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Hindi News हरियाणासरकारी नौकरियों में सामाजिक-आर्थिक आरक्षण रद्द, सुप्रीम कोर्ट पहुंची सरकार; क्या है मामला

सरकारी नौकरियों में सामाजिक-आर्थिक आरक्षण रद्द, सुप्रीम कोर्ट पहुंची सरकार; क्या है मामला

कोर्ट ने कहा कि SC ने कानून को अच्छी तरह से समझा रखा है कि निवास के आधार पर वेटेज देने की अनुमति नहीं दी सकती। इस मामले में संविधान में निहित समानता के अधिकार का उल्लंघन किया गया है।

सरकारी नौकरियों में सामाजिक-आर्थिक आरक्षण रद्द, सुप्रीम कोर्ट पहुंची सरकार; क्या है मामला
supreme court
Amit Kumarलाइव हिन्दुस्तान,चंडीगढ़Tue, 18 Jun 2024 11:00 PM
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हरियाणा में सरकारी नौकरियों में आर्थिक और सामाजिक आरक्षण के तहत दिया जाने वाले आरक्षण को पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट के रद्द करने के बाद अब हरियाणा सरकार सुप्रीम कोर्ट पहुंच गई है। हरियाणा कर्मचारी चयन आयोग (एच.एस.एस.सी) ने हाईकोर्ट की खंडपीठ के फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती देते हुए इसे गलत बताया है। आयोग की अपील पर फिलहाल सुनवाई नहीं हुई है। सुप्रीम कोर्ट में दायर अपील में कहा गया है कि हाईकोर्ट की खंडपीठ ने आर्थिक-सामाजिक आरक्षण को पहले सही ठहराया था। जब इस निर्णय को चुनौती दी गई तो फिर से अन्य खंडपीठ ने सुनवाई शुरू की और इसे असंवैधानिक करार दे दिया। नियमों के तहत पहली खंडपीठ के फैसले को चुनौती देने वाली अपील को बड़ी पीठ को सुनना चाहिए था, जबकि सुनवाई खंडपीठ ने ही की। 

हाईकोर्ट ने कहा था- नियम राजनीतिक एजैंडे पर आधारित नहीं हो सकते 

हाईकोर्ट ने सामाजिक-आर्थिक आरक्षण को असंवैधानिक करार देते हुए कहा था कि नियम राजनीतिक एजैंडे पर आधारित नहीं हो सकते। इस आरक्षण के तहत ग्रुप सी और डी की भर्ती में उन आवेदकों को 5 अतिरिक्त नंबर दिए जाते थे जो आर्थिक रूप से कमजोर हैं और परिवार में कोई सरकारी नौकरी में नहीं है। जस्टिस संजीव प्रकाश शर्मा और जस्टिस सुदीप्ति शर्मा की खंडपीठ ने कहा था कि राज्य की दलीलों से पता चलता है कि वे संविधान के लोकाचार को समझने में विफल रहे हैं। एक बार अनुच्छेद 15 और 16 के सिद्धांतों के तहत प्रावधान निर्धारित कर दिए जाते हैं तो इसे पूरे भारत में लागू कर दिया जाता है। राज्य सरकार को सार्वजनिक रोजगार में विशेष आरक्षण लागू करने की अनुमति नहीं दी जा सकती क्योंकि इसमें सभी लोग भाग लेने के हकदार हैं। 

रोजगार को नहीं कर सकते प्रतिबंधित
 
खंडपीठ ने कहा था कि कोई भी राज्य अंकों में पांच प्रतिशत का लाभ देकर अपने ही निवासियों के लिए रोजगार को प्रतिबंधित नहीं कर सकता। खंडपीठ ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट ने कानून को अच्छी तरह से समझा रखा है कि निवास के आधार पर वेटेज देने की अनुमति नहीं दी सकती। इस मामले में संविधान में निहित समानता के अधिकार का उल्लंघन किया गया है और पारिवारिक पृष्ठभूमि के आधार पर एक विशेष वर्ग बना लिया गया था। जिन उम्मीदवारों के माता-पिता सरकारी नौकरी में हैं, उन्हें पांच प्रतिशत से वंचित कर दिया गया और जिन उम्मीदवारों के अभिभावक दुकानदार या प्राइवेट नौकरी वाले हैं, उन्हें लाभ दिया गया।

ग्रुप सी और डी और टीजीटी भर्ती पर पड़ेगा असर 

हाईकोर्ट ने 31 मई को सरकारी नौकरियों में सामाजिक-आर्थिक आधार पर दिए जाने वाले आरक्षण को असंवैधानिक घोषित कर दिया था। हाईकोर्ट के इस फैसले से ग्रुप सी और डी के अलावा टीजीटी भर्ती पर असर पड़ेगा। इन भर्तियों में अब 5 नंबर का फायदा नहीं मिलेगा। वहीं इन नंबरों के आधार पर जिन भर्तियों में नियुक्ति मिल चुकी है, उन पर भी दोबारा परीक्षा हो सकती है।

रिपोर्ट: मोनी देवी