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गुजरात में जिंदा मिला 17 साल पहले 'मरा' हुआ आदमी, 80 लाख के लिए रची थी अपनी ही मौत की साजिश

बीमा पॉलिसी और कार खरीदने के बाद अनिल, उसके पिता और भाइयों ने एक भिखारी को भोजन का लालच दिया और उसे एक होटल में ले गए। वहां उसके खाने में आरोपियों ने नशीला पदार्थ मिला दिया।

गुजरात में जिंदा मिला 17 साल पहले 'मरा' हुआ आदमी, 80 लाख के लिए रची थी अपनी ही मौत की साजिश
Devesh Mishraपीटीआई,अहमदाबादWed, 08 Nov 2023 08:21 PM
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गुजरात में एक ऐसा शख्स मिला है जो 17 साल पहले 'मर' गया था। जी हां... सरकारी कागजों और दुनिया की नजरों में तो शख्स की एक सड़क हादसे में मौत हो गई थी लेकिन वो एक नई पहचान के साथ अहमदाबाद में रह रहा था। दरअसल, उत्तर प्रदेश का रहने वाला अनिल सिंह चौधरी अपने परिवार के लोगों के साथ मिलकर 17 साल पहले एक भिखारी की हत्या कर दिया था। उसके परिजन भिखारी की हत्या को अनिल की मौत बताकर 80 लाख रुपए की बीमा राशि का दावा कर दिए। तब से लेकर आजतक अनिल मौत का नाटक खेल रहा था। अब पूरी क्राइम कुंडली सामने आई है।

पुलिस से मिली जानकारी के मुताबिक, अनिल उत्तर प्रदेश के गौतम बुद्ध नगर जिले के भट्टा-पारसौल गांव का निवासी है। पुलिस ने उसे अहमदाबाद के निकोल इलाके से गिरफ्तार किया है। 31 जुलाई साल 2006 में यूपी के रकाबगंज पुलिस स्टेशन में एक मौत की रिपोर्ट दर्ज की गई थी। एक शख्स की कार चलाते समय सड़क हादसे में जान चली गई। अनिल के पिता ने पुलिस से बताया कि मरा हुआ शख्स उनका बेटा है। इस घटना के 17 साल बाद अहमदाबाद अपराध शाखा को अपने स्रोतों से पता चला कि अनिल अभी भी जिंदा है। वो अपना नाम राजकुमार चौधरी रखकर निकोल इलाके में रह रहा है।

और रच डाली साजिश
गिरफ्तारी के बाद अनिल ने स्वीकार किया कि उसने और उसके पिता ने उसकी मौत का नाटक करके दुर्घटना बीमा राशि हड़पने की योजना बनाई थी। पुलिस ने बताया कि अनिल ने साल 2004 में एक दुर्घटना मृत्यु बीमा पॉलिसी ली और फिर एक कार खरीदी।

भिखारी को उतारा मौत के घाट
बीमा पॉलिसी और कार खरीदने के बाद अनिल, उसके पिता और भाइयों ने एक भिखारी को भोजन का लालच दिया और उसे एक होटल में ले गए। वहां उसके खाने में आरोपियों ने नशीला पदार्थ मिला दिया। बेहोश भिखारी को आरोपियों ने कार में रख दिया और वाहन को एक बिजली के खंभे से लड़ा दिया। इसके बाद आरोपियों ने कार में आग लगा दी। आग में जलकर भिखारी की मौत हो गई। 

पिता ने गांव में किया अंतिम संस्कार
अनिल के पिता विजयपाल सिंह ने भिखारी के शव की पहचान अपने बेटे के रूप में की। हैरानी की बात तो यह है कि विजयपाल ने उस शव का अपने गांव में अंतिम संस्कार भी किया। दुनिया और कानून की नजरों में उसका बेटा अनिल अब मर चुका था। इसके बाद विजयपाल ने अपने बेटे की दुर्घटना मृत्यु बीमा में 80 लाख रुपए का दावा किया। बीमा कंपनी से उन्हें यह पैसा मिल गया जो परिवार के सभी लोग आपस में बांट लिए।

17 साल से गुजरात में ठिकाना
पुलिस ने बताया कि बीमा कंपनी से पैसा मिलने के बाद अनिल साल 2006 में अहमदाबाद चला आया। वो अपना नाम बदलकर तबसे यहीं पर रह रहा है। इस दौरान एक भी बार वो अपने परिवार वालों के पास नहीं गया और न ही उसने कभी फोन पर उनसे बात की। नए नाम के साथ उसने अपना आधार कार्ड और ड्राइविंग लाइसेंस भी बनवा लिया। रोजी-रोटी के लिए उसने एक ऑटो-रिक्शा खरीदा और फिर एक कार भी खरीदी। पुलिस ने उसे पकड़ लिया है और अब आगे की कार्रवाई के लिए उसे उत्तर प्रदेश पुलिस को सौंप दिया जाएगा। 

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