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Hindi News गुजरात10 महीने में खपाए 3.5 लाख, गुजरात के 'फर्जी' की कहानी जान हो जाएंगे हैरान; एक शक ने बिगाड़ा पूरा खेल

10 महीने में खपाए 3.5 लाख, गुजरात के 'फर्जी' की कहानी जान हो जाएंगे हैरान; एक शक ने बिगाड़ा पूरा खेल

गुजरात के सूरत में पुलिस ने 41 साल के एक शख्स को गिरफ्तार किया है। आरोपी 10 महीने में साढ़े तीन लाख रुपए के नकली नोट सब्जी मार्केट में खपा चुका है। वह पेशे से साड़ी प्रिंट करने वाला है।

10 महीने में खपाए 3.5 लाख, गुजरात के 'फर्जी' की कहानी जान हो जाएंगे हैरान; एक शक ने बिगाड़ा पूरा खेल
Sneha Baluniलाइव हिन्दुस्तान,सूरतTue, 18 Jun 2024 10:38 AM
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जल्दी पैसा कमाने का लालच अक्सर लोगों को गलत रास्तों पर ले जाता है। जिसका रास्ता उन्हें सलाखों के पीछे ले जाता है। ऐसा ही एक मामला गुजरात के सूरत में सामने आया है। जहां एक साड़ी पेंट करने वाले ने अपनी विशेषज्ञता का गलत इस्तेमाल किया। एक शक की वजह से उसका पूरा खेल बिगड़ गया। आरोपी ने पुलिस को पूछताछ में बताया कि वह पिछले 10 महीने में साढ़े तीन लाख रुपए के नकली नोट बाजार में खपा चुका है।

शक से खुली पोल

उधना पुलिस ने आरोपी की पहचान 41 साल के शिवानंद पाल के तौर पर की है। वह मूल रूप से उत्तर प्रदेश का रहने वाला है। आरोपी ने 10 महीने पहले ही पंदेसरा में रहना शुरू किया था। उसके पास से 259 नकली नोट बरामद हुए हैं। वह 10 महीने से सब्जी मंडी में नकली नोट खपा रहा था। लेकिन उसकी मुश्किलें तब बढ़ गईं जब एक टमाटर विक्रेता को उसकी लगातार असामान्य खरीदारी पर शक हुआ और उसने पुलिस को इसकी सूचना दे दी। उधना पुलिस स्टेशन के इंस्पेक्टर एसएन देसाई ने बताया कि वह 10 महीने में 3.5 लाख रुपए के नकली नोट सर्कुलेट कर चुका है।

पड़ोसी से सीखी तकनीक

जानकारी के अनुसार, आरोपी को पता चला कि उसका पड़ोसी सलमान नकली नोट छाप रहा है। शुरू में, उसने सलमान से तकनीक सीखी। चूंकि पाल पेशे से साड़ी प्रिंट करने वाला था, इसलिए उसे अपने रंग और स्याही के कौशल से असली नोटों से मिलते-जुलते एफआईसीएन बनाने में सफलता मिल गई। उसने अच्छी गुणवत्ता वाला कागज भी चुना जो 100 रुपये के नोट छापने में इस्तेमाल होने वाले कागज जैसा था। 

रोज 25 नोट लेकर मार्केट जाता

देसाई ने बताया, 'पाल को पता था कि सब्जी विक्रेता ज्यादातर 500 रुपये के नोटों की जांच करते हैं। इसलिए, उसने उनकी नजरों से बचने के लिए 100 रुपये के नोट छापे। उसका लक्ष्य रोजाना 2,250 रुपये कमाना था।' पाल हर रोज 25 नकली नोट लेकर सब्जी मंडी जाता और दुकानदारों से 10 रुपये की सब्जियां खरीदता था। बदले में उसे असली नोटों के रूप में 90 रुपये मिलते और यही उसका मुनाफा था। 

हर महीने मिलती थी 50 हजार की सैलरी

पुलिस ने बताया, 'पिछले 10 महीनों में उसने इस तरह से 3.5 लाख रुपये के नकली नोट खर्च किए हैं।' हालांकि, एक टमाटर विक्रेता को उसपर शक हुआ और उसने सोचा कि पाल हर रोजाना केवल 10 रुपये में टमाटर और दूसरी सब्जियां क्यों खरीदता है। शक के आधार पर उसने पुलिस को इसकी सूचना दी। पुलिस के अनुसार, पाल को साड़ी छपाई के काम से पहले से ही 50,000 रुपये हर महीने सैलरी मिल रही थी।