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पंजाब में हो सकता है तो हरियाणा में क्यों नहीं? AAP नेता अनुराग ढांडा ने CM नायब सैनी से पूछे सवाल

पंजाब में हो सकता है तो हरियाणा में क्यों नहीं? AAP नेता अनुराग ढांडा ने CM नायब सैनी से पूछे सवाल

संक्षेप: आम आदमी पार्टी के राष्ट्रीय मीडिया प्रभारी अनुराग ढांडा ने कहा कि अगर पंजाब में किसानों को 30 दिन के अंदर मुआवजा मिल सकता है तो हरियाणा में क्यों नहीं। उन्होंने बाढ़ के बाद राहत राशि पर बीजेपी सरकार को घेरा है।

Tue, 14 Oct 2025 11:53 AMAnkit Ojha लाइव हिन्दुस्तान
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हरियाणा में बाढ़ से किसानों के नुकसान पर आम आदमी पार्टी ने बीजेपी सरकार और मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी पर सीधा हमला बोला है। पार्टी के राष्ट्रीय मीडिया प्रभारी अनुराग ढांडा ने कहा कि 'अगर पंजाब में किसानों को 30 दिन में ₹20,000 प्रति एकड़ मुआवज़ा दिया जा सकता है, तो हरियाणा में ऐसा क्यों नहीं हो सकता?' ढांडा ने दावा किया कि बाढ़ से हरियाणा में 5.30 लाख किसान, 6,395 गांव और करीब 31 लाख एकड़ जमीन प्रभावित हुई है। इसके बावजूद किसानों को आज तक एक रुपया मुआवज़ा नहीं मिला। उन्होंने कहा, 8 जिलों में 15,834 एकड़ गिरदावरी का काम अभी भी अधूरा है।

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बीजेपी सरकार पर निशाना साधते हुए उन्होंने कहा, 'सरकार ने सिर्फ ₹15,000 प्रति एकड़ मुआवज़े की बात कही, लेकिन किसानों के खाते में अब तक कुछ नहीं आया। दूसरी तरफ पंजाब में आम आदमी पार्टी सरकार ने ₹20,000 प्रति एकड़ का मुआवज़ा तय किया और 30वें दिन ही किसानों के बैंक खातों में पैसा पहुंचा दिया। पंजाब में काम हुआ, हरियाणा में सिर्फ बात हुई।'

मुख्यमंत्री नायब सिंह पर हमला करते हुए ढांडा ने कहा, 'मुख्यमंत्री को किसानों का दर्द दिखता ही नहीं। MSP पर फसल नहीं बिक रही, खेत बाढ़ में डूबे हैं, फसलें बर्बाद हो चुकी हैं, लेकिन मुख्यमंत्री दिल्ली दरबार में अपनी कुर्सी बचाने में व्यस्त हैं। किसानों को राहत देने की बजाय सरकार ने मुंह मोड़ लिया है।'

उन्होंने कहा कि पंजाब में 11 सितंबर को विशेष गिरदावरी की घोषणा हुई थी। 45 दिन में काम पूरा करने का लक्ष्य था, लेकिन 30वें दिन ही मुआवज़ा किसानों को मिलना शुरू हो गया। 2,508 गांवों में गिरदावरी पूरी कर 3.5 लाख एकड़ जमीन पर ₹20,000 प्रति एकड़ के हिसाब से मुआवज़ा दिया गया। घरों और पशुधन के नुकसान की भरपाई भी सीधे किसानों के खातों में पारदर्शी तरीके से की गई। ढांडा ने कहा, 'बीजेपी सरकार किसानों की मदद करने की बजाय राजनीति में उलझी है। उन्होंने हरियाणा के किसानों से अपील की कि वे इस अन्याय के खिलाफ आवाज़ उठाएं। किसानों को राहत चाहिए, बयानबाज़ी नहीं।'

Ankit Ojha

लेखक के बारे में

Ankit Ojha
अंकित ओझा पिछले 8 साल से पत्रकारिता के क्षेत्र में कार्य कर रहे हैं। अंकित ने जामिया मिल्लिया इस्लामिया से स्नातक के बाद IIMC नई दिल्ली से हिंदी पत्रकारिता में स्नातकोत्तर डिप्लोमा किया है। इसके बाद कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय से स्नातकोत्तर डिग्री हासिल की है। राजनीति, राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय डेस्क पर कार्य करने का उनके पास अनुभव है। इसके अलावा बिजनेस और अन्य क्षेत्रों की भी समझ रखते हैं। हिंदी, अंग्रेजी के साथ ही पंजाबी और उर्दू का भी ज्ञान है। डिजिटल के साथ ही रेडियो और टीवी के लिए भी काम कर चुके हैं। और पढ़ें

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