CET भर्ती विवाद:हरियाणा के 10,458 कर्मचारियों को HC से राहत, सरकारी नौकरी बरकरार
पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट ने 10 हजार से ज्यादा सरकारी कर्मचारियों को राहत दी है। इन कर्मचारियों द्वारा लगाई गई याचिका के आधार पर कोर्ट ने अपने आदेश की समीक्षा करते हुए इनकी नौकरी बहाल करने का आदेश दिया है।

पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट ने 10 हजार से ज्यादा सरकारी कर्मचारियों को राहत दी है। सुप्रीम कोर्ट द्वारा भर्ती परीक्षा रद्द करने के फैसले के बाद यह सभी कर्मचारी अनिश्चितता की स्थिति में जी रहे थे। कई कर्मचारियों द्वारा दायर की गई याचिका पर सुनवाई करते हुए हाई कोर्ट ने माना कि भर्ती प्रक्रिया रद्द करने को गलत तरीके से लागू किया गया है। ऐसे में इन सभी उम्मीदवारों को नौकरी जारी रहेगी।
कर्मचारियों की याचिका पर सुनवाई करते हुए जस्टिस अश्वनी कुमार मिश्रा और जस्टिस सुदीप्ति शर्मा की पीठ सीईटी भर्ती परीक्षा को लेकर फैसला सुनाया। अदालत ने स्पष्ट किया कि अब यह भर्ती प्रक्रिया को रद्द करने का पुराना निर्णय केवल “ग्रुप 56-57” पर लागू होगा, जहां विवादित नियम का प्रभाव महत्वपूर्ण पाया गया। इसके अलावा जो भी लोग इसके प्रभाव में आए हैं। उनकी नौकरी को बरकरार रखा जाएगा।
क्या है मामला?
यह मामला तब शुरू हुआ था, जब हरियाणा कर्मचारी चयन आयोग द्वारा 2 मई 2022 को ग्रुप -सी और ग्रुप-डी के पदों की भर्ती के लिए सीईटी नीति लागू की गई थी। दो चरणों की इस प्रक्रिया में सामाजिक और आर्थिक आधार पर उम्मीदवारों को अतिरिक्त पांच नंबर दिए जाने थे।
सरकार के इस प्रावधान को हाई कोर्ट में चुनौती दी गई, जिसके बाद कोर्ट ने इस पर रोक लगा दी। इसके बाद 31 मई 2024 को उच्च न्यायालय ने इस नियम को समानता के प्रावधानों का उल्लंघन करार दिया। इसके बाद कोर्ट ने पूरी भर्ती प्रक्रिया को ही रद्द कर दिया। राज्य सरकार ने उच्च न्यायालय के इस फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी, लेकिन वहां भी इसे खारिज कर दिया गया। सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले के बाद चुने गए लगभग 10,458 उम्मीदवार अधर में आ गए। फिर उम्मीदवारों ने हाई कोर्ट में याचिका लगाना शुरू किया, जिस पर अब उच्च न्यायालय ने नया फैसला दिया है।
जस्टिस मिश्रा और जस्टिस शर्मा ने मामले की फिर से जांच करते हुए कहा कि बार-बार अवसर दिए जाने के बावजूद ऐसा एक भी उदाहरण अदालत के समक्ष प्रस्तुत नहीं किया गया जहां सीईटी-1 में योग्य घोषित किसी उम्मीदवार को सीईटी-2 में उपस्थित होने का अवसर नहीं दिया गया हो। इस प्रकार, इन 24 ग्रुपों में सामाजिक-आर्थिक नियम के तहत दिए गए अंकों का कोई प्रभाव नहीं था। अतः कोर्ट ने इन उम्मीदवारों के सीईटी परिणामों को रद्द करने में गलती की। ऐसे में इन 24 समूहों के अंतर्गत पदों के लिए चयनित और नियुक्त उम्मीदवारों को कानून के अनुसार सेवा में बने रहने की अनुमति दी जाएगी।
लेखक के बारे में
Upendra Thapakउपेंद्र ने डिजिटल पत्रकारिता की शुरुआत लाइव हिन्दुस्तान से की है। पिछले एक साल से वे होम टीम में कंटेंट प्रोड्यूसर के तौर पर कार्यरत हैं। उन्होंने लोकसभा चुनाव 2024, ऑपरेशन सिंदूर और कई राज्यों के विधानसभा चुनावों की कवरेज की है। पत्रकारिता की पढ़ाई भारतीय जनसंचार संस्थान (IIMC), नई दिल्ली (बैच 2023-24) से पूरी करने वाले उपेंद्र को इतिहास, अंतर्राष्ट्रीय संबंध, राजनीति, खेल, विज्ञान और समसामयिक घटनाओं से जुड़े विषयों में गहरी रुचि है। स्नातक स्तर पर बायोटेक्नोलॉजी की पढ़ाई करने के कारण उन्हें मेडिकल और वैज्ञानिक विषयों की भाषा की भी अच्छी समझ है। वे मूल रूप से मध्यप्रदेश के भिंड जिले के निवासी हैं।
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