डेंगू का शॉक सिंड्रोम मरीजों की जान पर पड़ रहा भारी, जानें क्या है ये बला - dengue ka shok syndrome mareejon ki jaan par pad raha bhaaree jaanen kya hai ye bala DA Image

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डेंगू का शॉक सिंड्रोम मरीजों की जान पर पड़ रहा भारी, जानें क्या है ये बला

राजधानी दिल्ली में सितंबर में डेंगू और मलेरिया के मामले तेजी से बढ़े हैं। चिकित्सकों के अनुसार, सभी मरीजों को अस्पताल में भर्ती होने की जरूरत नहीं होती लेकि नइस बीमारी का शॉक सिंड्रोम मरीजों की जान पर भारी पड़ रहा है।

क्या है शॉक सिंड्रोम-
एम्स के मेडिसिन विभाग के प्रोफेसर आशुतोष बिश्वास के मुताबिक, शॉक सिंड्रोम में डेंगू का मरीज बेचैन हो जाता है और तेज बुखार के बावजूद त्वचा ठंडी महसूस होती है। मरीज धीरे-धीरे होश खोने लगता है। नाड़ी कभी तेज तो कभी धीरे चलती है। रक्तचाप एकदम कम हो जाता है। इससे मरीज शॉक में चला जाता है और महत्वपूर्ण अंगों में रक्त संचार कम हो जाता है। इसमें पेशाब भी कम आता है।

प्लाज्मा लीक भी जानलेवा-
डेंगू में मरीज की प्लेटलेट्स की संख्या पर निगरानी से ज्यादा जरूरी हेमेटोक्रिट और ब्लडप्रेशर की निगरानी है। प्लाज्मा लीक होना जानलेवा हो सकता है। हेमेटोक्रिट रक्त में लाल रक्त कोशिकाओं की मात्रा का प्रतिशत है। पुरुषों के लिए यह 45% और महिलाओं के लिए 40% होता है। हेमेटोक्रिट बढ़ना यह बताता है कि कैपिलरी से खून में मौजूद प्लाज्मा का रिसाव होने लगा है। कैपिलरी वे रक्तवाहिनियां होती हैं, जिनकी दीवार डेंगू में अधिक छिद्रदार हो जाती है। इस कारण खून का द्रव (प्लाज्मा) रिसकर शरीर में ही आसपास जमा होने लगता है।

प्लेटलेट्स बढ़ाना काफी नहीं- 
डेंगू के इलाज का मतलब केवल प्लेटलेट्स बढ़ाना नहीं है। जान तभी बचेगी जब मरीज का रक्तवाहिनियों में लीक ठीक होगा। मच्छर के काटे जाने के तीन से पांच दिनों बाद डेंगू बुखार के लक्षण दिखने लगते हैं। मरीज को तरल पदार्थ जरूर देते रहें।

एम्स में डेंगू से मृत्युदर 10 फीसदी- 
प्रोफेसर आशुतोष बिश्वास के मुताबिक, 10 साल के आंकड़ों के अध्ययन से पता चला है कि एम्स में डेंगू से मृत्युदर सात से 10 फीसदी है। राष्ट्रीय स्तर पर यह आंकड़ा दो फीसदी से भी कम है। उन्होंने कहा, कई मामलों में शॉक सिंड्रोम के मरीजों को अस्पताल तब लाया जाता है जब उनकी हालत बेहद नाजुक हो चुकी होती है। यहां दूसरे अस्पतालों से रेफर गंभीर मरीज भी आते हैं।

ये हैं लक्षण-
डेंगू के लक्षणों में तेज बुखार के साथ पेट दर्द, उल्टी आना, भूख नहीं लगना, पेशाब कम होना आदि शामिल हैं। इसके अलावा शरीर के किसी हिस्से में रक्तस्राव, शरीर पर लाल रेशेज और मरीज का शॉक में जाना गंभीर लक्षण होते हैं।

 दिल्ली में डेंगू के मामले-
 वर्ष-2015- मामले- 15867
वर्ष-2016 मामले- 4431  
वर्ष-2017 - मामले-4726 
वर्ष-2018 -मामले-2798 
वर्ष-2019 (सितंबर 14 तक ) 171

 

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