
दगा करे वो किसी से तो शर्म आए मुझे, ऐसा क्यों बोले हरियाणा के नए DGP ओपी सिंह
पुलिस अधिकारी ने कहा कि कुछ लोग इस सामाजिक और कानूनी करार को कभी-कभी नहीं मानते। हमारा काम उन्हें घर-घर, गली-गली, गांव-गांव, रास्ते-डगर, शहर-शहर रोकना है। मैं चाहूंगा कि अपने दिन-प्रतिदिन के कार्यों में आप राष्ट्र निर्माण में अपनी भूमिका को देखें।
आईपीएस वाई पूरन कुमार के सुसाइड केस करने और फिर उन पर भृष्टाचार के आरोप लगा रोहतक पुलिस के एएसआई संदीप लाठर के आत्महत्या से जहां सियासी भूचाल आया हुआ है, वहीं इन मामलों से हरियाणा पुलिस की साख को भी जबरदस्त धक्का लगा है। सुसाइड केस में पूर्व डीजीपी शत्रुजीत कपूर को छुट्टी पर भेजने के बाद हरियाणा के डीजीपी का एडिशनल चार्ज संभलने वाले आईपीएस ओपी सिंह ने पुलिसकर्मियों को मोटिवेट करने के लिए एक लेटर जारी किया है। इसमें उन्होंने पुलिसकर्मियों के हिदायत दी है कि लोगों के लिए ऐसा माहौल बनाया जाए कि शेर और बकरी एक ही घाट पर पानी पीएं। प्रजातंत्र का आश्वासन है कि शेर और बकरी एक ही घाट में पानी पीएं और शेर को अपनी ताकत का गुमान न हो और न ही बकरी को अपने कमजोरी का मलाल। यह सुनिश्चित करने की जिम्मेदारी पुलिस को मिली है।

उन्होंने लिखा है कि अपने आचरण-व्यवहार से आप दूसरों के लिए प्रेरणा और विश्वास का स्त्रोत बनें। इस बात को समझें कि लोगों ने पीढ़ी-दर-दर बहुत सहा है। आपसे उन्हें राहत, संरक्षण और सहयोग चाहिए। लेटर में उन्होंने कतील शिफाई के एक शेर का जिक्र करते हुए लिखा कि वो मेरा दोस्त है सारे जहां को है मालूम, दगा करे वो किसी से तो शर्म आए मुझे।
हिंसा और छलावा प्रकृति के स्वभाव में
डीजीपी के लेटर में लिखा है कि गौरवशाली हरियाणा पुलिस के साथियो, हमारे देश का एक गौरवशाली अतीत रहा है। प्राचीन काल में नदी घाटी सभ्यता होने के कारण हम सबसे समृद्ध थे। इसी कारण सीमा पार से हम पर बड़े हमले हुए। हमने सदियों गुलामी झेली। आजादी कुछ ही दशकों की बात है। इस थोड़े समय में हम गरीबी, बीमारी और अशिक्षा से काफी हद तक उबरने में सफल हुए हैं। देश और प्रांत निर्बाध तरक्की करें, इसके लिए सुरक्षा बलों के हमारे हजारों साथियों ने अपने प्राणों की आहुति दी है। अकेले हरियाणा में अब तक हमारे 84 साथी वीरगति को प्राप्त हुए हैं। मैं उनके सर्वोच्च बलिदान को श्रद्धापूर्वक नमन करता हूं। हिंसा और छलावा प्रकृति के स्वभाव में है। सभ्य जीवन इसके विरुद्ध अपराध तंत्र का सतत संघर्ष है।
पुलिस अधिकारी ने कहा कि कुछ लोग इस सामाजिक और कानूनी करार को कभी-कभी नहीं मानते। हमारा काम उन्हें घर-घर, गली-गली, गांव-गांव, रास्ते-डगर, शहर-शहर रोकना है। मैं चाहूंगा कि अपने दिन-प्रतिदिन के कार्यों में आप राष्ट्र निर्माण में अपनी भूमिका को देखें। आपके कारगर होने से लोग चैन की सांस लेते हैं, कारोबार को बढ़ावा मिलता है, लोगों को रोजगार मिलता है, समाज व्यवस्थित एवं देश आत्मनिर्भर होता है।
सही-गलत में आप सही की हमेशा रक्षा करेंगे, कीमत जो चुकानी पड़े
उन्होंने कतील शिफाई के एक शेर का जिक्र करते हुए लिखा, कि वो मेरा दोस्त है सारे जहां को है मालूम, दगा करे वो किसी से तो शर्म आए मुझे। डीजीपी ने आगे लिखा कि इतिहास के इस दौर ने जब आपको राष्ट्र-निर्माण में अग्रणी भूमिका दी है, मुझे पूरा विश्वास है कि आप इस पर खरे उतरेंगे। सही और गलत में आप सही की हमेशा रक्षा करेंगे। कीमत जो भी चुकानी पड़े।
रिपोर्ट: मोनी देवी

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