DA Image

अगली स्टोरी

class="fa fa-bell">ब्रेकिंग:

दिमाग में खून, जान को खतरा, जानिए इस रोग और इलाज के बारे में  

Brain cancer

हमारे शरीर में ह्रदय से शरीर के अन्य हिस्सों तक खून पहुंचाने वाली नलियों का काम धमनियां (आर्टरीज़) करती हैं। ऐन्यरिज्म वह स्थिति होती है, जिसमें धमनी की दीवार कमजोर हो जाती है और ज्यादा दबाव से वह गुब्बारे की तरह फूल जाती है। जब ऐसा ब्रेन (दिमाग या मस्तिष्क) की किसी धमनी में होता है तो ब्रेन ऐन्यरिज्म कहलाता है। कई बार यह दबाव इतना अधिक हो जाता हैं कि धमनी फट जाती हैं और खून बाहर निकलने लगता है। जानिए इसी बारे में -

कितनी खतरनाक है यह बीमारी
दुनियाभर में 100 में से हर तीन को यह बीमारी होती है। यानी उसके दिमाग में भीतर कहीं न कहीं आंतरिक रक्त स्राव (खून बहना) होता रहा है। ब्रेन के पिछले हिस्से में ऐन्यरिज्म के कारण धमनियों के फटने की आशंका ज्यादा रहती है, बजाए कि ब्रेन के आगे के हिस्से में। ऐन्यरिज्म के अधिकांश मामले सीटी स्कैन, एमआरआई या अन्य टेस्ट करवाते समय पता चलते हैं।।

ब्रेन में किसी धमनी के इस तरह फटने से ब्रेन स्ट्रोक या हेमरेज होता है। एक अनुमान के मुताबिक, दुनिया की 3% आबादी को इसी स्थिति का सामना करना पड़ रहा है। महिलाओं में ऐसा होने की आशंका 50 फीसदी से ज्यादा है। ऐन्यरिज्म के कारण जब कोई धमनी फटती है तो इससे सबरैचनोइड हेमरेज (Subarachnoid Haemorrhage - SAH) होता है। आम भाषा में कहें तो दिमाग में खून बहने लगता है। दुनिया में 0.4% से 0.6% मौतों का कारण SAH होता है। भारत में हर साल इसके 76,500 से 2,04,100 नए मामले सामने आते हैं।

दुनिया की कई जानी-मानी हस्तियां SAH से जूझ चुकी हैं, जिनमें अमेरिकन एक्ट्रेस शेरॉन स्टोन और कनाडियन सिंगर तथा सॉन्ग राइटर नील यंग शामिल हैं। मार्च 2019 में Game of Thrones की एक्टर एमिलिया क्लार्क (डेनेरीस टार्गैरियन) ने खुलासा किया था कि शो के शुरुआती सीजन की शुटिंग के दौरान उन्हें दो बार ब्रेन में खून के बहने का सामना करना पड़ा।

आखिर क्यों बहता है दिमाग में खून?

ऐन्यरिज्म का सही-सही कारण तो अब तक पता नहीं है, लेकिन डॉक्टरों का मानना है कि इसका संबंध हाई ब्लड प्रेशर, ब्रेन ट्रॉमा (मस्तिष्क आघात), एथेरोस्क्लेरोसिस (कोलेस्ट्रॉल के कारण धमनियां अवरुद्ध होना) या कुछ मामलों में वंशानुगत कारण हैं।

ऐन्यरिज्म के विभिन्न प्रकारों को लेकर कई तरह की बातें हैं। कुछ केस में धमनी की दीवार की संरचना को नुकसान होता है (उच्च रक्तचाप से ग्रस्त लोगों में यह आशंका ज्यादा रहती है)।

ऐन्यरिज्म पर हाल ही में यूनिवर्सिटी ऑफ ससेक्स ने यूनिवर्सिटी ऑफ सिएटल के साथ मिलकर अध्ययन किया था। इसमें पाया गया कि कुछ मामलों में ब्रेन ऐन्यरिज्म का कारण PDGFRB जीन में आनुवंशिक परिवर्तन होता है। यही स्थिति इन्सानी शरीर में विभिन्न डेवलपमेंटल डिसऑर्डर के लिए जिम्मेदार होती है।

