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12 अगस्त, 2020|2:26|IST

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Covid-19:कोरोना से लड़ने में एक-तिहाई आबादी सक्षम, शोध में हुआ दावा

corona patient

कोरोना संक्रमण के लगातार बढ़ते खतरे के बीच राहत की एक नई खबर सामने आई है। स्वीडन स्थित कैरोलिंस्का इंस्टीट्यूट के शोधकर्ताओं ने अपने हालिया अध्ययन के आधार पर दावा किया है कि एक-तिहाई आबादी में सार्स-कोव-2 वायरस के खिलाफ प्रतिरोधक क्षमता विकसित हो गई है। यह आंकड़ा पूर्व में अनुमानित संख्या से लगभग दोगुना है।

'टी कोशिकाओं' का कमाल-
-अध्ययन के दौरान शोधकर्ताओं ने स्वस्थ रक्तदाताओं के खून के नमूनों का विश्लेषण कर यह जांचने की कोशिश की कि मानव शरीर कोविड-19 से कैसे लड़ता है। उन्होंने प्रतिभागियों के शरीर में कोरोना रोधी एंटीबॉडी के साथ ही 'टी कोशिकाओं' का स्तर आंका। 'टी कोशिकाएं' एक किस्म की श्वेत रक्त कोशिकाएं हैं, जो प्रतिरोधक तंत्र को विषाणुओं से लड़ने की क्षमता प्रदान करती हैं। 

वायरस पर वार में अहम भूमिका-
शोधकर्ताओं ने पाया कि पूर्वानुमान से दोगुनी आबादी में कोरोना से लोहा लेने की ताकत पैदा हो गई है। यानी 30 फीसदी से ज्यादा लोग सार्स-कोव-2 वायरस को मात देने में सक्षम बन गए हैं। हालांकि, यह प्रतिरक्षा सिर्फ एंटीबॉडी की देन नहीं है। 'टी कोशिकाएं' वायरस के वार से बचाने में ज्यादा अहम भूमिका निभा रही हैं। एंटीबॉडी के मुकाबले ‘टी-कोशिका’ रूपी सुरक्षा कवच दोगुना लोगों में विकसित हो गया है।


असर की अवधि आंकने की कवायद जारी-
-मुख्य शोधकर्ता मार्कस बगर्ट के मुताबिक 'टी कोशिकाएं' कोरोना के खिलाफ कितनी लंबी प्रतिरक्षा क्षमता मुहैया कराती हैं, इसे आंकने की कवायद जारी है। हालांकि, एंटीबॉडी की बात करें तो इनकी मदद से वायरस के हमले से महज तीन से छह हफ्ते तक ही बचा जा सकता है।

लंदन में प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने के लिए जिम्मेदार-
-बगर्ट ने ब्रिटेन में हुई एंटीबॉडी जांच का हवाला दिया। उन्होंने बताया कि देशभर में सात प्रतिशत लोगों में कोरोना से लड़ने वाले एंटीबॉडी बने हैं। लंदन की बात करें तो यह आंकड़ा 17 फीसदी के करीब है। राष्ट्रीय औसत से इतने बड़े अंतर के लिए 'टी कोशिकाओं' को जिम्मेदार ठहराया जा रहा है।

क्या होता है फायदा
-शोधकर्ताओं ने दावा किया कि 'टी कोशिकाएं' बनने पर व्यक्ति अगर सार्स-कोव-2 वायरस के संपर्क में आता है तो उस पर या तो कोई असर नहीं होगा या फिर मामूली लक्षण ही उभरेंगे।

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  • Web Title:Covid-19: One third of population are able to fight with coronavirus claims recent research of sweden