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Hindi News हरियाणागृह जिले वाले संसदीय क्षेत्र में कैसे मिली तैनाती? चुनाव आयोग ने हटा दिया डिप्टी कलेक्टर

गृह जिले वाले संसदीय क्षेत्र में कैसे मिली तैनाती? चुनाव आयोग ने हटा दिया डिप्टी कलेक्टर

चुनाव आयोग के निर्देश पर हरियाणा सरकार ने उपायुक्त सुशील सारवान को हटा दिया है। गुरुवार को हरियाणा के राज्यपाल बंडारू दत्तात्रेय की मंजूरी के बाद मुख्य सचिव प्रसाद की ओर से आदेश जारी किए गए।

गृह जिले वाले संसदीय क्षेत्र में कैसे मिली तैनाती? चुनाव आयोग ने हटा दिया डिप्टी कलेक्टर
Amit Kumarलाइव हिन्दुस्तान,पंचकूलाThu, 11 Apr 2024 10:07 PM
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पंचकूला के उपायुक्त (डिप्टी कलेक्टर) सुशील सारवान को पद से हटा दिया गया है। उनके ​​खिलाफ गृह जिले वाले संसदीय क्षेत्र में तैनाती को लेकर चुनाव आयोग को ​शिकायत दी गई थी। चुनाव आयोग के निर्देश पर हरियाणा सरकार ने उपायुक्त सुशील सारवान को हटा दिया है। वीरवार को हरियाणा के राज्यपाल बंडारू दत्तात्रेय की मंजूरी के बाद मुख्य सचिव टी.वी.एस.एन. प्रसाद की ओर से आदेश जारी किए गए। पंचकूला में नए उपायुक्त की नियुक्ति के लिए जल्द ही सरकार की ओर से चुनाव आयोग को अफसरों के नामों का पैनल भेजा जाएगा। आयोग से मंजूरी मिलते ही नए डी.सी. की तैनाती होगी। वहीं सारवान की नियुक्ति के आदेश भी जल्द जारी किए जाएंगे। 

सारवान का गृह जिला अम्बाला, इसी संसदीय क्षेत्र के पंचकूला जिले में ​थे तैनात 

दरअसल चुनाव आयोग के पास सारवान की गृह जिले वाले संसदीय क्षेत्र में तैनात होने की शिकायत की गई थी। सारवान का गृह जिला अम्बाला है और वह अम्बाला संसदीय क्षेत्र के पंचकूला जिले में उपायुक्त के पद पर तैनात है। चुनावी प्रक्रिया में उपायुक्त के पास जिला रिटर्निंग ऑफिसर की पावर होती है। सारवान का परिवार राजनैतिक तौर से भी जुड़ा हुआ है। सारवान की मां पूर्व में अम्बाला के बराड़ा विधानसभा क्षेत्र से भाजपा की विधायक रही हैं। शिकायत में कहा गया है कि उक्त बिंदुओं के तहत नियमानुसार उनका तबादला होना चाहिए। ऐसी ही शिकायत पर गत दिनों सिरसा की सांसद सुनीता दुग्गल के आई.पी.एस. पति राजेश दुग्गल का तबादला गुरुग्राम से पुलिस मुख्यालय में किया गया था। पंचकूला के उपायुक्त सुशील सारवान के मामले में सरकार ने चुनाव आयोग से स्पष्ट निर्देश मांगा था। चुनाव आयोग से आदेश आते ही सरकार को हटा दिया गया।

18 एच.सी.एस. की चुनावी ड्यूटी पर विवाद, आयोग को दी शिकायत 

हरियाणा के 10 लोकसभा सीटों के संबंध में लोक प्रतिनिधित्व कानून, 1951 की धारा 22 (1) के अंतर्गत भारतीय चुनाव आयोग द्वारा बीते फरवरी माह में प्रकाशित एक गजट नोटिफिकेशन मार्फत कुल पदांकित 90 में से 18 असिस्टैंट रिटर्निंग ऑफिसर (ए.आर.ओ.) की योग्यता पर सवाल खड़ा हो गया है। इस संबंध में पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट के एडवोकेट हेमंत कुमार ने चुनाव आयोग को शिकायत भेजी है। यह सभी ए.आर.ओ. हरियाणा सिविल सेवा (कार्यकारी शाखा) के 2020 बैच के अधिकारी हैं और वर्तमान में वह विभिन्न जिलों के उपमंडलों में बतौर उपमंडल अधिकारी (नागरिक) पद पर तैनात हैं।

हेमंत ने बताया कि कुल 21 एच.सी.एस. अधिकारी हैं जिसमें हिसार जिले के हांसी उपमंडल में मोहित कुमार, दर्शन यादव (मानेसर), हरबीर सिंह (भिवानी), ज्योति (इसराना), अमित कुमार- द्वितीय (सोनीपत), मयंक भारद्वाज (नांगल चौधरी), जय प्रकाश (रादौर), रवींद्र मलिक (बेरी), प्रतीक हुड्डा (टोहाना), पुलकित मल्होत्रा (शाहाबाद), अमित मान (बड़खल), अभय सिंह जांगड़ा (डबवाली), अमित (समालखा), अमित कुमार- तृतीय (लोहारू), अजय सिंह (जुलाना), राजेश कुमार सोनी (घरौंडा), अमन कुमार (पिहोवा), गौरव चौहान (पंचकूला), नसीब कुमार (लाडवा), गुलजार मलिक (उचाना कलां) और देवेंद्र शर्मा (बिलासपुर) हैं। इनमें से 18 अर्थात 3 उपमंडलों- मानेसर, जुलाना और नांगल चौधरी में तैनात उक्त अधिकारियों को छोड़ कर शेष सभी को इसी वर्ष फरवरी में उनके पद अर्थात उनके एस.डी.एम. तैनात होने के फलस्वरूप भारतीय चुनाव आयोग द्वारा संबंधित लोकसभा सीट के ए.आर.ओ. के तौर पर पदांकित किया गया। लेकिन इनकी सेवाएं अभी 5 वर्ष पूरी नहीं हो सकी है जोकि नियमानुसार सही नहीं है। 

रिपोर्ट: मोनी देवी