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मोरबी पुल हादसे में ओरेवा ग्रुप को पीड़ितों को आजीवन पेंशन और नौकरी देने के आदेश

गुजरात हाईकोर्ट ने मोरबी पुल हादसा मामले में ओरेवा ग्रुप को बेटों को खो चुके बुजुर्गों को आजीवन पेंशन और विधवाओं को नौकरी देने को कहा है। जानें हाईकोर्ट ने अपने आदेश में क्या कहा...

मोरबी पुल हादसे में ओरेवा ग्रुप को पीड़ितों को आजीवन पेंशन और नौकरी देने के आदेश
Krishna Singhभाषा,अहमदाबादSun, 10 Dec 2023 12:43 AM
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गुजरात हाईकोर्ट (Gujarat High Court) ने मोरबी पुल का संचालन एवं रखरखाव की जिम्मेदार कंपनी ओरेवा ग्रुप के खिलाफ कड़ा आदेश जारी किया है। अदालत ने कहा कि इस 'सस्पेंशन ब्रिज' के टूटने की घटना में अपने बेटों को खो चुके बुजुर्गों को आजीवन पेंशन और विधवाओं को नौकरी या वजीफा देने को कहा है। अदालत ने कहा कि हादसे में जान गंवाने वाले लोगों के परिजनों को एकमुश्त मुआवजे से उन्हें पर्याप्त मदद नहीं मिलेगी।

मुख्य न्यायाधीश सुनील अग्रवाल और न्यायमूर्ति अनिरुद्ध मेयी की पीठ 30 अक्टूबर 2022 को हुए इस हादसे के संबंध में दायर स्वत: संज्ञान वाली एक जनहित याचिका पर सुनवाई कर रही है। इस हादसे में 135 लोगों की मौत हो गई थी। सरकार के मुताबिक, घटना में 10 महिलाएं विधवा हो गईं और सात बच्चे अनाथ हो गए।

मुख्य न्यायाधीश ने कंपनी से कहा- विधवाओं को नौकरी दी जाए। यदि वह नौकरी नहीं चाहती हैं तो उन्हें वजीफा दिया जाए। आपको आजीवन उनकी मदद करनी होगी। वे काम करने की स्थिति में नहीं हैं। ऐसी भी महिलाएं हैं जिन्होंने कभी काम नहीं किया। ये महिलाएं अपने घरों से कभी बाहर नहीं निकली होंगी। आप उनसे अपने घरों से बाहर निकलने और कहीं और जाकर काम करने की उम्मीद कैसे कर सकते हैं। 

कंपनी ने दावा किया कि वह पीड़ित अनाथ बच्चों और विधवाओं का खयाल रख रही है। हाईकोर्ट ने यह जानना चाहा कि कंपनी बुजुर्गों के लिए क्या कर रही है, जिन्होंने अपने बेटों को खो दिया, जिन पर वे आश्रित थे। बुजुर्ग पुरुष अपने बेटों की आय पर आश्रित थे। उन्हें आजीवन पेंशन दीजिए। एकमुश्त मुआवजा से उन्हें मदद नहीं मिलने जा रही है। कृपया इसे ध्यान रखें। कंपनी को पीड़ितों पर लगातार खर्च करना होगा।

अदालत ने यह भी कहा कि प्रभावित लोगों को मुआवजे के वितरण के लिए विश्वास कायम किया जाए क्योंकि वर्षों तक प्रक्रिया की निगरानी करना अदालत के लिए संभव नहीं हो सकता है। पीठ ने सरकार से इस बारे में कुछ सुझाव देने को भी कहा कि पीड़ितों के परिजनों की क्या जरूरतें पूरी की जा सकती हैं। कोर्ट ने मोरबी कलेक्टर को कंपनी के साथ समन्वय करने और पीड़ितों के परिजनों की वित्तीय हालत एवं उन्हें जरूरी सहयोग के बारे में एक रिपोर्ट सौंपने को कहा है।

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