जाति जनगणना पर सियासत के बीच RSS का भेदभाव मिटाने का शंखनाद, होसबले की अपील

पीटीआई, वडोदरा
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बिहार में जाति जनगणना के आंकड़े सामने आने के बाद देश में बढ़ी सियासी सरगर्मी के बीच आरएसएस ने जातीय भेदभाव खत्म करने का शंखनाद कर दिया है। होसबले की स्वयं सेवकों से इस बारे में अपील की है।

जाति जनगणना पर सियासत के बीच RSS का भेदभाव मिटाने का शंखनाद, होसबले की अपील

एक तरफ बिहार में जातिगत जनगणना के आंकड़े सामने आने के बाद सियासत गर्म है, तो दूसरी ओर राष्ट्रीय स्वयं सेवक ने जातिगत भेदभाव खत्म करने का आह्वान किया है। आरएसएस के महासचिव दत्तात्रेय होसबले (Dattatreya Hosabale) ने गुरुवार को कहा कि किसी भी व्यक्ति को कहीं भी मंदिर में प्रवेश करने का अधिकार है। उन्होंने आरएसएस कार्यकर्ताओं से जातीय भेदभाव को खत्म करने के लिए काम करने की अपील की और देशवासियों में एकता की भावना पैदा करने की जरूरत पर जोर दिया।

दत्तात्रेय होसबले ने स्थानीय आरएसएस कार्यकर्ताओं की सभा को संबोधित करते हुए कहा कि जब भारतीय एथलीटों ने एशियाई खेलों में अच्छा प्रदर्शन किया तो किसी ने उनकी जाति या धर्म के बारे में नहीं पूछा। कोरोना महामारी के चलते लॉकडाउन के दौरान लोगों ने बिना जाति या धर्म पूछे प्रवासी मजदूरों की मदद की। इसी तरह लोगों ने चंद्रयान-3 मिशन की सफलता के पीछे वैज्ञानिकों की जाति और धर्म के बारे में नहीं पूछा। इससे पता चलता है कि हमारा देश चाहे संकट में हो या सफलता में, एकजुट रहता है। 

होसबले ने कहा-केवल संकट या सफलता के दौरान नहीं, हम सभी में एकता और सहयोग की भावना हर समय होनी चाहिए। भारत दुनिया को (अतीत में) केवल इसलिए कुछ दे सका क्योंकि हम अपनी एकता बरकरार रखने में सक्षम थे। उन्होंने किसी का नाम लिए बिना कहा कि कुछ लोग सनातन धर्म को नष्ट करने की धमकी दे रहे हैं। ये लोग हिंदुओं के बारे में बात करने पर आरएसएस पर सांप्रदायिक होने का आरोप लगा रहे हैं। सनातन धर्म अनुष्ठानों और पूजा के तरीकों के बारे में नहीं है, यह इंसान में भगवान को देखने, अच्छे आचरण और समाज के कल्याण के बारे में है।

होसबले ने कहा- जिस तरह भारत और उसके लोगों ने यहूदी, पारसी, दलाई लामा और उनके अनुयायियों को आश्रय दिया। वह 'वसुधैव कुटुंबकम' के सिद्धांत को प्रदर्शित करता है। कोरोना के समय में हमने दुनिया के लिए टीके बनाए। हमने श्रीलंका को उसके आर्थिक संकट के दौरान मदद की। यह प्रदर्शित करता है कि भारत के पास वसुधैव कुटुंबकम के बारे में बात करने का नैतिक अधिकार है। हिंदू समाज और देशवासियों के पास भारत को 'विश्वगुरु' बनाने की शक्ति है। एक दिन, भारत फिर दुनिया को रास्ता दिखाएगा।

Krishna Bihari Singh

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कृष्ण बिहारी सिंह वरिष्ठ पत्रकार और स्टेट टीम का हिस्सा (दिल्ली-NCR, उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, झारखंड, राजस्थान और गुजरात )


संक्षिप्त विवरण

कृष्ण बिहारी सिंह पिछले 15 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय हैं। कृष्ण बिहारी सिंह लाइव हिन्दुस्तान में कार्यरत हैं। वह स्टेट टीम के साथ काम कर रहे हैं। कृष्ण बिहारी सिंह भारतीय मीडिया जगत में केबी उपनाम से चर्चित हैं। यूपी के मऊ जिले से ताल्लुक रखने वाले केबी महाराष्ट्र और हरियाणा में पत्रकारिता कर चुके हैं। मौजूदा वक्त में वह दिल्ली-एनसीआर में सक्रिय हैं।


विस्तृत बायो

परिचय और अनुभव: कृष्ण बिहारी सिंह लोकमत, आज समाज, राष्ट्रीय सहारा, अमर उजाला और दैनिक जागरण अखबार में विभिन्न पदों पर काम कर चुके हैं। उन्होंने साल 2019 में जागरण डॉट कॉम से डिजिटल मीडिया में कदम रखा। कृष्ण बिहारी सिंह मौजूदा वक्त में भारत के प्रसिद्ध समाचार संस्थान 'लाइव हिन्दुस्तान' (हिन्दुस्तान टाइम्स ग्रुप) की स्टेट टीम में डिप्टी चीफ एडिटर (कंटेंट क्रिएटर) के रूप में अपनी सेवाएं दे रहे हैं।

शैक्षणिक पृष्ठभूमि: लॉ (एलएलबी) और साइंस (बी.एससी, बायोलॉजी) से ग्रेजुएट कृष्ण बिहारी सिंह ने महात्मा गांधी अंतरराष्ट्रीय हिंदी विश्वविद्यालय से मास कम्युनिकेशन में एमए और एमफिल किया है। कृष्ण बिहारी सिंह भारतीय राजनीति और वैश्विक मामलों के साथ विधि विषय की गहरी समझ रखते हैं। अखबार से लेकर टेलीविजन और अब डिजिटल मीडिया के बदलावों के साक्षी रहे कृष्ण बिहारी सिंह पाठकों की पसंद और बदलते ट्रेंड को बारीकी से समझते हैं।

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पत्रकारिता का उद्देश्य: कृष्ण बिहारी सिंह 'राष्ट्र प्रथम' की भावना के साथ काम करते हैं। केबी का मानना है कि एक पत्रकार की पहली जिम्मेदारी उसका राष्ट्र और लोक कल्याण है। केबी खबरों को पहले प्रमाणिकता की कसौटी पर कसते हैं, फिर आम जनमानस की भाषा में उसे परोसने का काम करते हैं। केबी का मानना है कि रिपोर्टिंग का उद्देश्य पाठकों को न केवल सूचना देना वरन उन्हें सही और असल जानकारी देना है।

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