
हमें सहानुभूति है लेकिन…; 17 साल के नाबालिग से हिरासत में यौन उत्पीड़न के आरोपों पर SC
संक्षेप: गुजरात में 17 साल के लड़के को पुलिस हिरासत में रखने और हिरासत में प्रताड़ित करने के आरोपों की सीबीआई या एसआईटी जांच की मांग वाली याचिका को सुप्रीम कोर्ट ने खारिज कर दिया है।
गुजरात में 17 साल के लड़के को पुलिस हिरासत में रखने और हिरासत में प्रताड़ित करने के आरोपों की सीबीआई या एसआईटी जांच की मांग वाली याचिका को सुप्रीम कोर्ट ने खारिज कर दिया है। नाबालिग की बहन ने याचिका दायर करते हुए आरोप लगाया था कि पुलिस ने हिरासत में लेकर उसे पीटा और सका यौन उत्पीड़न भी किया। जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस संदीप मेहता की पीठ ने कहा कि कोर्ट पीड़ित की स्थिति के प्रति सहानुभूति रखता है, लेकिन फिर भी पीड़ित को पहले गुजरात हाई कोर्ट का रुख करना चाहिए।

बार एंड बेंच की रिपोर्ट के मुताबिक कोर्ट याचिकाकर्ता को याचिका वापस लेने की अनुमति देते हुए कहा हमें सहानुभूति है, लेकिन आपको हाई कोर्ट का रुख करना चाहिए। याचिकाकर्ता की ओर से पेश हुए वकील रोहिन भट्ट ने दलील दी कि याचिका में की गई कुछ प्रार्थनाओं के कारण सीधे सुप्रीम कोर्ट का रुख किया गया था, जिसमें नई दिल्ली के एम्स अस्पताल को एक मेडिकल बोर्ड गठित करने और नाबालिग को लगी चोटों पर एक रिपोर्ट पेश करने का निर्देश देने की याचिका भी शामिल थी। वहीं जस्टिस विक्रम नाथ ने सवाल किया कि हाई कोर्ट ऐसी राहत क्यों नहीं दे सकता था।
भट्ट ने जवाब दिया कि संविधान के अनुच्छेद 226(2) के तहत हाई कोर्ट ऐसी राहत दे सकता है, लेकिन यह मुद्दा व्यक्तिगत मामले से आगे जाता है। उन्होंने दलील दी, हाई कोर्ट 226(2) के तहत राहत दे सकता था, लेकिन मुद्दा यह है कि इस मामले से परे, नाबालिगों को उठाकर प्रताड़ित करने के अखिल भारतीय निहितार्थ हैं।
इसके बाद जस्टिस संदीप मेहता ने पूछा कि याचिका में कितनी घटनाओं का हवाला दिया गया है। भट्ट ने जवाब दिया कि केवल दो घटनाओं का। इन दलीलों को दर्ज करते हुए, न्यायालय ने याचिका पर विचार करने से इनकार कर दिया और याचिकाकर्ता को इसे वापस लेने की अनुमति दे दी।

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Aditi Sharmaलेटेस्ट Hindi News , बॉलीवुड न्यूज, बिजनेस न्यूज, टेक , ऑटो, करियर , और राशिफल, पढ़ने के लिए Live Hindustan App डाउनलोड करें।




