
चंडीगढ़ पुलिस पर नहीं कोई संदेह, CBI को नहीं सौंपे सकते IPS पूरन सुसाइड केस; हाई कोर्ट की दो टूक
चीफ जस्टिस शील नागू और जस्टिस संजीव बेरी की खंडपीठ ने सभी दलीलों को खारिज करते हुए कहा कि चंडीगढ़ पुलिस की एसआईटी की जांच संतोषजनक है और अब तक की कार्रवाई से यह नहीं लगता कि किसी भी तरह की लापरवाही या पक्षपात किया गया है।
हरियाणा के आईपीएस अधिकारी वाई पूरन कुमार सुसाइड मामले की जांच सीबीआई को नहीं सौंपी जाएगी। आज पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट ने इस मामले की जांच किसी स्वतंत्र एजेंसी को सौंपने की मांग वाली याचिका को खारिज कर दिया। हाई कोर्ट ने इससे साफ मना करते हुए कहा कि चंडीगढ़ पुलिस की जांच पर संदेह करने का कोई ठोस आधार नहीं है। चीफ जस्टिस शील नागू और जस्टिस संजीव बेरी की खंडपीठ ने सभी दलीलों को खारिज करते हुए कहा कि चंडीगढ़ पुलिस की एसआईटी की जांच संतोषजनक है और अब तक की कार्रवाई से यह नहीं लगता कि किसी भी तरह की लापरवाही या पक्षपात किया गया है। अदालत ने कहा कि तथ्यों से यह नहीं लगता कि जांच में कोई ढिलाई या देरी हो रही है। इसलिए जांच दूसरी एजेंसी को देने की कोई जरूरत नहीं है।

दो दिन पहले सोमवार को पूरन कुमार सुसाइड केस में पंजाब एंड हरियाणा हाई कोर्ट ने चंडीगढ़ प्रशासन से जांच रिपोर्ट तलब की थी। बेंच ने सीबीआई जांच की मांग वाली याचिका पर सुनवाई करते हुए चंडीगढ़ प्रशासन के एडवोकेट से पूछा था कि केस की ताजा स्थिति क्या है? जांच कहां तक पहुंची? कोर्ट ने स्टेट्स रिपोर्ट दाखिल करने के आदेश दिये थे। गौरतलब है कि हरियाणा के वरिष्ठ आईपीएस अधिकारी वाई पूरन कुमार ने 7 अक्टूबर को चंडीगढ़ स्थित अपने घर पर गोली मारकर आत्महत्या कर ली थी।
एफएसएल भेजे कई सामान, रिपोर्ट का इंतजार
चंडीगढ़ प्रशासन की ओर से वरिष्ठ एडवोकेट अमित झांजी ने अदालत को बताया कि एफआईआर में 14 लोगों को आरोपी बनाया गया है। एफआईआर दर्ज होने के बाद कई सामान जब्त कर एफएसएल भेजे गए हैं, जिनकी रिपोर्ट का इंतजार है। अदालत को बताया गया कि 10 अक्टूबर 2025 को एक स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम गठित की गई, जिसकी अगुआई चंडीगढ़ के आईजी कर रहे हैं। अदालत ने कहा कि इन तथ्यों से यह नहीं लगता कि जांच में कोई ढिलाई या देरी हो रही है। ऐसे में जांच दूसरी एजेंसी को देने की कोई जरूरत नहीं है।
याचिकाकर्ता ने इन बातों को बनाया था आधार
सीबीआई जांच की मांग वाली याचिका हरियाणा के एक एनजीओ के अध्यक्ष नवीन कुमार ने दायर की थी। उन्होंने कहा था कि अधिकारी की आत्महत्या के मामले की जांच चंडीगढ़ पुलिस की जगह किसी स्वतंत्र एजेंसी से करवाई जाए, क्योंकि मौजूदा जांच निष्पक्ष नहीं है। याचिका में कहा गया कि इतने वरिष्ठ अधिकारी की संदिग्ध परिस्थितियों में हुई मौत ने पूरे देश को झकझोर दिया है और इससे सिविल सर्विसेज के भीतर जवाबदेही तंत्र पर जनता का भरोसा कमजोर हुआ है। जांच में कई सुसाइड नोट बरामद हुए, जिनमें से एक करीब एक माह पहले लिखा गया बताया गया, जिसमें 8 आईपीएस और 2 आईएएस अधिकारियों के नाम दर्ज हैं।
यह मामला सिस्टम के भीतर साजिश, जातीय उत्पीड़न और आत्महत्या के लिए उकसावे की गंभीर संभावना दर्शाता है। याचिकाकर्ता ने कहा कि चंडीगढ़ पुलिस की जांच सीमित है, क्योंकि वह अपने क्षेत्र और प्रशासनिक दायरे से बाहर नहीं जा सकती। मृतक हरियाणा कैडर के अधिकारी थे और चंडीगढ़ प्रशासन का सीधा संबंध हरियाणा तथा केंद्र सरकार दोनों से है।
रिपोर्ट: मोनी देवी

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