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Hindi News गुजरातक्या सूरत लोकसभा सीट पर सबकुछ था फिक्स? निलंबित कांग्रेस नेता नीलेश कुंभानी ने बताया

क्या सूरत लोकसभा सीट पर सबकुछ था फिक्स? निलंबित कांग्रेस नेता नीलेश कुंभानी ने बताया

क्या सूरत लोकसभा सीट पर सबकुछ पहले से तय था। सूरत के निलंबित कांग्रेस नेता नीलेश कुंभानी 20 दिनों के बाद शनिवार को सामने आए और इस सवाल का जवाब कुछ इस तरह दिया। जानें उन्होंने क्या कहा?

क्या सूरत लोकसभा सीट पर सबकुछ था फिक्स? निलंबित कांग्रेस नेता नीलेश कुंभानी ने बताया
Krishna Singhपीटीआई,सूरतSat, 11 May 2024 10:57 PM
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सूरत के निलंबित कांग्रेस नेता नीलेश कुंभानी 20 दिनों के बाद शनिवार को सामने आए और अपने बयान से सियासी माहौल को गरमा दिया। उन्होंने कहा कि कांग्रेस नेता मुझ पर विश्वासघात का आरोप लगा रहे हैं लेकिन उन्हें पता होना चाहिए कि यह कांग्रेस ही थी जिसने 2017 के विधानसभा चुनावों में मुझे सबसे पहले धोखा दिया था। उस समय मेरा सूरत की कामरेज विधानसभा सीट से टिकट आखिरी समय रद्द कर दिया गया था। मैं नहीं, यह कांग्रेस ही थी जिसने पहली गलती की थी।

बता दें कि नीलेश कुंभानी पहले सूरत नगर निगम में कांग्रेस पार्षद के रूप में कार्यरत थे। उन्होंने 2022 का विधानसभा चुनाव कामरेज से लड़ा, लेकिन भाजपा से हार गए थे। बीते 21 अप्रैल को कुंभानी का नामांकन फॉर्म खारिज कर दिया गया था। उनके तीन प्रस्तावकों ने जिला रिटर्निंग अधिकारी को हलफनामा देकर दावा किया था कि उन्होंने दस्तावेज पर हस्ताक्षर नहीं किए थे। 

इसके बाद संयोग से कांग्रेस के दूसरे उम्मीदवार सुरेश पडसाला का नामांकन फॉर्म भी खारिज कर दिया गया था। इससे मैदान में कांग्रेस की चुनौती समाप्त हो गई थी। 22 अप्रैल को बसपा के एक उम्मीदवार समेत अन्य सभी उम्मीदवारों ने अपना नामांकन वापस ले लिया था। इसके बाद भाजपा के मुकेश दलाल को सूरत से निर्विरोध निर्वाचित घोषित किया गया था। कांग्रेस के साथ चुनाव पूर्व गठबंधन के कारण आप ने सूरत से अपना उम्मीदवार नहीं उतारा था। 

कुंभानी 22 अप्रैल से संपर्क में नहीं थे। बाद में उन्हें कांग्रेस ने निलंबित कर दिया था। कांग्रेस ने उन्हें नामांकन फॉर्म की रिजेक्ट होने के लिए दोषी ठहराते हुए उन पर भाजपा के साथ मिलीभगत का भी आरोप लगाया था। कुंभानी ने कहा कि वह गुजरात कांग्रेस अध्यक्ष शक्तिसिंह गोहिल और पार्टी के राजकोट लोकसभा उम्मीदवार परेश धनानी के प्रति सम्मान के कारण इतने दिनों तक चुप रहे। यह पूछे जाने पर कि क्या मौजूदा चुनाव में हुई घटना कांग्रेस से उनका बदला है।

कुंभानी ने सीधा जवाब देने से इनकार कर दिया। उन्होंने 2017 के राज्य चुनावों में टिकट रद्द करने के अपने आरोप को दोहराया। कुंभानी ने कहा- मैं ऐसा नहीं करना चाहता था लेकिन मेरे समर्थक और कार्यकर्ता परेशान थे क्योंकि पार्टी को सूरत में पांच स्वयंभू नेताओं द्वारा चलाया जा रहा है। वे ना तो काम करते हैं और ना ही दूसरों को काम करने देते हैं। AAP और कांग्रेस भारत का हिस्सा हैं। मैं जब यहां आप नेताओं के साथ प्रचार करता था तो इन नेताओं ने आपत्ति जताई थी।