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Delhi Blast: जिन डॉक्टरों का करियर दागदार, उन्हीं को दी नौकरी; बुरी फंसी अल फलाह यूनिवर्सिटी

Delhi Blast: जिन डॉक्टरों का करियर दागदार, उन्हीं को दी नौकरी; बुरी फंसी अल फलाह यूनिवर्सिटी

संक्षेप:

यूनिवर्सिटी ने बयान जारी कर कहा कि हमारे इन गिरफ्तार डॉक्टरों से केवल प्रोफेशनल संबंध था। लेकिन यूनिवर्सिटी प्रबंधन इतना कहने भर से अपना पल्ला नहीं झाड़ सकता। जांच एजेंसियां अब यूनिवर्सिटी के 70 एकड़ के विशाल कैंपस को छान रही हैं।

Nov 13, 2025 07:09 am ISTHimanshu Jha लाइव हिन्दुस्तान
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दिल्ली ब्लास्ट में व्हाइट कॉलर टेरर मॉड्यूल का सेंटर बनी फरीदाबाद के धौज की अल फलाह यूनिवर्सिटी शक के दायरे में आ गई है। शिक्षा की आड़ में धार्मिक कट्टरपंथी का सेंटर बनी इसी यूनिवर्सिटी के तीन डॉक्टर डॉ. मुजम्मिल शकील, डॉ. शाहीन शाहिद और डॉ. उमर नबी इस यूनिवर्सिटी के मेडिकल कॉलेज से जुड़े थे। डॉ. शाहीन शाहिद और डॉ. उमर नबी का करियर पहले भी दागदार रहा है। इनके अलावा इस मॉड्यूल में शामिल डॉ. निसार-उल-हसन का करियर भी विवादों में रहा है। डॉ. उमर नबी को जम्मू कश्मीर के एक मेडिकल कॉलेज से रेडिकलाइजेशन के लिए निकाला गया था।

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डॉ. निसार-उल-हसन को साल 2023 में जम्मू कश्मीर के उपराज्यपाल आतंकियों से संबंध रखने के कारण नौकरी से बर्खास्त किया गया था। वहीं, डॉ. शाहीन शाहिद को भी कई साल तक कानपुर मेडिकल कॉलेज में ड्यूटी से गैर हाजिर रहने की वजह से निकाल दिया गया था। हैरानी की बात ये है कि इन तीनों को अल फलाह यूनिवर्सिटी में नौकरी पर रख लिया गया। क्या अल फलाह चैरिटेबल ट्रस्ट और यूनिवर्सिटी प्रबंधन ने इन तीनों को नौकरी देने से पहले इनका विवादित बैकग्राउंड चेक नहीं किया था? या फिर किसी खास मकसद से उन पर मेहरबानी की गई थी?

यूनिवर्सिटी ने बयान जारी कर कहा कि हमारे इन गिरफ्तार डॉक्टरों से केवल प्रोफेशनल संबंध था। लेकिन यूनिवर्सिटी प्रबंधन इतना कहने भर से अपना पल्ला नहीं झाड़ सकता। जांच एजेंसियां अब यूनिवर्सिटी के 70 एकड़ के विशाल कैंपस को छान रही हैं।

विदेशों से फंडिंग, फैकल्टी में जम्मू कश्मीर के डॉक्टर ज्यादा

यूनिवर्सिटी को दिल्ली के ओखला में रजिस्टर्ड अल-फला चैरिटेबल ट्रस्ट चलाता है। अल फलाह चैरिटेबल ट्रस्ट के फाउंडर और चांसलर जवाहर अहमद सिद्दीकी हैं, जो अल फलाह इंवेस्टमेंट्स लिमिटेड के मैनेजिंग डायरेक्टर भी हैं। यूनिवर्सिटी को अरब देशों से सालाना दान मिलता है। फंडिंग के दुरुपयोग के संदेह के चलते एनआईए अब विदेशी दान के सोर्स की भी जांच कर रही है। 2014 में हरियाणा प्राइवेट यूनिवर्सिटी एक्ट के तहत इसे यूनिवर्सिटी का दर्जा मिला था। अलफला अस्पताल 2019 से मेडिकल कॉलेज का संचालन कर रहा है जिस में एमबीबीएस की पढाई होती है। साल 2023 में यहां एमडी और एमएस कोर्स भी शुरू किए गए। मेडिकल फैकल्टी में जम्मू कश्मीर के डॉक्टर ही ज्यादा हैं। साथ ही स्टूडेंट्स भी जम्मू कश्मीर के ही ज्यादा हैं।

कैंपस से सटी मस्जिद का इमाम हिरासत में

अल-फलाह यूनिवर्सिटी से बहुत बड़े आतंकी मॉड्यूल चलने का शक इसलिए भी गहरा हो गया है क्योंकि कैंपस से सटी मस्जिद के इमाम इश्तियाक को भी हिरासत में लिया गया है। 2900 किलो विस्फोटक मिलने के मामले में कल 40 साल के इमाम इश्तियाक को जांच एजेंसियों ने हिरासत में लिया था। 20 साल पहले अल-फलाह यूनिवर्सिटी कैंपस से सटी मस्जिद में इमाम को नौकरी मिली। उसे मस्जिद में ही रहने को घर मिला। इसी दौरान डॉ. मुजम्मिल शकील के संपर्क में आया और दोनों में दोस्ती हो गई। कई बार वह उसके घर दावत पर भी आया था। इमाम इश्तियाक ने फतेहपुरा तगा में 4 कमरों का एक पुराना घर खरीद लिया था। डॉ. मुजम्मिल ने इमाम से इस पुराने घर का एक हिस्सा किराये पर ले लिया। इसी घर से 8-9 नवंबर को पुलिस ने विस्फोटक बरामद किए थे।

रिपोर्ट: मोनी देवी

Himanshu Jha

लेखक के बारे में

Himanshu Jha
कंप्यूटर साइंस में पोस्ट ग्रैजुएट हिमांशु शेखर झा करीब 9 वर्षों से बतौर डिजिटल मीडिया पत्रकार अपनी सेवा दे रहे हैं। बिहार और उत्तर प्रदेश के अलावा राष्ट्रीय राजनीति पर अच्छी पकड़ है। दिसंबर 2019 में लाइव हिन्दुस्तान के साथ जुड़े। इससे पहले दैनिक भास्कर, न्यूज-18 और जी न्यूज जैसे मीडिया हाउस में भी काम कर चुके हैं। हिमांशु बिहार के दरभंगा जिला के निवासी हैं। और पढ़ें

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