Bringing us into the air gives us these five most dangerous diseases - हवा में लाकर हमें कोई देता है ये पांच सबसे खतरनाक बीमारियां DA Image
20 नबम्बर, 2019|9:18|IST

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हवा में लाकर हमें कोई देता है ये पांच सबसे खतरनाक बीमारियां

महामारी विज्ञान में, एक रोग वेक्टर वह एजेंट होता है, जो एक संक्रामक रोगजनक़ को दूसरे जीव में ले जाता है और स्थानांतरित करता है। वेक्टर-जनित रोग परजीवी, वायरस और बैक्टीरिया के कारण होने वाली मानव बीमारियां हैं जो मच्छरों, मक्खियों, घुन, घोंघे और जूं के इंसान से संपर्क के बाद फैलती हैं।

मच्छर, चमगादड़, पिस्सू ये सभी डेंगू, मलेरिया, चिकनगुनिया, निपाह वायरस संक्रमण, जापानी एनसेफेलाइटिस, स्क्रब टाइफस, लेप्टोपायरोसिस, लाइम बीमारी और कांगो बुखार जैसी बीमारियों को इंसान तक पहुंचाने वाले संवाहक (वेक्टर) हैं। वेक्टर के रूप में माने जाने वाले अधिकांश एजेंट जीव हैं, जैसे परजीवी या रोगाणु, लेकिन यह धूल के कणों जैसे संक्रमण का एक निर्जीव माध्यम भी हो सकता है।

दुनियाभर में 17 प्रतिशत संक्रामक बीमारियां वेक्टर्स (संवाहक) द्वारा फैलाई जाती है, जो संक्रमित सूक्ष्मजीवों से इंसानों तक बीमारियों को पहुंचाने का काम करते हैं। हर साल संवाहकों के जरिये होने वाली बीमारियां (वेक्टर बॉर्न डिसीज) से तकरीबन सात लाख लोगों की मौत होती है। हालांकि, भारत में यह बीमारियां स्थानीय (जैसे मलेरिया, स्क्रब टाइफस) हो चुकी हैं, कुछ वेक्टर बोर्न डिसीज नई हैं। एक नजर संवाहकों (वेक्टर्स) के जरिये देश में होने वाली पांच सबसे खतरनाक बीमारियों पर-

निपाह वायरस इन्फेक्शन

निपाह वायरस एक पशुजन्य वायरस है। यह सुअर या चमगादड़ों के जरिये इंसान तक पहुंचता है। 2001 में भारत में जब इस बीमारी ने पैर फैलाए थे तो चिकित्सकों ने पाया था कि यह बीमारी एक संक्रमित व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति तक भी फैल सकती है। वास्तविकता में संक्रमित होने वाले लोगों में अधिकांश वही लोग पाए गए जो संक्रमित व्यक्ति वाले अस्पताल के कर्मचारी थे या फिर उससे मिलने आने वाले। भारत और बांग्लादेश में निपाह वायरस, खजूर और खजूर के उत्पादों के जरिये फैला था। यह सभी फल खाने वाले चमगादड़ों के पेशाब या लार से संक्रमित थे। यह संक्रमित व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति को हो सकती है।

निपाह इंफेक्शन की शुरूआत फ्लू जैसे लक्षणों से होती है। संक्रमित होने के पांच से 14 दिन के भीतर बुखार, सिरदर्द, मांसपेशियों में दर्द, उबकाई और उल्टी जैसे लक्षण देखने को मिलते हैं। इन्फेक्शन बढ़ने के साथ-साथ श्वसन संबंधी दिक्कत और एन्सेफेलाइटिस (दिमाग के एक या अधिक हिस्से में सूजन) की नौबत आ जाती है। पिछले साल मई में केरल में निपाह वायरस के 19 मामले पाए गए थे, जिनमें से 18 मरीजों की मौत हो गई थी। इस साल जून में इस वायरस ने फिर सिर उठाया था। इस बार राज्य का बड़ा हिस्सा इसकी चपेट में आया था, लेकिन बेहतर स्वास्थ्य सुविधाओं के चलते एक भी व्यक्ति को जान नहीं गंवानी पड़ी।

जापानी एन्सेफलाइटिस

जापानी एन्सेफलाइटिस (जेई) एक वायरल बीमारी है जो इंसानों और पशुओं दोनों को ही एक तरह से प्रभावित करती है। यह मच्छरों, सुअरों और पानी के कीट पतंगों के जरिये फैलती है। एशिया और प्रशांत महासागर के पश्चिम की ओर जेई ही एन्सेफलाइटिस के प्रसार का मुख्य कारण है। यह इन्फेक्शन तीन से छह वर्ष की उम्र के बच्चों में आम होता है। भारत में हर साल 1500 से 4000 लोग इसकी चपेट में आते हैं। इसी साल बिहार के मुजफ्फरपुर में 150 से ज्यादा शिशुओं की जेई के कारण ही मौत हो गई थी। उन्हें यह संक्रमण दूषित लीची खाने से हुआ था।

