
अहमदाबाद प्लेन क्रैश में पायलट की 'गलती' बताने वाली रिपोर्ट पर क्या बोला सुप्रीम कोर्ट
संक्षेप: सुप्रीम कोर्ट ने 12 जून को अहमदाबाद में हुए एयर इंडिया विमान हादसे की कोर्ट की निगरानी में स्वतंत्र जाच की मांग वाली एक जनहित याचिका पर सुनवाई की।
सुप्रीम कोर्ट ने 12 जून को अहमदाबाद में हुए एयर इंडिया विमान हादसे की कोर्ट की निगरानी में स्वतंत्र जाच की मांग वाली एक जनहित याचिका पर सुनवाई की। इस दौरान कोर्ट ने एक रिपोर्ट में मौजूद उस बयान को बेहद गैरजिम्मेदाराना करार दिया जिसमें इस हादसे के लिए पायलटों से हुई गलती को जिम्मेदार ठहराया गया था। मामले की सुनवाई कर रहे जस्टिस सूर्यकांत ने कहा, ये बहुत दुर्भाग्यपूर्ण और गैर-जिम्मेदाराना बयान हैं।

सोमवार को सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने कहा, अगर कल कोई गैरजिम्मेदाराना तरीके से कह दे कि पायलट A या B की गलती थी, तो परिवार को नुकसान होगा। अगर बाद में अंतिम जांच रिपोर्ट में कोई गलती नहीं पाई जाती है तो क्या होगा? कोर्ट का ये बयान उस दलील पर आय़ा जिसमें बताया गया था कि एक रिपोर्ट में सूत्रों के हवाले से बताया गया था कि जांच रिपोर्ट में पायलटों को जिम्मेदार ठहराया जा रहा है।
कोर्ट ने हादसे की जांच को लेकर केंद्रीय नागरिक उड्डयन मंत्रालय, भारत के विमान दुर्घटना जांच ब्यूरो (एएआईबी) और नागरिक उड्डयन महानिदेशक (डीजीसीए) से जवाब मांगा है। ये नोटिस सुप्रीम कोर्ट ने सेफ्टी मैटर्स फाउंडेशन द्वारा दायर एक जनहित याचिका (पीआईएल) पर नोटिस जारी किया है।
कोर्ट ने कहा- हर जानकारी सार्वजनिक नहीं कर सकते
हालांकि, कोर्ट ने एनजीओ की उस याचिका पर आपत्ति जताई है जिसमें विमान से संबंधित सभी रिकॉर्ड किए गए फॉल्ट मैसेज और तकनीकी सलाह सहित सभी जांच सामग्री सार्वजनिक करने की मांग की गई थी। जस्टिस कांत ने कहा, मान लीजिए कल यह कहा जाता है कि पायलट 'ए' ज़िम्मेदार है? पायलट के परिवार को इसका खामियाजा भुगतना पड़ेगा। कोर्ट ने सरकारी अधिकारियों से केवल इस सीमित सवाल पर जवाब मांगा कि क्या मामले की जांच सही दिशा में आगे बढ़ रही है।
हादसे के 100 से ज्यादा दिन बाद भी केवर शुरुआती रिपोर्ट ही आई
बार एंड बेंच के मुताबिक एनजीओ की ओर से वरिष्ठ वकील प्रशांत भूषण ने कहा, यह एक बहुत ही महत्वपूर्ण मामला है। दुर्घटना को 100 दिन से ज़्यादा हो गए हैं। अब तक जो कुछ भी हुआ है, वह प्रारंभिक रिपोर्ट है। इसमें यह नहीं बताया गया है कि क्या हुआ है या क्या हो सकता है और क्या सावधानियां बरती जानी चाहिए। नतीजा यह है कि इन बोइंग विमानों में यात्रा करने वाले सभी यात्री आज जोखिम में हैं। मझे पीड़ितों और पायलटों के रिश्तेदारों ने बुलाया था।
भूषण ने कहा कि अधिकारियों ने दुर्घटना की जांच के लिए पांच सदस्यीय टीम नियुक्त की थी, जिनमें से तीन डीजीसीए के सेवारत सदस्य हैं, जिससे हितों का गंभीर टकराव पैदा हो रहा है। उनका तर्क है कि डीजीसीए के अधिकारी, जिनकी भूमिका जांच के दायरे में आने की संभावना है, जांच दल का हिस्सा कैसे हो सकते हैं। इस पर जस्टिस सूर्यकांत ने पूछा कि निष्पक्ष जांच तो समझ में आती है, लेकिन याचिकाकर्ता इतनी सारी जानकारी सार्वजनिक करने की मांग क्यों कर रहे हैं।
प्रशांत भूषण ने दलील दी कि, सरकार को रिपोर्ट दिए जाने से पहले, द वॉल स्ट्रीट जर्नल ने एक लेख प्रकाशित किया था जिसमें कहा गया था कि हमें अपने सूत्रों से पता चला है कि इस रिपोर्ट में पायलटों को दोषी ठहराया जा रहा है। कुछ लीक हुआ था। सबने यही कहा कि यह पायलट की गलती थी। वे बहुत अनुभवी पायलट थे। जो कहानी दी जा रही थी, वह यह थी कि पायलटों ने जानबूझकर इंजनों को ईंधन की सप्लाई बंद कर दी थी। इस पर कोर्ट ने कहा, ये बेहद दुर्भाग्यपूर्ण और गैर-जिम्मेदाराना बयान हैं। भूषण ने कहा, अगर फ्लाइट डेटा रिकॉर्डर के बारे में पारदर्शिता होती, तो स्वतंत्र लोग उस डेटा की जांच करके पता लगा सकते थे कि क्या हुआ था। इस पर जस्टिस कांत ने कहा देखते हैं। लेकिन इस तरह के मामलों में गोपनीयता सबसे जरूरी है।

लेखक के बारे में
Aditi Sharmaलेटेस्ट Hindi News , बॉलीवुड न्यूज, बिजनेस न्यूज, टेक , ऑटो, करियर , और राशिफल, पढ़ने के लिए Live Hindustan App डाउनलोड करें।




