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प्रिंस के बिना एक साल : कोई दिन नहीं गुजरा जब बेटे की याद ने रुलाया न हो

प्रिंस के पिता

गुरुग्राम के एक विद्यालय में हुई एक दर्दनाक घटना में सात साल के मासूम प्रिंस को खोने के 12 महीने बाद भी परिवार के जख्म नहीं भरे हैं। पिछले साल आठ सितंबर को ही स्कूल में प्रिंस की हत्या कर दी गई थी। शुक्रवार को प्रिंस के माता-पिता से 'हिन्दुस्तान' ने जब बात की तो उन्होंने कहा कि बेटे की हर दिन याद आती है। कोई दिन ऐसा नहीं गुजरा जब बेटे की याद ने रुलाया न हो।  

प्रिंस के पिता ने बताया कि हम आज भी इस सवाल को खोज रहे हैं? कि आखिर किसी ने ऐसा जघन्य अपराध क्यों किया? आखिर सात साल के मासूम से क्या दुश्मनी रही होगी? कि उसकी बेरहमी से हत्या कर दी गई। उन पलों को सोचकर रोता हूं कि बेटे ने किस हालत में बचने और आखिरी लम्हों में बाथरूम से घिसटकर बाहर आने की कोशिश की होगी। उन्होंने कहा कि प्रिंस जब तक जिंदा था, केवल उनका बेटा था, लेकिन अब देशभर के अभिभावक उसे अपना बेटा मानने लगे हैं।  

गुरुग्राम में छात्र हत्याकांड : स्कूल, सीबीएसई और सरकार को नोटिस

सोहना का है आरोपी छात्र: सीबीआई ने बताया कि आरोपी छात्र भोलू सोहना के ही एक कालोनी का रहने वाला है। चूंकि घटना के वक्त आरोपी नाबालिग था, इसलिए सीबीआई ने उसे जुवेनाइल कोर्ट में पेश किया।अब बालिग की तरह मुकदमा चलाया जा रहा है।

बेटे को भूलना मुश्किल

प्रिंस के पिता ने कहा कि बेटा शरीरिक रूप से काफी सक्रिय था, वह बच्चों की तरह नहीं था। वह मोबाइल-टीवी से ज्यादा अपने दोस्तों बहन व मेरे साथ खेलना पसंद करता था। वह मेरे ऑफिस से आने का इंतजार करता था, जब कभी मैं थका होता था, तो वह मान जाता था, और कहता था कि आप आराम कर लो, फिर खेल लूंगा। बहन के साथ त्योहारों का तैयारी करता था। इस बार ऐसा करेंगे, वैसा करेंगे। इन सब चीजों को भूलना आसान नहीं है। हत्याकांड की जांच और दूसरे कोर्ट की तारीखों पर मैं तो घर बाहर निकला लेकिन प्रिंस की मां तो हर पल उसे याद किया। परिवार के हर सदस्य उसे याद करते हैं।

न्याय की उम्मीद

प्रिंस के पिता ने कहा कि माफ करिएगा, आपके लिए भले ही एक साल पुरानी बात हो गई, लेकिन हमें ऐसा लगता है कि बेटा अभी था और अभी हमसे दूर चला गया है। ऐसा कोई दिन नहीं गुजरता है जब दो चार बार उसकी याद नहीं आती है। विशेष मौकों पर उसकी कमी और ज्यादा खलती है। खुलकर रो भी नहीं पाता हूं क्योंकि उसकी मां को भी संभालना है। बेटी अब दूसरे स्कूल में पढ़ती है, फिर भी जब कभी उसे छोड़ने जाता हूं तो बेटे की याद आती है। उल्लेखनीय है कि पूरे देश को हिला देने वाले इस बहुचर्चित हत्याकांड में जांच अभी जारी है। सीबीआई की पूरी चार्जशीट से सच सामने आने की उम्मीद की जा रही है।

हम नहीं छोड़ पाए घर

वह बताते हैं कि हत्याकांड के बाद तय किया था कि भोंडसी के घर को छोड़ देंगे, लेकिन ऐसा नहीं कर पाए। प्रिंस की मां ने कहा बेटा है या नहीं। इस घर में उसकी यादें हैं। हम इसे छोड़कर कहीं नहीं जाएंगे? उसे डोरेमॉन कॉर्टून किरदार काफी पसंद था। अगर वह होता तो जरूर रक्षाबंधन पर बहन से डोरमॉन वाली राखी की मांग करता। बहन 12 साल की है, वह भी उसे नहीं भूल पाई। रक्षाबंधन के दिन बेटी रोती रही। उसे रोता देख हर कोई रोने लगा। बेटे के जाने के बाद हमारी जिंदगी में सूनापन है, वो कभी दूर नहीं हो सकता। दीवाली-होली के त्योहार उसके बगैर फीके रहे। इस दौरान हमलोग कोई त्योहार नहीं मना सके।

स्कूल और सीबीएसई को नोटिस 

चंडीगढ़। प्रिंस के पिता की याचिका पर पंजाब एवं हरियाणा उच्च न्यायालय ने शुक्रवार को स्कूल, सीबीएसई और हरियाणा सरकार को नोटिस जारी किया। न्यायाधीश गुरमीत सिंह संधावालिया की पीठ ने सभी पक्षों को छह सप्ताह में नोटिस का जवाब देने को कहा है। मामले में अगली सुनवाई 31 अक्तूबर को होगी। पिता की याचिका में स्कूल की मान्यता रद्द करने की मांग की गई है। 
 

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  • Web Title:One year without Prince: no single day passed when son memorise us