18 साल की उम्र में शुरू किया समुद्र का सफर, कहानी कैप्टन हेमंत कम्बोज की
कठिन प्रशिक्षण, अनुशासन और लगातार मेहनत के दम पर उन्होंने केवल 32 वर्ष की उम्र में शिप कैप्टन का सर्वोच्च पद हासिल कर लिया। यह उपलब्धि अपने आप में असाधारण थी, लेकिन उनके सीखने का सफर यहीं नहीं रुका।

हरियाणा के एक छोटे से गांव से निकलकर दुनिया के समुद्रों पर जहाजों की कमान संभालने तक का सफर आसान नहीं था। लेकिन कैप्टन हेमंत कम्बोज ने यह साबित कर दिया कि अगर सीखने की चाह और आगे बढ़ने का जज़्बा हो, तो उम्र और परिस्थितियां कभी भी बाधा नहीं बनतीं। महज 18 साल की उम्र में उन्होंने अपने समुद्री करियर की शुरुआत की। कठिन प्रशिक्षण, अनुशासन और लगातार मेहनत के दम पर उन्होंने केवल 32 वर्ष की उम्र में शिप कैप्टन का सर्वोच्च पद हासिल कर लिया। यह उपलब्धि अपने आप में असाधारण थी, लेकिन उनके सीखने का सफर यहीं नहीं रुका।
जब ऑनलाइन शिक्षा का दौर नहीं था, तब उन्होंने समुद्र में लंबी-लंबी तैनातियों के बीच पत्राचार के माध्यम से अपनी पढ़ाई जारी रखी। उन्होंने बिरला इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी से डिप्लोमा इन नॉटिकल साइंस किया और इसके बाद 2009 में मुंबई विश्वविद्यालय से बी.एससी. (डिस्टिंक्शन) की डिग्री प्राप्त की। समुद्री जीवन के साथ-साथ उन्हें कैपिटल मार्केट में भी गहरी रुचि रही। वर्ष 2019 से वे सक्रिय रूप कर रहे हैं। और 16 वर्षों के लंबे अंतराल के बाद दोबारा छात्र बनने का फैसला किया। आज 42 वर्ष की उम्र में वे चंडीगढ़ यूनिवर्सिटी ऑनलाइन से फाइनेंस और इंटरनेशनल बिजनेस में एमबीए कर रहे हैं। उनका मानना है कि व्यावहारिक अनुभव को अकादमिक ज्ञान के साथ जोड़ने से बेहतर निर्णय लेने की क्षमता विकसित होती है और बदलती दुनिया के साथ कदम मिलाकर चलना आसान हो जाता है।
आज कैप्टन हेमंत कम्बोज एक साथ तीन महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां निभा रहे हैं। वे समुद्र में शिप कैप्टन के रूप में जहाजों का नेतृत्व करते हैं, टेक ग्रीन एंटरप्राइज प्राइवेट लिमिटेड में निदेशक और स्टेकहोल्डर के रूप में व्यवसाय को आगे बढ़ा रहे हैं और साथ ही अपनी एमबीए की पढ़ाई भी पूरी लगन से जारी रखे हुए हैं।
उनकी कहानी इस बात का प्रमाण है कि सीखना कभी समाप्त नहीं होता। नई शुरुआत करने के लिए न उम्र मायने रखती है और न ही परिस्थितियां। यदि संकल्प मजबूत हो, तो जीवन का हर पड़ाव एक नए अवसर में बदला जा सकता है। कैप्टन हेमंत कम्बोज की यात्रा आज उन लाखों पेशेवरों के लिए प्रेरणा है, जो अपने करियर के बीच में भी खुद को बेहतर बनाने और नए सपनों को साकार करने का साहस रखते हैं।
देश की सेवा करने वालों के सम्मान में, चंडीगढ़ यूनिवर्सिटी ऑनलाइन लेकर आई है जय जवान स्कॉलरशिप । इसके तहत पात्र रक्षा एवं अर्धसैनिक बलों के सेवारत, सेवानिवृत्त और शहीद जवानों के परिवारों को ऑनलाइन डिग्री कार्यक्रमों में प्रवेश पर 35% तक की छात्रवृत्ति का लाभ दिया जा रहा है, ताकि उच्च शिक्षा और बेहतर भविष्य की राह और आसान बन सके।
लेखक के बारे में
Himanshu Jhaबिहार के दरभंगा जिले से ताल्लुक रखने वाले हिमांशु शेखर झा डिजिटल मीडिया जगत का एक जाना-माना नाम हैं। विज्ञान पृष्ठभूमि से होने के बावजूद (BCA और MCA), पत्रकारिता के प्रति अपने जुनून के कारण उन्होंने IGNOU से पत्रकारिता में डिप्लोमा किया और मीडिया को ही अपना कर्मक्षेत्र चुना।
एक दशक से भी अधिक समय का अनुभव रखने वाले हिमांशु ने देश के प्रतिष्ठित मीडिया संस्थानों जैसे दैनिक भास्कर, न्यूज़-18 और ज़ी न्यूज़ में अपनी सेवाएं दी हैं। वर्तमान में, वे वर्ष 2019 से लाइव हिन्दुस्तान के साथ जुड़े हुए हैं।
हिमांशु की पहचान विशेष रूप से राजनीति के विश्लेषक के तौर पर होती है। उन्हें बिहार की क्षेत्रीय राजनीति के साथ-साथ राष्ट्रीय राजनीति की गहरी और बारीक समझ है। एक पत्रकार के रूप में उन्होंने 2014, 2019 और 2024 के लोकसभा चुनावों और कई विधानसभा चुनावों को बेहद करीब से कवर किया है, जो उनके वृहद अनुभव और राजनीतिक दृष्टि को दर्शाता है।
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