अब रोबोट करेंगे रीढ़ की सर्जरी, नुकसान का जोखिम हुआ कई गुना कम - ab robot karenge reedh kee sarjaree nukasaan ka jokhim hua kaee guna kam DA Image

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अब रोबोट करेंगे रीढ़ की सर्जरी, नुकसान का जोखिम हुआ कई गुना कम

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अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) में पहली बार रोबोट से रीढ़ की हड्डी (स्पाइन) की सर्जरी की गई है। अस्पताल का दावा है कि एशिया में रीढ़ की पहली बार ओ ऑर्म रोबोटिक सर्जरी की गई है। इस नई तकनीक से रीढ़ की हड्डी की सर्जरी में नुकसान का जोखिम कई गुना तक कम हो जाएगा।

बुधवार को एम्स के हड्डी रोग विभाग के डॉक्टरों ने पश्चिम बंगाल की एक महिला का ऑपरेशन किया। 60 वर्षीय मौसमी बसु पिछले चार वर्ष से कमर दर्द से परेशान थीं। उनकी रीढ़ की हड्डी खिसक गई थी। उसकी वटिब्रा एल-5 में हड्डी खिसकने से ये दर्द हो रहा था। रीढ़ वर्टिब्रा से मिलकर बनती है। डॉक्टरों ने बताया कि ई-मेल के जरिए मरीज के पति ने एम्स के डॉक्टरों से संपर्क किया था। तीन घंटे में हुई रोबोट सर्जरी के बाद एम्स के प्राइवेट वार्ड में भर्ती महिला अब बिस्तर से उठकर चल-फिर भी पा रही हैं।

जोखिम कम होगा- 
चिकित्सकों के अनुसार, इस तरह की सर्जरी का सबसे बड़ा फायदा यह है कि छोटा चीरा लगाने के साथ साथ रीढ़ की हड्डी में लगाए जाने वाले स्क्रू व अन्य इम्प्लांट को बहुत ही कम समय में बड़ी आसानी के साथ किया जा सकता है। एम्स के वरिष्ठ डॉ. भावुक गर्ग के मुताबिक रीढ़ की हड्डी की सर्जरी में थोड़ी सी भी गलती मरीज को जिंदगी भर के लिए अपाहिज बना सकती है। ऐसे में सटीक सर्जरी के लिए यह रोबोट काफी उपयोगी साबित होगा।

360 डिग्री पर एक्सरे की सुविधा-
एम्स के ऑर्थोपेडिक विभाग में पांच करोड़ की लागत से विकसित किए गए मॉड्यूलर ऑपरेशन थिएटर (ओटी) में यह सर्जरी की गई। इसमें सीटी स्कैन, ओ-आर्म मशीन लगी है। ओ-आर्म मशीन का फायदा यह है कि सर्जरी के वक्त जरूरत पड़ने पर 360 डिग्री पर भी एक्सरे किया जा सकता है।

15 दिन पहले ही अमेरिका से एम्स पहुंचा- 
दुनिया में अभी तक केवल 80 अस्पतालों में मौजूद ये रोबोट अत्याधुनिक तकनीकों से लैस हैं। 15 दिन पहले ही रोबोट अमेरिका से दिल्ली एम्स पहुंचा है। डॉ. भावुक ने बताया कि अभी तक कई तरह के रोबोट दुनियाभर में प्रचलित हैं, लेकिन स्पाइन सर्जरी करने वाला ये रोबोट नई तकनीकों से लैस है। इसे एक्सेलस्यिस रोबोट कहा जाता है। एशिया में अभी तक किसी भी अस्पताल में ये तकनीक उपलब्ध नहीं है। दिल्ली एम्स में यह रोबोट आने के बाद पहली ओ आर्म रोबोटिक सर्जरी 60 वर्षीय मौसमी बसु की हुई है।


 

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