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20 अप्रैल, 2021|8:51|IST

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इस मेंटल डिसऑर्डर का आलिया भट्ट भी बन चुकी हैं शिकार, जानें कैसे करें इससे बचाव

alia bhatt


क्या आपको हमेशा लगता है कि कुछ बुरा होने वाला है? या आपके मन में अजीबों-गरीब बातें चलती रहती है जिसकी वजह से आप हमेशा दिमाग पर बोझ महसूस करते हैं? 
हममें से ज्यादातर लोगों के मन में कभी न कभी ऐसी बातें चल रही होती हैं। जीवन की कुछ स्थितियां ऐसी होती हैं, जब मजबूत दिल वाला इंसान भी चिंतित और भयभीत हो जाता है। मुश्किल हालात में थोड़ी देर के लिए ऐसा होना स्वाभाविक है, लेकिन जब किसी व्यक्ति को हमेशा चिंता या डर में जीने की आदत पड जाए तो आगे चलकर यही मनोदशा एंग्जायटी डिसॉर्डर जैसी गंभीर समस्या में बदल सकती है। जब ऐसी नकारात्मक भावनाओं पर व्यक्ति का कोई नियंत्रण न हो और तमाम कोशिशों के बावजूद छह महीने से ज्यादा लंबे समय तक इसके लक्षण दिखाई दें तो यह समस्या एंग्जायटी डिसॉर्डर हो सकती है।  

आज के दौर में यह समस्या काफी बढ़ गई है।  बल्कि कई बॉलीवुड सेलिब्रिटीज भी इसके शिकार हो चुके हैं।  बॉलीवुड आलिया भट्ट, दीपिका पादुकोण भी इस बीमारी के अनुभव शेयर कर चुकी हैं। विशेषज्ञों की मानें, तो हर साल करीब 70 हजार बच्चों को एंग्जाइटी से संबंधित दवाइयों की ओवर डोज लेने के कारण हॉस्पिटल्स के इमरजेंसी वार्ड में भर्ती करना पड़ता है। यह स्थिति उनके लिए आनेवाले जीवन में जल्द मृत्यु के खतरे को कई गुना बढ़ा देती है। आमतौर पर ऐंग्जाइटी होने पर बच्चों को ट्रीटमेंट के दौरान अन्य दवाओं के साथ ही बेंज़ोडायजेपाइन भी दी जाती है। लेकिन अगल-अलग परिस्थितियों में इसकी ओवरडोज बच्चों के स्वस्थ भविष्य को लेकर खतरा पैदा कर रही है।

 

इससे बचाव के लिए इन सावधानियों पर दें ध्यान 
-नियमित दिनचर्या अपनाएं क्योंकि नींद की कमी से मस्तिष्क पूरी क्षमता के साथ काम नहीं कर पाता। अनिद्रा से एंग्जायटी और डिप्रेशन का खतरा बढ जाता है।
-शरीर की तरह मस्तिष्क को भी पौष्टिक आहार की जरूरत होती है। इसलिए अपने भोजन में फलों और हरी सब्जियों को प्रमुखता से शामिल करना चाहिए।
-नियमित एक्सरसाइज और योगाभ्यास करें। इस समस्या से बचने के लिए ध्यान भी फायदेमंद होता है। इससे सेरिब्रल कोरटेक्स को मजबूती मिलती है, मस्तिष्क का यही हिस्सा स्मरण-शक्ति, एकाग्रता और तर्क शक्ति के लिए जिम्मेदार होता है।

-अगर जीवन में कभी कोई मुश्किल आए तब भी आत्मविश्वास बनाए रखें।
-लोगों के साथ दोस्ती बढाएं और खुलकर अपनी भावनाएं शेयर करें।
-अपनी क्षमताओं का आकलन करके व्यावहारिक लक्ष्य बनाएं। कार्यो की प्राथमिकता तय करें। एक साथ कई काम करने से बचें।
-अगर कभी किसी बात को लेकर एंग्जायटी हो, तो उसका सामना करने की आदत डालें। उससे बचने की कोशिश कभी न करें, क्योंकि व्यक्ति ऐसी मनोदशा से जितना अधिक बचने की कोशिश करता है, समस्या उतनी ही तेजी से बढती जाती है।
-ऐसी समस्याओं को छोटे-छोटे टुकडों में बांट कर हल करने की कोशिश करें। एक ही दिन में इनका समाधान संभव नहीं है। इसलिए धैर्य के साथ प्रयास करें।
 

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  • Web Title:anxiety disorder in teenagers and its treatment