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हरियाणा में 37000 खिलाड़ियों को नहीं मिल रहा डाइट का खर्च, AAP बोली- कट गई बुजुर्गों की पेंशन

हरियाणा में 37000 खिलाड़ियों को नहीं मिल रहा डाइट का खर्च, AAP बोली- कट गई बुजुर्गों की पेंशन

संक्षेप:

AAP मीडिया प्रभारी अनुराग ढांडा ने दावा किया है कि हरियाणा सरकार ने 37 हजार खिलाड़ियों को एक साल से टाइड भत्ता नहीं दिया है। इसके अलावा बुजुर्गों की पेंशन काट दी गई हैं और कोचों को तनख्वाह नहीं मिल रही है।

Feb 09, 2026 10:14 am ISTAnkit Ojha लाइव हिन्दुस्तान
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आम आदमी पार्टी (AAP) के राष्ट्रीय मीडिया प्रभारी अनुराग ढांडा ने हरियाणा की बीजेपी सरकार और मुख्यमंत्री नायब सिंह की नीतियों पर तीखा हमला बोलते हुए कहा कि प्रदेश में आज सरकार पूरी तरह 'फनी सीएम मॉडल' पर चल रही है, जहां जनता की तकलीफ, खिलाड़ियों का भविष्य और बुज़ुर्गों की ज़िंदगी सरकार के एजेंडे से बाहर हो चुकी है। हरियाणा का नाम कभी खेलों और मेहनत की मिसाल के तौर पर लिया जाता था, लेकिन आज वही प्रदेश खिलाड़ियों की बदहाली, पेंशन कटौती और प्रशासनिक संवेदनहीनता की पहचान बनता जा रहा है।

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37 हजार खिलाड़ियों क नहीं मिला डाइट भत्ता

अनुराग ढांडा ने कहा कि यह बेहद शर्मनाक है कि हरियाणा में 37 हजार खिलाड़ियों को पिछले एक साल से डाइट भत्ता नहीं मिला और सरकार इसे सामान्य प्रशासनिक फैसला बताकर पल्ला झाड़ रही है। जिन खिलाड़ियों ने देश के लिए मेडल जीते, आज वही खिलाड़ी अपने खाने और पोषण के लिए परेशान हैं। खेल नर्सरियां बंद हैं, अभ्यास रुका हुआ है, लेकिन मुख्यमंत्री नायब सिंह के लिए यह कोई बड़ा मुद्दा नहीं है। ऐसा लगता है जैसे सरकार को लगता है कि मेडल भाषणों और विज्ञापनों से आ जाते हैं, मैदान और पसीने से नहीं।

कोचों को नहीं मिल रही सैलरी

उन्होंने कहा, स्थिति यहीं खत्म नहीं होती। खेल नर्सरियों में काम कर रहे कोचों को 10 महीने से सैलरी नहीं मिली, जिससे पूरा खेल तंत्र चरमरा गया है। जब कोच ही आर्थिक तनाव में होंगे, तो खिलाड़ियों को सही मार्गदर्शन और ट्रेनिंग कैसे मिलेगी। लेकिन सरकार इस पर चुप है, मानो यह सब किसी और प्रदेश की समस्या हो। यही वजह है कि आज हरियाणा का खिलाड़ी खुद को ठगा हुआ महसूस कर रहा है।

75 हजार बुजुर्गों की कट गई पेंशन

अनुराग ढांडा ने बुज़ुर्गों के मुद्दे पर भी सरकार को निशाने पर लिया। उन्होंने कहा कि हरियाणा सरकार ने 75 हजार बुज़ुर्गों की पेंशन काट दी, और हैरानी की बात यह है कि किसान की फसल के दाम को “कमाई” बताकर उसकी पेंशन रोक दी गई। जो किसान जीवन भर खेतों में मेहनत करता रहा, उसी को बुढ़ापे में यह कहकर दंडित किया जा रहा है कि अब वह पेंशन का हकदार नहीं है। यह सिर्फ नीतिगत असफलता नहीं, बल्कि अमानवीय सोच का उदाहरण है।

उन्होंने कहा, मुख्यमंत्री नायब सिंह की छवि अब एक ऐसे मुख्यमंत्री की बनती जा रही है, जिसे जनता के असली मुद्दों से कोई सरोकार नहीं है। खिलाड़ी भूखे हैं, बुज़ुर्ग पेंशन के लिए दफ्तरों के चक्कर काट रहे हैं, किसान अपमानित महसूस कर रहे हैं, लेकिन सीएम साहब “सब ठीक है” के भाव में नज़र आते हैं। यही कारण है कि सोशल मीडिया और जनता के बीच उन्हें लेकर “फन्नी सीएम” जैसी बातें हो रही हैं, क्योंकि सरकार गंभीर समस्याओं को भी हल्के में ले रही है।

