरियल थ्रोट इन्फेक्शन सबसे आम है और अकसर स्ट्रेप्टोकोक्कल, स्टैफीलोकोक्कल जैसे बैक्टीरिया की वजह से होता है। वायरल थ्रोट इन्फेक्शन इंफ्लुएंजा वायरस की वजह से होता है और आमतौर पर इसमें सर्दी, जुकाम, छींकना जैसे लक्षण दिखाई देते हैं। फंगल इन्फेक्शन उन्हें होता है, जिन्हें डायबिटीज की बीमारी होती है या जो एंटी बायोटिक का सेवन काफी करते हैं।
यह इन्फेक्शन रोगी के छींकने या खांसने से एक से दूसरे व्यक्ति तक फैल जाता है। बहुत से रोगियों का गला दर्द के कारण लाल पड़ जाता है और पानी तक पीने में परेशानी होती है। संक्रमण से गले के अंदर दाने उभर आते हैं या घाव भी बन जाते हैं। अगर दवा से आराम नहीं मिल रहा है, दर्द लंबे समय तक बना हुआ है और घाव भी है, तो यह गले के कैंसर का लक्षण हो सकता है।

लक्षण को पहचानें
संक्रमण के लक्षण आमतौर पर 1 से 3 दिनों में दिखाई देने लग जाते हैं और हर व्यक्ति में लक्षण अलग-अलग हो सकते हैं। संक्रमण के समय गले में सूजन दिखाई देती है और खाना खाने में काफी कठिनाई महसूस होती है। गले में किसी प्रकार का दर्द, खराश, कांटे जैसे चुभना आदि गले के संक्रमण के लक्षण हैं। ठंड के साथ बुखार, गले में दर्द, गले का सूखना, बार-बार छींकना, खांसी, सांस लेने में परेशानी होना, निगलने में परेशानी भी इसके लक्षण हो सकते हैं। अचानक जीभ और गले में सूजन आ जाए या तेज बुखार हो जाए तो भी लापरवाही बिल्कुल न बरतें। 

घट रही है प्रतिरोधक क्षमता
बदलती जीवनशैली इस संक्रमण के होने की खास वजह बन गई है। आजकल हर उम्र के लोगों की जीवनशैली असंतुलित सी हो गई है। वे समय बचाने के चक्कर में जंक फूड से काम चला रहे हैं। पौष्टिक आहार उनके भोजन से गायब हो रहा है, जिससे उनमें कीटाणुओं से लड़ने की प्रतिरोधक क्षमता कम हो रही है और वह बार-बार इस संक्रमण के शिकार हो रहे हैं। ऐसे लोगों की भी कमी नहीं, जो इस समस्या को बहुत ही हल्के तरीके से लेकर खुद ही दवा ले लेते हैं और समस्या को गंभीर कर लेते हैं।
(मैक्स सुपर स्पेशियलिटी हॉस्पिटल के इंटरनल मेडिसिन विभाग के डॉ. आलोक जोशी से की गई बातचीत पर आधारित)


उपायों पर दें ध्यान
’गले में खराश होने पर गर्म पानी में नमक डालकर गरारे करना बहुत फायदेमंद होता है। साथ ही स्टीम भी ली जा सकती है। 
’दूध में हल्दी मिलाकर पिएं, क्योंकि उसमें एंटीबायोटिक गुण होते हैं।  रात में सोने से पहले गर्म दूध में हल्दी और थोड़ी-सी काली मिर्च मिलाकर पिएं। 
’लहसुन की कली को मुंह में रखकर चूसने से भी आराम मिलता है। 
’अदरक, तुलसी, काली मिर्च और लौंग डली मसाला चाय का सेवन करें। 

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