  कुछ अध्ययनों में पाया गया है कि एंटीकैंसर  ड्र्ग - Receptor Tyrosine Kinase Inhibitors - का उपयोग कर ऐन्यरिज्म का सफलतापूर्वक इलाज किया जा सकता है। हालांकि इस दवा पर अभी टेस्ट हो रहे हैं, लेकिन माना जा रहा है कि यह ऐन्यरिज्म के कारण को पहचाने और उसका इलाज करने में क्रांतिकारी साबित हो सकती है।

ऐन्यरिज्म के लक्षण

ब्रेन में अतिरिक्त दवाब पड़ने पर ही लगातार हो रहे ऐन्यरिज्म का पता चल पाता है। इस स्थिति में निम्न लक्षण नजर आ सकते हैं - धुंधला नजर आना, आंखों पर दर्द, सिरदर्द, चेहरे पर दर्द और बोलने में दिक्कत आना। ऐन्यरिज्म के कारण धमनी फटने पर तेजी से सिरदर्द होता है। गर्दन अकड़ जाती है और बेहोशी आती है। आमतौर पर ऐन्यरिज्म के लक्ष्ण आसानी से पहचान में नहीं आते हैं, इसलिए जब तक स्ट्रोक नहीं होता है, इसे डायग्नोस करने में परेशानी आती है। नेशनल इंस्टिट्यूट ऑफ न्यूरोलॉजीकल डिसऑर्डर्स एंड स्ट्रोक, यूके के मुताबिक, ऐन्यरिज्म के कारण धमनी फटने से 25 फीसदी लोग पहले 24 घंटों के अंदर या अन्य जटिलताओं के कारण 6 माह में जान से हाथ गवां बैठते हैं। जो जिंदा बच जाते हैं, उनमें न्यूरोलॉजिकल डैमेज होता है और ब्रेन का कुछ हिस्सा काम करना बंद कर देता है।

भारत में ऐन्यरिज्म की स्थिति

भारत में ऐन्यरिज्म की स्थिति बहुत खराब है। न्यूरोलॉजी इंडिया में प्रकाशित अपने लेख में सुधीर आम्बेकर ने लिखा है कि भारत में ऐन्यरिज्म के 40 फीसदी मामले गंभीर होते हैं। यूनिवर्सिटी ऑफ मायामी के फैलो सुधीर के मुताबिक, भारत में ऐसे केस की रजिस्ट्री की जरूरत है, ताकि उनका अध्ययन कर पुख्ता इलाज तलाशा जा सके।

ऐन्यरिज्म का इलाज

ऐन्यरिज्म के इलाज के सीमित विकल्प मौजूद हैं। एंडोवस्कुलर कोइलिंग एक तरीका है। इसमें खोपड़ी खोलकर सर्जरी करने के बजाए एक कोइल को धमनी के जरिए ब्लड में भेजा जाता है और उस ऐन्यरिज्म पर लगाया जाता है जहां से रक्त बह रहा है। दूसरा तरीका सर्जिकल क्लिपिंग है। इसमें खोपड़ी खोलकर ऐन्यरिज्म के स्थान पर जाते हैं और खून का बहना रोका जाता है। तीसरा तरीका डाइवर्टर्स का उपयोग है, जिनकी मदद से धमकी को फटने से बचाया जाता है।

(यह स्वास्थ्य आलेख www.myupchar.com द्वारा लिखा गया है, जो सेहत संबंधी भरोसेमंद सूचनाएं प्रदान करने वाला देश का सबसे बड़ा स्रोत है। 

इस विषय पर ज्यादा जानकारी हासिल करने के लिए जरूर पढ़ें 

 

 

  • Hindi Newsसे जुडी अन्य ख़बरों की जानकारी के लिए हमें पर ज्वाइन करें और पर फॉलो करें
  • Web Title:dimag mein khoon jamna janiye is rog aur ilaaz ke bare mein