इसके उलट आम आदमी पार्टी ने यह साबित किया है कि अगर नीयत साफ हो तो व्यवस्था बदली जा सकती है। पंजाब में खिलाड़ियों के लिए विश्वस्तरीय स्टेडियम, समय पर भत्ते, सम्मान और सुविधाएं दी जा रही हैं। आम आदमी पार्टी मानती है कि खिलाड़ी बोझ नहीं, प्रदेश की शान होते हैं; बुज़ुर्ग दया के नहीं, सम्मान के हकदार होते हैं; और किसान सिर्फ आंकड़ा नहीं, अर्थव्यवस्था की रीढ़ होता है।

अनुराग ढांडा ने कहा कि हरियाणा की बीजेपी सरकार जनता की समस्याओं पर ध्यान नहीं दे रही है और यही वजह है कि आम आदमी पार्टी इन मुद्दों को सड़क से लेकर सोशल मीडिया तक उठाएगी। यह लड़ाई खिलाड़ियों के हक की है, बुज़ुर्गों के सम्मान की है और हरियाणा की आत्मा को बचाने की है। सरकार चाहे जितनी “चिल” बनी रहे, जनता अब सवाल पूछने लगी है और जवाब लेकर ही मानेगी।

Ankit Ojha

लेखक के बारे में

Ankit Ojha

विद्यालयी जीवन से ही कलात्मक अभिव्यक्ति, विचारशील स्वभाव और मिलनसार व्यक्तित्व और सामान्य के अंदर डुबकी लगाकर कुछ खास खोज लाने का कौशल पत्रकारिता के लिए अनुकूल साबित हुआ। अंकित ओझा एक दशक से डिजिटल पत्रकारिता के क्षेत्र में लगातार सक्रिय हैं। उत्तर प्रदेश के बाराबंकी के रहने वाले अंकित ओझा समाचारों की दुनिया में तथ्यों के महत्व के साथ ही संवेदनशीलता के पक्ष को साधने में निपुण हैं। पिछले चार साल से हिन्दुस्तान टाइम्स ग्रुप के 'लाइव हिन्दुस्तान' के लिए चीफ कॉन्टेंट प्रड्यूसर पद पर कार्य कर रहे हैं। इससे पहले 'टाइम्स ऑफ इंडिया' और 'इंडियन एक्सप्रेस' ग्रुप के साथ भी कार्य कर चुके हैं।


राष्ट्रीय, अंतरराष्ट्रीय, राज्य और सामाजिक सरोकारों की खबरों के संपादन में लंबा अनुभव होने के साथ ही अपने-आसपास की घटनाओं में समाचार तत्व निकालने की अच्छी समझ है। घटनाओं और समाचारों से संबंधित फैसले लेने और त्वरित समाचार प्रकाशित करने में विशेष योग्यता है। इसके अलावा तकनीक और पाठकों की बदलती आदतों के मुताबिक सामग्री को रूप देने के लिए निरंतर सीखने में विश्वास करते हैं। अंकित ओझा की रुचि राजनीति के साथ ही दर्शन, कविता और संगीत में भी है। लेखन और स्वरों के माध्यम से लंबे समय तक आकाशवाणी से भी जुड़े रहे। इसके अलावा ऑडियन्स से जुड़ने की कला की वजह से मंचीय प्रस्तुतियां भी सराही जाती हैं।


अकादमिक योग्यताः अंकित ओझा ने प्रारंभिक शिक्षा नवोदय विद्यालय से पूरी करने के बाद जामिया मिल्ल्लिया इस्लामिया से पत्रकारिता में ही ग्रैजुएशन किया है। इसके बाद भारतीय जनसंचार संस्थान (IIMC) से पोस्ट ग्रैजुएट डिप्लोमा और कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय से मास कम्युनिकेशन में एमए किया है। जामिया में अध्ययन के दौरान ही इटैलियन और उर्दू भाषा में भी कोर्स किए हैं। इसके अलावा पंजाबी भाषा की भी अच्छी समझ रखते हैं। विश्वविद्यालय में NCC का 'C सर्टिफिकेट' भी प्राप्त किया है। IIMC और ऑक्सफर्ड से स्वास्थ्य पत्रकारिता का सर्टिफिकेट भी प्राप्त किया है।

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