Hindi Newsगुजरात न्यूज़Supreme Court dismisses Ex IPS officer Sanjiv Bhatt plea seeking suspension in 1996 drug plant case
राहत के लिए SC पहुंचे पूर्व IPS संजीव भट्ट को झटका, सजा निलंबन की मांग खारिज

राहत के लिए SC पहुंचे पूर्व IPS संजीव भट्ट को झटका, सजा निलंबन की मांग खारिज

संक्षेप:

सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को पूर्व आईपीएस संजीव भट्ट की याचिका खारिज कर दी। अदालत में सजा निलंबन की मांग की की थी। संजीव भट्ट ड्रग केस में 7 साल की सजा पूरी कर चुके हैं।

Dec 11, 2025 11:54 am ISTGaurav Kala लाइव हिन्दुस्तान, नई दिल्ली
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गुजरात के पूर्व IPS अधिकारी संजय भूट्ट को सुप्रीम कोर्ट से झटका लगा है। सुप्रीम अदालत ने संजीव भट्ट की याचिका खारिज कर दी। उन्होंने 1996 के ड्रग्स प्लांटिंग केस में मिली 20 साल की सजा को निलंबित करने की मांग की थी। मामला जस्टिस जेके माहेश्वरी और जस्टिस विजय विश्नोई की बेंच के सामने था।

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संजय भूट्ट की ओर से वरिष्ठ वकील कपिल सिब्बल ने दलील दी कि भूट्ट 7 साल 3 महीने की सजा काट चुके हैं, इसलिए उनकी सजा निलंबित होनी चाहिए, लेकिन बेंच ने कहा कि वह इस मामले में दखल देने के पक्ष में नहीं है। सिब्बल ने तर्क दिया कि आरोप 5 किलो ड्रग्स का था, लेकिन कोर्ट ने उन्हें 1.015 किलो अफीम के कब्जे में पाया है, जो कमर्शियल क्वांटिटी नहीं है। इस पर जस्टिस माहेश्वरी ने कहा कि रिकॉर्ड में आरोप गंभीर हैं।

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राज्य सरकार की ओर से वरिष्ठ वकील मनींदर सिंह ने कहा कि यह मामला बेहद “गंभीर” है। उन्होंने बताया कि भूट्ट ने DSP रहते हुए साजिश रची, अफीम मंगवाई और उसे एक गेस्ट हाउस में रखकर एक वकील को फंसाने की कोशिश की।

गुजरात हाईकोर्ट भी कर चुका याचिका खारिज

गुजरात हाईकोर्ट ने भी पहले भूट्ट की सजा निलंबन की मांग ठुकरा दी थी। हाईकोर्ट ने कहा था कि मामला बेहद गंभीर है। NDPS एक्ट की धारा 37 के तहत सजा निलंबित करने के लिए कठोर शर्तें हैं और दोषसिद्धि के बाद ‘निर्दोषता की धारणा’ खत्म हो जाती है।

क्या है 1996 का ड्रग्स प्लांटिंग केस?

यह मामला राजस्थान के वकील सुमेर सिंह राजपुरोहित को फर्जी ड्रग्स केस में फंसाने से जुड़ा है। आरोप है कि 1996 में बनासकांठा पुलिस ने एक होटल में 1.5 किलो अफीम रखकर वकील को NDPS एक्ट में फंसा दिया था।

तब संजय भूट्ट बनासकांठा के DSP थे। 2018 में गुजरात हाईकोर्ट के आदेश पर CID ने केस की जांच शुरू की और भूट्ट को गिरफ्तार किया। 2021 में सह-आरोपी और स्थानीय क्राइम ब्रांच के इंस्पेक्टर आईबी व्यास सरकारी गवाह बन गए।

2024 में फैसला आया

मार्च 2024 में पलनपुर की सेशंस कोर्ट ने भूट्ट को NDPS एक्ट की धाराएं 21(c), 27A, 29, 58(1)(2) और IPC की धाराएं 465, 471, 167, 204, 343, 120B, 34 के तहत दोषी ठहराया और 20 साल की जेल तथा 2 लाख रुपये जुर्माना लगाया।

Gaurav Kala

लेखक के बारे में

Gaurav Kala
गौरव काला को नेशनल, राजनीति, अंतरराष्ट्रीय, क्राइम और वायरल समाचार लिखना पसंद हैं। प्रिंट, इलेक्ट्रॉनिक और डिजिटल मीडिया में 10 साल कार्य का अनुभव। लाइव हिन्दुस्तान से पहले अमर उजाला, दैनिक जागरण और ईटीवी भारत जैसे मीडिया संस्थानों में काम कर चुके हैं। इन्होंने हेमवती नंदन बहुगुणा गढ़वाल केंद्रीय विश्वविद्यालय से पत्रकारिता में स्नातक और स्नातकोत्तर की पढ़ाई की है। और पढ़ें

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