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Hindi News गुजरातक्लास से पहले आ गई MBBS की डिग्री, NEET-UG विवाद के बीच बड़ा खुलासा

क्लास से पहले आ गई MBBS की डिग्री, NEET-UG विवाद के बीच बड़ा खुलासा

एमबीबीएस में नामांकन को लेकर नीट-यूजी के चल रहे विवाद के बीच अहमदाबाद से एक और चौंकाने वाली खबर सामने आई है। यहां के एक आदमी ने यूपी के एक फर्जी संस्था के चक्कर में फंसकर 16 लाख रुपये गंवा दिए।

क्लास से पहले आ गई MBBS की डिग्री, NEET-UG विवाद के बीच बड़ा खुलासा
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Subodh Mishraलाइव हिन्दुस्तान,अहमदाबादWed, 19 Jun 2024 01:30 PM
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एमबीबीएस में नामांकन को लेकर नीट-यूजी के चल रहे विवाद के बीच अहमदाबाद से एक और चौंकाने वाली खबर सामने आई है। यहां के एक आदमी ने सोशल मीडिया के जरिए उत्तर प्रदेश के एक फर्जी संस्था के चक्कर में फंसकर अपने 16 लाख रुपये गंवा दिए।

गुजरात के मेहसाणा के रहने वाले एक युवक ने सोशल मीडिया पर उत्तर प्रदेश में एमबीबीएस की डिग्री प्रदान करने वाली एक संस्थान के बारे में पढ़ा। उसमें लिखा था कि संस्थान ऑल इंडिया अल्टरनेटिव मेडिकल काउंसिल के तहत एमबीबीएस की डिग्री पदान करती है। चूंकि उसे एमबीबीएस करनी करनी थी, इसलिए उसने दिए गए नंबर पर संपर्क किया। उसे बताया गया कि कोर्स पांच में पूरी होगी। उसने पैसे जमा कराकर एडमिशन ले ली। वह क्लास शुरू होने का इंतजार कर रहा था, इतने में कुरियर से उसकी एमबीबीएस की डिग्री ही आ गई। जब उसे अहसास हुआ कि उसके साथ धोखाधड़ी हुआ है, तो उसने पुलिस की शरण ली।

गुजरात के मेहसाणा के रहने वाले सुरेश पटेल ने बताया कि उसने इंटरनेट पर उत्तर प्रदेश के एक संस्थान के बारे में पढ़ा जो पांच साल में एमबीबीएस की डिग्री देने का दावा कर रही थी। संस्थान ने संपर्क करने के लिए डॉक्टर प्रेम कुमार राजपूत नाम के व्यक्ति का नंबर दिया था। जब उसने डॉक्टर राजपूत से बात की तो उसे बताया गया कि उसकी 12वीं के सर्टिफिकेट पर उसे एडमिशन मिल जाएगी।

उसे बताया गया कि कोर्स पांच साल में पूरा होगा। इस दौरान इंटर्नशिप भी कराया गया जाएगा। बताया गया कि डॉक्टर शौकत खान, डॉक्टर आनंद कुमार और डॉक्टर अरुण कुमार एमबीबीएम कराने में उसकी मदद करेंगे। इसके बाद उसने 50 हजार रुपये जमा कराए तो कुछ दिन बाद उसके पास बुंदेलखंड यूनिवर्सिटी से एडमिशन लेटर आ गया। उसने बताया कि डॉक्टर राजपूत से उसकी 25 बार बात हुई। एडमिशन लेटर मिलने के बाद छह महीने के भीतर उससे कुल 16.32 लाख रुपये जमा करवाए गए।

वह क्लास शुरू होने का इंतजार करने लगा। इस बीच एक दिन उसके नाम से एक कुरियर आया। जब उसने कुरियर खोलकर देखा तो उसमें एमबीबीएस की मार्कशीट, इंटर्नशिप की ट्रेनिंग सर्टिफिकेट, रजिस्ट्रेशन सर्टिफिकेट पाया। सभी पर मेडिकल काउंसिल ऑफ इंडिया की मुहर लगी थी। जब उसने पता किया तो ये सारे सर्टिफिकेट जाली निकले। उसके बाद उसने मेहसाणा थाने में रिपोर्ट दर्ज कराई।

मेहसाणा पुलिस की टीम उसे साथ लेकर दिल्ली में बताए गए डॉक्टर आनंद कुमार के ठिकाने पर पहुंची। वहां न तो इस नाम का कोई डॉक्टर था और न ही कोई संस्थान। फिर उसे पुलिस उस बैंक के ब्रांच में लेकर गई जिसके अकाउंट में उसने पैसे जमा कराए थे। वहां पता चला कि कई और लोगों से भी इस तरह का फर्जीवाड़ा किया गया है। पुलिस इस मामले की जांच कर रही है। हालांकि अभी आरोपियों तक वह नहीं पहुंच पाई है।