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पढ़े-लिखे टेक्नोफ्रेंडली बदमाशों की हो रही है बड़े गैंग में भर्ती

पढ़े-लिखों की पूछ केवल औद्योगिक सेक्टर में ही नहीं, बल्कि अंडरवर्ड में भी काफी है। अब बड़े गैंगस्टर भी किसी बदमाश को अपने गैंग में शामिल करने से पहले उसकी योग्यता के बारे में पड़ताल कर रहे हैं। खासतौर पर यह पूछा जा रहा है कि वह कितने ‘टेक्नोफ्रेंडली' हैं। यह खुलासा एसटीएफ एवं पुलिस के हत्थे चढ़े संपत नेहरा, बलराज भाटी एवं अन्य गैंगस्टरों ने किया है। इन गैंगस्टरों का मानना है कि आज के अंडरवर्ड में कोई भी अपराधी यदि टेक्नोफ्रेंडली नहीं है तो वह खुद तो फंसेगा ही, अपने साथियों को भी फंसा देगा। 

संपत नेहरा ने एसटीएफ को बताया है कि किसी भी आदमी के अंदर यदि जिगरा है तो वह गोली चलाना अपने आप सीख जाएगा। लेकिन वारदात कब और कैसे करनी है, वारदात के बाद मौके से कैसे फरार होना है, आम आदमी के बीच रह कर कैसे पुलिस एवं बाकी लोगों को धोखा देना है, यह सबकुछ कोई अनपढ़ या कम पढ़ा लिखा आदमी नहीं कर सकता। चूंकि अब सामना पुलिस से होना है और आज की पुलिस काफी तेज तर्रार है, ऐसे में उसे कोई योग्य आदमी ही धोखा दे सकता है। खासतौर पर संपत नेहरा मानता था कि आज के अंडरवर्ड में टेक्नोफ्रेंड बदमाश ही कारगर हो सकता है। 

पोस्ट ग्रेजुएट है बदमाशों की पहली पसंद : एसटीएफ के अधिकारियों के मुताबिक संदीप गाड़ौली भले ही ज्यादा पढ़ा लिखा नहीं था, लेकिन उसकी पहली पसंद टीम में पोस्ट ग्रेजुएट होते थे। इसी प्रकार जोधपुर की जेल में बंद लारेंस विश्नोई भी अंडर ग्रेजुएट को अपने गैंग में प्रवेश नहीं देता था। उसके बाद उसका शागिर्द रहा संपत नेहरा ने भी किसी अंडर ग्रेजुएट को अपने गैंग में जगह नहीं दी।

साथियों को देता था ट्रेनिंग : संपत खुद तो टेक्नोफ्रेंड है ही, वह अपने साथियों को भी समय समय पर इसकी ट्रेनिंग देता था। वह साथियों को बताता था कि किस प्रकार साइबर नेटवर्क का इस्तेमाल करते हुए खुद को बचाए रखना है। वह जानता था कि पुलिस उसे साइबर नेटवर्क के जरिए ही ढूंढ रही है। इसलिए वह हमेशा इसके काट का अपडेट तरीका भी तलाशता रहता था।

अधिकारियों के बेटे गैंगस्टर

अब तक पकड़े गए बड़े बदमाशों में ज्यादातर बदमाशों का बैकग्राउंड पुलिस का रहा है। एसटीएम के आला अधिकारियों के मुताबिक लॉरेंस बिश्नोई के पिता पंजाब पुलिस में सहायक उपनिरीक्षक थे। जबकि संपत नेहरा एवं संदीप गाड़ौली के पिता हरियाणा पुलिस में सहायक उपनिरीक्षक से सेवानिवृत हुए। इसी प्रकार बलराज भाटी भी पूर्व पुलिस कर्मी का बेटा है। एसटीएफ के अधिकारियों के मुताबिक यह सभी बदमाश बचपन में ही पिता के साथ रहकर पुलिस की कार्यप्रणाली से वाकिफ हो गए थे। हालांकि, पुलिस आयुक्त केके राव इसे महज इत्तफाक मानते हैं। उन्होंने बताया कि कोई भी पुलिस वाला अपने बच्चों को बदमाश बनते नहीं देखना चाहता।

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  • Web Title:Educated and Technofriendly criminals is getting recruited in big gangs