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10 अप्रैल, 2021|5:40|IST

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कोर्ट में टिक पाएगा खट्टर सरकार का नया कानून? प्राइवेट नौकरी में 75% सीटें हरियाणा के लोगों के लिए किया है रिजर्व

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राज्य में प्राइवेट सेक्टर की एक तय वेतनमान तक की 75% नौकरियों को स्थानीय लोगों के लिए आरक्षित करने के हरियाणा सरकार के नए कानून को लेकर विवाद खड़ा हो गया है। आपको बता दें कि खट्टर सरकार का यह फैसला विधानसभा चुनाव में राज्य के लोगों से किए गए चुनावी वादे का हिस्सा है।

हरियाणा राज्य रोजगार अधिनियम, 2021 स्थानीय लोगों के लिए प्राइवेट नौकरी में आरक्षण का प्रावधान करता है। नए कानून के तहत, प्रत्येक कंपनी को 50 हजार से कम वेतन वाली नौकरी के लिए 75 प्रतिशत सीटें स्थानीय लोगों के लिए आरक्षित रखनी है। अब यह कानून सुप्रीम कोर्ट और पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट के समक्ष अपनी संवैधानिकता को चुनौती दिए जाने पर गंभीर कानूनी चुनौतियों का सामना करने के लिए तैयार है।

आइए हरियाणा सरकार के इस नए नियम के कानूनी पहलुओं को जानतें हैं:

>> संविधान में ऐसे कौन से प्रावधान हैं जो आरक्षण / कोटा को सक्षम बनाते हैं?

भारतीय संविधान में भाग III में नागरिकों के लिए मौलिक अधिकारों को दर्शाया गया है। संविधान का अनुच्छेद 14 कानून के समक्ष समानता और सभी व्यक्तियों को कानून के समान संरक्षण की गारंटी देता है। इसी तरह, अनुच्छेद 15 (1) और 15 (2) भी धर्म, नस्ल, जाति, लिंग, जन्म स्थान या उनमें से किसी पर भी किसी भी नागरिक को भेदभाव करने से रोकते हैं।

>> क्या कोर्ट सरकार को SC / ST या पिछड़े वर्गों को आरक्षण प्रदान करने का निर्देश दे सकता है?

नहीं, कोर्ट सरकार को नागरिकों के किसी भी वर्ग को आरक्षण देने के लिए निर्देश जारी नहीं कर सकता है। 1963 से ही कई सरकार ने इस बात पर जोर दिया है कि अनुच्छेद 15 (4) और 16 (4) प्रावधानों को सक्षम कर रहे हैं। ऐसे में SC/ST, OBC या नागरिकों के किसी भी अन्य समूह को आरक्षण देने के लिए कोर्ट कोई निर्देश जारी नहीं कर सकता है।.

>> क्या आवासीय के आधार पर आरक्षण के लिए कानून बनाया जा सकता है?

हां, लेकिन केवल संसद द्वारा। संविधान में अनुच्छेद 16 (3) संसद को राज्य या केंद्र शासित प्रदेश के तहत स्थानीय या किसी अन्य प्राधिकरण के साथ सार्वजनिक रोजगार और नौकरियों में डोमिसाइल के आधार पर आरक्षण प्रदान करने का अधिकार देता है। इस शक्ति का उपयोग करते हुए, 1957 में, केंद्र सरकार ने एक राज्य या एक केंद्र शासित प्रदेश में सभी मौजूदा कानूनों को निरस्त करने के लिए सार्वजनिक रोजगार अधिनियम पारित किया। सार्वजनिक रोजगार के लिए निवास के रूप में आवश्यकताओं को निर्धारित किया।हालांकि, केंद्र ने कुछ राज्यों जैसे मणिपुर, त्रिपुरा, आंध्र प्रदेश और हिमाचल प्रदेश के कुछ क्षेत्रों में सार्वजनिक रोजगार के कुछ वर्गों के संबंध में नियम बनाने का अपना अधिकार सुरक्षित रखा।

>> क्या राज्य सरकारों के पास डोमिसाइल आधारित आरक्षण के लिए कानून/नीतियां बनाने की कोई विशेष शक्ति है?

राज्य सरकारों के पास डोमिसाइल आधारित आरक्षण पर सीधे कानून पारित करने की कोई शक्ति नहीं है। सुप्रीम कोर्ट ने कई फैसलों में इस प्रथा को कम किया है। उत्तर प्रदेश में जब ग्रामीण क्षेत्रों के अभ्यर्थियों के पक्ष में मेडिकल कॉलेजों में कुछ प्रतिशत सीटों के आरक्षण को आर्थिक विचारों पर उचित ठहराया गया, तो  सुप्रीम कोर्ट की पीठ ने जोरदार तरीके से याचिका को खारिज कर दिया।

>> कुछ राज्यों में स्थानीय लोगों के लिए नौकरियों और राज्य विधानसभाओं में सीटें कैसे आरक्षित हैं?

संविधान के अनुच्छेद 371 में पूर्वोत्तर के छह राज्यों सहित 11 राज्यों के लिए "विशेष प्रावधान" दिए गए हैं। राज्यों की विशेष परिस्थितियों को देखते हुए, अनुच्छेद 371 में विशिष्ट सुरक्षा उपायों की एक श्रृंखला शामिल है, जिन्हें इन राज्यों के लिए महत्वपूर्ण माना जाता है। 

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  • Web Title:Will the new law of the Haryana government be able to stand in court 75 percent seats in private job have been reserved for locals