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21 जनवरी, 2020|5:05|IST

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दिल की बीमारियों का नींद से हैं गहरा कनेक्शन, बचाव के ये हैं उपाय

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इंसोमेनिया एक तरह का स्लीप डिसऑर्डर है। अब अमेरिकन हार्ट एसोसिएशन (AHA) ने इसके नए खतरों से दुनिया को आगाह किया है। इस रिपोर्ट के अनुसार, इंसोमेनिया हार्ट अटैक और स्ट्रोक के साथ ही कॉरनेरी आर्टरी डिसीज के लिए भी जिम्मेदार है।

इस नतीजे पर पहुंचने के लिए AHA ने 13 लाख लोगों पर अध्ययन किया। इनमें से कुछ लोगों को हार्ट की बीमारी थी और कुछ को नहीं। इंसोमेनिया का पता लगाने के लिए जेनेटिक वेरिएंट्स का उपयोग किया गया।

इस अध्ययन की लीड ऑथर और स्टॉकहोम (स्वीडन) के कारोलिंस्का इंस्टिट्यूट में कार्डियोवेस्क्यूलर एंड न्यूट्रीशनल इपीडेमिलॉजी की एसोसिएट प्रोफेसर सुसाना लार्सन के अनुसार, अच्छी सेहत के लिए इंसोमेनिया के कारणों का पता लगाना और समय रहते उसका इलाज करना जरूरी है।  

यह स्टडी 19 अगस्त 2019 को सर्कुलेशन नामक मेडिकल जर्नल में “Genetic Liability to Insomnia and Cardiovascular Disease” शीर्षक से प्रकाशित हुई है।

भारत में इंसोमेनिया की स्थिति-

मई 2017 में कोलकाता के एक अस्पताल में 390 मरीजों पर 28 दिन तक अध्ययन किया गया था। पता चला था कि उनमें से 45 फीसदी में किसी ने किसी रूप में इंसोमेनिया पाया गया है। यह स्टडी इंटरनेशनल जर्नल ऑफ कन्टेम्परेरी मेडिकल रिसर्च में प्रकाशित हुई है। इस स्टडी में इंसोमेनिया और हार्ट की बीमारी, इंसोमेनिया और डायबिटीज, इंसोमेनिया और हायपेरटेंशन के बीच संबंध पाया गया है।  


ताजा आंकड़ों के मुताबिक, भारत में हर एक लाख की आबादी पर 272 लोग कार्डियोवेस्क्यूलर डिजीज से ग्रस्त हैं। वहीं दुनिया में प्रति एक लाख पर यह आंकड़ा 235 है। यदि हार्ट की बीमारियों के साथ ही मल्टीमॉर्बलिटी (तरह-तरह की बीमारियां) के कारणों से समझकर इंसोमेनिया का जल्द से जल्द इलाज शुरू किया जा सकता है।  

मल्टीमॉर्बलिटी को इस तरह समझा जा सकता है कि किसी मरीज को एक ही बार में डायबिटीज, हायपरटेंशन और किडनी की बीमारी है, तो यह मल्टीमॉर्बलिटी की स्थिति है।  

नींद का हार्ट की सेहत से संबंध-

दुनिया की 10-30 फीसदी आबादी इंसोमेनिया से ग्रस्त है। इंसोमेनिया में मरीज ठीक से सो नहीं पाता है। यदि रात में कभी नींद खुल जाए तो फिर सोना बहुत मुश्किल होता है। बार-बार नींद खुलाना यानी लंबी गहरी नींद नहीं आना भी इंसोमेनिया की बीमारी है।

वैज्ञानिक यह स्थापित कर चुके हैं कि अच्छी सेहत के लिए कम के कम सात घंटे की नींद जरूरी है। पर्याप्त नींद नहीं आने से सिरदर्द, गुस्सा, ध्यान नहीं लगाना जैसे समस्याओं खड़ी होती है। लंबे समय तक यह स्थिति बने रहने से हार्ट पर असर पड़ता है। सर्कुलेशन जर्नल रिपोर्ट में लार्सन ने कहा है कि नींक की कमी का असर तनाव मैनेजमेंट में पड़ता है।

कुछ लोगों में रोज-रोज के तनाव के कारण इंसोमेनिया हो सकता है। दिमाग में एक खास तरह के विचार अटक जाते हैं और फिर नींद में बाधा बनते हैं। इन मनोवैज्ञानिक कारणों के अलावा कुछ मेडिकल डिसऑर्डर भी इसके जिम्मेदार होते हैं। जैसे - साइनसाइटिस, हाइपरथायरायडिज्म और गैस्ट्रोइसोफेगल रिफल्क्स डिजीज (जिसमें पेट का एसिड के इसाफगस में प्रवेश कर जाने से इन्सान असहज हो जाता है।) इन कारणों से भी रात-रात भर नींद नहीं आती है।  

-नहीं आती है नींद तो आजमाएं ये टिप्स-

-सोने जाने का समय निश्चित करें। कोशिश करें कि कम से कम 7-8 घंटे सोएं।

-शराब, निकोटीन और कैफीन से बचें, विशेषकर रात के समय।

-दिन में झपकी न लें।

-अपने बिस्तर को यथासंभव आरामदायक बनाएं।

-सोने से पहले लाइट बंद कर दें।

-जितना हो सके, शोर वाली जगहों से दूर सोएं।

-सोने से पहले बहुत ज्यादा न खाएं-पिएं।

-रोजाना व्यायाम से भी मदद मिलती है।

-सोने से ठीक पहले अपने फोन का इस्तेमाल न करें।

-तनाव को कम करने के लिए ध्यान और योग की मदद लें।

-फिर भी आराम नहीं मिलता है, तो डॉक्टर से मिलें।


अधिक जानकारी के लिए देखें-  https://www.myupchar.com/disease/insomnia

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  • Web Title:dil ki beemaariyon ka neend se hain gahara kanekshan bachaav ke ye hain upaay