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हिंदी न्यूज़ गुजरातपहले फेज में महज 60% वोटिंग, गुजरात में वोटर्स की सुस्ती से किसे फायदा, किसे टेंशन?

पहले फेज में महज 60% वोटिंग, गुजरात में वोटर्स की सुस्ती से किसे फायदा, किसे टेंशन?

गुजरात में पहले फेज की वोटिंग खत्म हो गई है। 89 सीटों पर गुरुवार को मतदाताओं ने 788 प्रत्याशियों की किस्मत का फैसला ईवीएम में कैद कर दिया है। पहले फेज में शाम 5 बजे तक कुल 57 फीसदी वोटिंग हुई है।

पहले फेज में महज 60% वोटिंग, गुजरात में वोटर्स की सुस्ती से किसे फायदा, किसे टेंशन?
Sudhir Jhaलाइव हिन्दुस्तान,गांधीनगरThu, 01 Dec 2022 08:35 PM

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गुजरात में पहले फेज की वोटिंग खत्म हो गई है। 89 सीटों पर गुरुवार को मतदाताओं ने 788 प्रत्याशियों की किस्मत का फैसला ईवीएम में कैद कर दिया है। पहले फेज में शाम 5 बजे तक कुल 60.20% फीसदी वोटिंग हुई है, जोकि 2017 विधानसभा चुनाव के मुकाबले बेहद कम है। पिछले चुनाव में पहले फेज में 68 फीसदी वोटिंग हुई थी। राजनीतिक जानकार अब कम मतदान के मायने तलाशने में जुट गए हैं। 

वोटिंग सुबह 8 बजे शुरू हुई थी और 5 बजे समाप्त हुई। वोटिंग फीसदी में अभी इजाफे की उम्मीद है। जो मतदाता बूथ पर निर्धारित समय तक पहुंच चुके होते हैं उन सभी के मतदान तक प्रक्रिया जारी रहती है। छिटपुट घटनाओं को छोड़कर चुनाव शांतिपूर्वक संपन्न हुआ। पहले फेज में दक्षिण गुजरात, सौराष्ट्र और कच्छ क्षेत्र के मतदाताओं ने अपने मताधिकार का इस्तेमाल किया है। 

राज्य में पहले चरण में कच्छ की (06), सुरेंद्रनगर की (05), मोरबी (03),  राजकोट (08), जामनगर (05), देवभूमि द्वारका (02), पोरबंदर (02), जूनागढ़  (05), गिर सोमनाथ (04), अमरेली (05), भावनगर (07), बोटाद (02) , नर्मदा  (02) , भरूच (05), सूरत (16) , तापी (02), डांग (01), नवसारी (04) और वलसाड  की (05) सीटों के लिए मतदान हुआ। 

कम वोटिंग के क्या हैं मायने?
आमतौर पर माना जाता है कि किसी चुनाव में कम मतदान से सत्ताधारी दल को फायदा होता है। राजनीतिक जानकारों का कहना है कि कई बार वोटर्स जब सरकार के कामकाज से संंतुष्ट होते हैं या वह परिवर्तन के पक्ष में नहीं होते हैं तो कम मतदाता बूथ तक जाते हैं। वहीं, वोटिंग फीसदी में इजाफे को परिवर्तन के संकेत के रूप में देखा जाता है। हालांकि, पक्के तौर पर कुछ नहीं कहा जा सकता है। गुजरात में हुई कम वोटिंग किसके पक्ष में जाएगी और किसे इसका नुकसान उठाना पड़ेगा यह तो 8 दिसंबर को मतगणना के बाद ही साफ हो पाएगा।

रिकॉर्ड सातवीं जीत और परिवर्तन की कोशिश
भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) 27 सालों से जारी शासन को कायम रखने की कोशिश में जुटी है तो कांग्रेस ने गांव-गांव जाकर अपने लिए तीन दशक का सूखा खत्म करने की अपील की है। वहीं, इस बार अरविंद केजरीवाल की अगुआई में आम आदमी पार्टी ने भी सभी सीटों पर उम्मीदवार उतारे हैं और परिवर्तन का दावा किया है। दूसरे चरण की वोटिंग 5 दिसंबर को होगी और परिणाम 8 दिसंबर को सामने आएंगे। 182 सदस्यीय विधानसभा में बहुमत के लिए 92 सीटों की आवश्यकता है। 2017 में भाजपा ने 99 और कांग्रेस ने 77 सीटों पर कब्जा किया था।