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मिट्टी के नमूने लिए बिना बांटे दिए सॉयल हेल्थ कार्ड, किसानों ने बताया धोखा और धन की बर्बादी

प्रतीकात्मक तस्वीर

हरियाणा सरकार की ओर से जारी सॉयल हेल्थ कार्ड (मिट्टी की गुणवत्ता की जांच) को किसानों ने धोखा और धन की बर्बादी करार दिया है। किसानों ने आरोप लगाया है कि बहुत ही कीमती और चिकने मोटे कागज पर रंगीन कार्डों पर दी जा रही जानकारी निराधार है, क्योंकि इन कार्डों पर भूमि का नमूना एकत्र करने की तिथि तक दर्ज नहीं है। 

सरकारी प्रचार में दावा किया जा रहा है कि कृषि सहकारिता एवं किसान कल्याण विभाग की तरफ से जारी इस कार्ड से किसानों को उनकी भूमि की उर्वरकता (उपजाऊ शक्ति) का पता चलेगा, जिसका प्रयोग करके वह भूमि की पौष्टिकता बढ़ाकर खेती से अपनी आय बढ़ा पाएंगे।

खेतों से नहीं लिए गए मिट्टी के नमूने 

न्यूज एजेंसी वार्ता के अनुसार,  सीसवाल गांव के एक किसान प्रो. हरीश कुमार ने आरोप लगाया कि सॉयल हेल्थ कार्ड जारी करने से पूर्व कई खेतों से भूमि के नमूने लिए ही नहीं गए। उन्होंने कहा कि उनके खेत से भी मिट्टी का कोई भी नमूना नहीं लिया गया और जब उन्होंने अपने गांव के दूसरे किसानों से इस बारे में चर्चा की तो सभी हैरानी से एक दूसरे से पूछने लगे कि कब, कौन और किस खेत से ये नमूने लेने आया है?

कार्डों में दर्शाए गए आंकड़ों को बताया फर्जी

उन्होंने आगे बताया कि चूंकि भूमि में नाइट्रोजन, कार्बन, फास्फोरस, पोटाशियम, सल्फर, जिंक, बोरोन, आयरन, मेंगनीज और कॉपर, जिनका जिक्र सॉयल हेल्थ कार्ड में किया गया है, का विश्लेषण लैब में टेस्टिंग बगैर हो ही नहीं सकता और भूमि के नमूने लिए ही नहीं गए, इसलिए निसंकोच कहा जा सकता है कि कार्डों में दर्शाए गए आंकड़े फर्जी हैं और इस जांच कार्ड से कोई लाभ नहीं होगा अपितु हानि की आशंका है।

उन्होंने दावा किया है कि वह हरियाणा कृषि विश्वविद्यालय हिसार से अपने खेत की भूमि टेस्ट करवाते रहते हैं और इन नतीजों तथा सॉयल हेल्थ कार्ड में प्रदान किए जा रहे नतीजों में कोई मेल नहीं है।

किसान से लिए जा रहे 20 रुपए 

उन्होंने कहा कि ऐसा लगता यह है कि पटवारियों से खेतों की जानकारी प्राप्त कर घर बैठे ही ये कार्ड तैयार किए गए हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि पूरे गांव में हर एक खेत के एकड़वार कार्ड बोरों में भरकर पंचायत घरों में भेजे जा रहे हैं और इन नतीजों के लिए कार्डों के एवज में हर एक किसान से 20 रुपए भी लिए जा रहे हैं। इस प्रकार सॉयल हेल्थ कार्ड की पूरी प्रक्रिया को किसानों के साथ किए जा रहे धोखे की संज्ञा दी जा सकती है। यह किसानों धन की बर्बादी भी है और इससे किसानों को कोई लाभ नहीं होने वाला।

उन्होंने मांग की है कि कृषि सहकारिता और किसान कल्याण विभाग सॉयल हेल्थ कार्ड के नाम पर की जा रही धन की बर्बादी तथा किसानों से खिलवाड़ की पूरी संजीदगी से जांच करवाए और दोषियों को सजा दे।

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  • Web Title:Soil Health Cards is Cheating with the farmers and waste of money says Farmers