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23 जनवरी, 2020|10:35|IST

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डायबिटीज बिगाड़ रहा बचपन को, इसकी चपेट में अब ज्यादा बच्चे

diabetes kids

Diabetes : पिछले दिनों मशहूर फिल्म स्टार प्रियंका चोपड़ा के पति होने के कारण भारत में लोकप्रियता हासिल कर लेने वाले निक जोनास के एक खुलासे ने भारत में भी बच्चों में मधुमेह (डायबिटीज) के बढ़ते मामलों को एक बार फिर गंभीर चर्चा का मुद्दा बना दिया है। जोनास ने हाल ही में खुलासा किया है कि वह बचपन में ही डायबिटीज (मधुमेह) की चपेट में आ गए थे। अमेरिका के मशहूर गायक, गीतकार और एक्टर जोनास ने सात बरस की उम्र में थिएटर की दुनिया में पहला कदम रखा था और 2005 में 13 वर्ष की उम्र में वह डायबिटीज के शिकार हो गए।

बचपन में डायबिटीज होना अब एक चौंकाने वाली बात नहीं रही। स्कूल जाने की उम्र वाले 10 बच्चों में से एक डायबिटीज की कगार पर है। 5 से 9 वर्ष के बच्चों और 10 से 19 वर्ष के किशोंरों पर किए गए व्यापक राष्ट्रीय पोषण सर्वेक्षण (सीएनएनएस ) 2016-18 के हाल ही में जारी हुए नतीजों में भी यह बात सामने आई है। यह भी पता चला है कि इन बच्चों में से 1 फीसदी बच्चे डायबिटीज के मरीज हैं।

दुनिया की डायबिटिक केपिटल बनते जा रहे भारत में ही कुछ आनुवांशिक कारणों और कई मर्तबा जीवनशैली, खान-पान के कारण बच्चे टाइप-1 और टाइप-2 दोनों ही किस्म के डायबिटीज के शिकार हो जाते हैं। दक्षिण एशियाई देशों में बच्चों में डायबिटीज के मामले में भारत में ही स्थिति सबसे ज्यादा चिंताजनक है। इस बाबत पूरा ध्यान दिए जाने की इसलिए भी जरूरत है कि मधुमेह बच्चों की आंखों और किडनियों पर बुरा असर डाल सकता है।

myupchar.com से जुडे एम्स के डॉ. अनुराग शाही के मुताबिक टाइप-2 डायबिटीज का पूरा इलाज तो संभव नहीं है, लेकिन इसे दवा और जीवनशैली में बदलाव के साथ नियंत्रण में रखा जा सकता है। टाइप-1 डायबिटीज की बात करते हुए वह बताते हैं कि इसका कारण अब तक स्पष्ट नहीं हो सका है, लेकिन अब तक की जानकारी के मुताबिक यह आनुवांशिक दोष है।

किसे ज्यादा है खतरा - अधिक वजन वाले बच्चों को, परिवार में आनुवांशिक बीमारी होने पर और इन्सुलिन प्रतिरोधी होने पर

 

क्या होते हैं बच्चों में मधुमेह के लक्षण

जब बच्‍चों में शुगर लेवल असामान्य रूप से बढ़ जाता है, तो उन्‍हें बहुत ज्यादा प्यास लगती है। वो पानी पीने के अलावा, जूस और ड्रिंक जैसी लिक्विड चीजों का भी ज्यादा सेवन करना चाहते हैं।

डायबिटीज का ये सबसे सामान्य लक्षण है, जो बड़े लोगों में भी पाया जाता है।

1. जब बच्चे की प्यास बढ़ेगी और वो ज्यादा लिक्विड लेगा तो जाहिर है, उसे बार-बार पेशाब जाना पड़ेगा। 

2. बच्चे को अगर डायबिटीज की समस्या हो जाए, तो अक्सर उनकी भूख बढ़ जाती है, लेकिन वह कितना भी खा ले उसका वजन ज्यादा होने की बजाय कम होने लगता है। 

3. डायबिटीज से पीड़ित बच्चे इन्सुलिन की कमी के कारण थके और दूसरे बच्चों की तुलना में सुस्त लगने लगते हैं। 

4. शरीर के घाव जल्दी नहीं भरना भी एक लक्षण हो सकता है।

 

इस बात का रखें खयाल

अगर बच्चे में इन लक्षणों की शुरुआत में ही पहचान हो जाती है, तो वह बच्चा इस समस्या से जल्द मुक्त हो सकता है। डायबिटीज में खास देखभाल और परहेज की जरूरत होती है। एक बार पैरेंट्स उसकी बीमारी को पहचान लें, उसके बाद उनके बच्चे का इलाज संभव हो जाएगा।

पेरेंट्स की भूमिका अहम

बच्चों के डायबिटीज से जंग में पेरेंट्स की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण हो जाती है। उन्हें बच्चों में स्वस्थ जीवनशैली विकसित करना चाहिए और पौष्टिक आहार को लेकर उनकी रुचि में इजाफे की कोशिश करना चाहिए। रिफाइंड कार्बोहाइड्रेट, शुगर, मिठाई, मैदे वाली सफेद रोटी, पेस्ट्री, सोडा और जंक फूड से बच्चों को दूर रखें। बच्चे को नियमित एक्सरसाइज की आदत डालें। उन्हें इन्डोर की बजाय आउटडोर गेम खेलने के लिए प्रोत्साहित करें। डायबिटिक बच्चे की सेहत का निश्चित तौर पर पूरा खयाल रखें, लेकिन उसे भी वास्तविकता से अवगत कराएं। उसे यह बात समझाएं कि डायबिटीज पर नियंत्रण उसे जिंदगी और अधिक खुलकर जीने में मदद करेगा। बच्चे को घर में भी अलग व्यवहार न दें। उसे सामान्य जिंदगी जीने का हक है।

अधिक जानकारी के लिए देखेंः https://www.myupchar.com/disease/diabetes

स्वास्थ्य आलेख www.myUpchar.com द्वारा लिखे गए हैं। 

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  • Web Title:Diabetes is spoiling childhood more children are now vulnerable to it