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25 अक्तूबर, 2020|6:06|IST

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सुप्रीम कोर्ट ने रद्द किया गुजरात सरकार का आदेश, कंपनियों को देना होगा मजदूरों को ओवरटाइम का पैसा

supreme court

सुप्रीम कोर्ट ने गुजरात सरकार के एक नोटिफिकेशन को रद्द कर दिया है, जिसमें फैक्ट्रियों को छूट दी गई थी कि वे मजदूरों को ओवरटाइम मजदूरी का भुगतान किए बिना अतिरिक्त काम करा सकते हैं। सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में सुनवाई के बाद फैसला सुनाते हुए कहा कि कोरोना महामारी और लॉकडाउन के कारन बिगड़ी अर्थवयवस्था श्रमिकों को उचित मजदूरी का अधिकार प्रदान नहीं करने का कारण नहीं हो सकती है। इसके साथ ही सुप्रीम कोर्ट ने अप्रऐल से लेकर 19 अप्रैल से लेकर 20 जुलाई तक के ओवरटाइम का भुगतान करने का आदेश दिया है।

जस्टिस डी वाई चंद्रचूड़ की अध्यक्षता वाली एक पीठ ने कहा कि लॉकडाउन के दौरान श्रमिकों को अभूतपूर्व सामाजिक और आर्थिक चुनौतियों का सामना करना पड़ा। कानून का उपयोग जीवन के अधिकार के लिए और मजबूर श्रम के खिलाफ अधिकार के खिलाफ नहीं किया जा सकता है।

गुजरात सरकार ने 17 अप्रैल को एक अधिसूचना जारी की थी जो उद्योगों को लॉकडाउन अवधि के दौरान फैक्ट्री अधिनियम के तहत अनिवार्य कुछ शर्तों में छूट दी गई थी।

अधिसूचना में कहा गया है कि गुजरात में श्रमिकों से को 6 घंटे के अंतराल के बाद 30 मिनट के ब्रेक के साथ 12 घंटे काम कराया जा सता है। अधिसूचना में यह भी कहा गया कि ओवरटाइम काम के लिए सामान्य मजदूरी का भुगतान किया जा सकता है।

अधिसूचना फैक्ट्रीज अधिनियम की धारा 5 के तहत जारी की गई थी, जो सरकार को सार्वजनिक आपातकाल की स्थिति में फैक्ट्री अधिनियम के दायरे से कारखानों को छूट देने की अनुमति देती है। धारा 5 के अनुसार, सार्वजनिक आपातकाल का मतलब एक गंभीर आपातकाल है जो भारत की सुरक्षा को खतरे में डालता है चाहे युद्ध या बाहरी आक्रमण या आंतरिक गड़बड़ी हो।

अदालत ने कहा कि कोरोना महामारी का हवाला देते हुए सभी कारखानों को एक तरह की छूट प्रदान करने के लिए धारा 5 को लागू नहीं किया जा सकता है और महामारी को भारत की सुरक्षा को खतरे में डालने वाला सार्वजनिक आपातकाल नहीं माना जा सकता है।

गुजरात मजदूर सभा और ट्रेड यूनियन सेंटर ऑफ इंडिया द्वारा दायर याचिका में कहा, 'लगाए गए अधिसूचना में अधिनियम की धारा 51, 54, 55 और 56 से विभिन्न शर्तों पर छूट दी गई है, जो कि 20 अप्रैल से 19 जुलाई, 2020 तक की अवधि के लिए, गुजरात में श्रमिकों को एक दिन में 12 घंटे काम कराया जा सकता है।'

याचिका में दावा किया गया था, फैक्ट्रीज अधिनियम की धारा 5 के खिलाफ था जो केवल सार्वजनिक आपातकाल के मामलों में छूट का प्रावधान करता है और वह भी एक कारखाने के लिए। यह सभी कारखानों के लिए एक तरह की छूट के लिए प्रदान नहीं करता है।

अदालत ने आदेश दिया कि 20 अप्रैल से 19 जुलाई की अवधि के दौरान सभी श्रमिकों को ओवरटाइम मजदूरी का भुगतान किया जाना चाहिए।

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  • Web Title:SC quashes Gujarat govt notification exempting factories from payment of overtime wages fixed working hours