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प्रिंस हत्याकांड : अशोक को सहानुभूति तो मिली पर नौकरी नहीं

बस कंडक्टर अशोक

प्रिंस हत्याकांड में गुरुग्राम पुलिस द्वारा मुख्य आरोपी बनाए बस कंडक्टर अशोक की जिदंगी अभी पटरी पर नहीं आ पाई है। शुक्रवार को 'हिन्दुस्तान' की टीम घामडौज गांव का दौरा किया और अशोक की जिंदगी का हालचाल जाना। अशोक ने कहा कि हत्याकांड में बरी होने के बाद सहानुभूति तो मिली पर नौकरी नहीं मिली।  

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महीनों बाद भी अशोक का स्वास्थ्य खराब है। वह मजदूरी करने में सक्षम नहीं है। अशोक ने बताया कि उसकी छाती में अभी भी दर्द होता है, उसके हाथ ऊपर की तरफ सही से नहीं उठ पाते हैं। पूरी तरह ठीक होने में कुछ महीने और लगेंगे। अशोक ने यह पूछने पर कुछ भी कहने से मना कर दिया कि वह पिछले एक साल को कैसे देखता है? वह खुद को फंसाने के लिए किसे जिम्मेदार मानता है? तो उसने हाथ जोड़ लिए, कहा मैं कुछ नहीं बोलूंगा। उसके पास कंडक्टर का लाइसेंस नहीं है, इसके चलते उसे नौकरी नहीं मिल पा रही है। 

परिवार के लिए रुपये कमाने की जिम्मेदारी पत्नी ममता उठा रही है। पिता हरकेश के साथ एक वह एक निजी स्कूल में चपरासी के पद पर कार्यरत है।

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  • Web Title:Prince Murder Case : Ashoka got sympathy but not a job