दिमाग में सूजन होकर दिमाग का कामकाज प्रभावित होने तक एक फीसदी से भी कम मरीज में ही इसके लक्षण दिखते हैं। इसके प्रमुख लक्षणों में बुखार (100 डिग्री फैरेनहाइट से अधिक), सिरदर्द, ऊर्जा खत्म होना, दस्त लगना, मांसपेशियों में भीषण दर्द शामिल है। एक सामान्य बीमारी जिसे टीकाकरण से रोक जा सकता है। कुछ मरीजों को ऐंठन, चलने-फिरने में दिक्कत और मांसपेशियों में असामान्य जकड़न महसूस हो सकती है।

जीका वायरस

केंद्रीय स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय के मुताबिक भारत में जीका वायरस का पहला मामला 21 सितंबर 2018 को दर्ज किया गया था। जयपुर (राजस्थान) की एक 78 वर्षीय महिला इसके लिए पॉजिटिव पाई गई थी।इसके बाद राज्य सरकार और केंद्रीय स्वास्थ्य अधिकारियों ने जांच के लिए विशाल कार्यक्रम चलाया था। 2 नवंबर 2018 को 157 लोग जीका वायरस पॉजिटिव पाए गए थे, इनमें से 63 गर्भवती महिलाएं थीं।

डेंगू, चिकनगुनिया और पीले ज्वर (येलो फीवर) के लिए जिम्मेदार मच्छर, एडिस एजिप्टि, ही जीका वायरस के प्रसार के लिए भी जिम्मेदार होता है। यह आमतौर पर दिन में काटता है। सामान्य मामलों में यह जानलेवा नहीं होता, लेकिन गर्भवती महिलाओं में जीका वायरस की मौजूदगी, गर्भ में ही शिशु के विकास को बुरी तरह से प्रभावित कर देती है।

डेंगू

डेंगू का वायरस एडिस एजिप्टि मच्छर की मादा से फैलता है। यह मादा किसी संक्रमित व्यक्ति को काटने के बाद जब किसी स्वस्थ व्यक्ति को काटती है तो वायरस फैल जाता है। मच्छर को खुद को यह वायरस संक्रमित व्यक्ति के खून के जरिये मिलता है। इस बीमारी की वजह बनने वाले चार वायरस होते हैं। एक बार व्यक्ति डेंगू के किसी भी तरह के वायरस से संक्रमित हो जाए तो वह उस विशेष किस्म के वायरस का प्रतिरोधी बन जाता है-साथ ही वह लगभग दो वर्ष के लिए डेंगू के सभी वायरसों से सुरक्षित हो जाता है। महामारी के दौरान, डेंगू का कोई भी या सभी वायरस सक्रिय हो सकते हैं।

डेंगू के लक्षणों में एकाएक बहुत ज्यादा तेज बुखार, भीषण सिरदर्द, जी मिचलाना, आंखों के पीछे दर्द, जोड़ों में दर्द, बहुत ज्यादा थकान, शरीर में दर्द, भूख मर जाना, त्वचा पर चकत्ते शामिल हैं। बुखार और अन्य लक्षण जहां एकाध हफ्ते रहते हैं, कमजोरी और भूख खत्म हो जाने के लक्षण कई हफ्तों तक बने रहते हैं। फिलहाल डेंगू बुखार का कोई तय उपचार उपलब्ध नहीं है। बुखार कम करने या फ्ल्यूड्स की कमी को दूर करने के लिए दवाएं दी जाती हैं।

मलेरिया

मादा एनोफिलिस मच्छर, प्लाज्मोडियम  नामक परजीवी की संवाहक होती है। यही मलेरिया की वजह होता है। विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) के आंकड़ों के मुताबिक वर्ष 2017 में दुनियाभर में 21.9 करोड़ लोग मलेरिया की चपेट में आए थे और इनमें 4 लाख 35 हजार लोगों की मौत हो गई थी।

प्रोटोजोआ का एक प्रकार प्लाज्मोडियम चार प्रकार का होता है- प्लाज्मोडियम फेल्सिपेरम हर साल मलेरिया से होने वाली लगभग 90 प्रतिशत मौतों के लिए जिम्मेदार होता है। मलेरिया अब भारत में घर कर चुका है। देश का 2030 तक मलेरिया मुक्त होने का प्रयास जारी है। फिलहाल दुनिया में होने वाले मलेरिया का 4 प्रतिशत भार भारत पर है। दक्षिण पूर्व एशिया के मलेरिया के 87 प्रतिशत मामले भारत में ही देखने को मिलते हैं।

नेशनल वेक्टर बोर्न डिसीज कंट्रोल प्रोग्राम (एनवीबीडीसीपी) के आंकड़ों के मुताबिक वर्ष 2018 में भारत में मलेरिया के 4,29,928 मामले देखने में आए, जिनमें से 96 लोगों की मौत हुई।

अधिक जानकारी के लिए देखें: 

https://www.myupchar.com/disease/dengue-fever

स्वास्थ्य आलेख www.myUpchar.com द्वारा लिखे गए हैं।

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