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Hindi News गुजरात कैंसर मरीज ने डॉक्टर और लैब पर लगाया था झूठा आरोप, कंज्यूमर कोर्ट ने लगाया जुर्माना

कैंसर मरीज ने डॉक्टर और लैब पर लगाया था झूठा आरोप, कंज्यूमर कोर्ट ने लगाया जुर्माना

गुजरात के नवसारी जिले की एक कंज्यूमर कोर्ट ने एक याचिका खारिज करते हुए याचिकाकर्ता पर जुर्माना लगाया है। दरअसल इस याचिकाकर्ता ने मुंह के कैंसर के लिए इलाज करने वाले एक डॉक्टर और पैथोलॉजी लैब के खिलाफ...

 कैंसर मरीज ने डॉक्टर और लैब पर लगाया था झूठा आरोप, कंज्यूमर कोर्ट ने लगाया जुर्माना
एजेंसी ,नवसारी Sat, 09 Jan 2021 05:18 PM
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गुजरात के नवसारी जिले की एक कंज्यूमर कोर्ट ने एक याचिका खारिज करते हुए याचिकाकर्ता पर जुर्माना लगाया है। दरअसल इस याचिकाकर्ता ने मुंह के कैंसर के लिए इलाज करने वाले एक डॉक्टर और पैथोलॉजी लैब के खिलाफ झूठा आरोप लगाया था।

सूरत जिले के मांडवी शहर के रहने वाले 37 साल के शिकायतकर्ता राकेश त्रिवेदी को पूजा लैब को झूठे मामले में घसीटने और उसकी प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंचाने पर नवसारी उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग ने 20,000 रुपए देने का आदेश दिया है। साथ ही कोर्ट ने त्रिवेदी के उस दावे को भी खारिज कर दिया, जिसमें उसने कहा था कि सर्जरी और अस्पताल में भर्ती होने के लिए यश सुपर स्पेशलिटी अस्पताल के मालिक और डॉक्टर परिमल लाड ने उससे अधिक फीस ली थी। 

त्रिवेदी ने जून 2016 में अपनी जीभ पर सूजन के चलते डॉक्टर लाड से संपर्क किया था। डॉक्टर ने उसकी जीभ से एक सैंपल लेकर पूजा लैब में बायोप्सी के लिए भेजा। बायोप्सी में त्रिवेदी की बीमारी के बारे में पता चला। इसके बाद डॉक्टर लाड ने तत्काल सर्जरी की सलाह दी, लेकिन त्रिवेदी को सर्जरी के पैसे की व्यवस्था के लिए समय चाहिए था। हालांकि डॉक्टर लाड ने त्रिवेदी को बाद में पैसे देने के लिए कहा और उन्हें सर्जरी और अस्पताल में भर्ती होने के लिए खर्च बताया। 

इलाज का खर्च बताने के बाद त्रिवेदी इससे सहमत हो गए और अस्पताल में भर्ती हो गए, जहां बाद में उनकी सर्जरी की गई। डिस्चार्ज के समय अस्पताल ने इलाज के लिए 1.14 लाख रुपए का बिल दिया और दवाइयों के लिए उनसे 18,795 रुपए लिए। 

राकेश त्रिवेदी ने दावा किया कि, उनसे ज्यादा ओवरचार्ज किया गया और आरोप लगाया कि उन्होंने अपनी जीभ पर सर्जरी के लिए सहमति दी थी, लेकिन डॉक्टर ने उनकी गर्दन के एक हिस्से को भी हटा दिया। इसके बाद उन्होंने फिर कंज्यूमर कोर्ट का दरवाजा खटखटाया और दावा किया कि सर्जरी के बाद उनके दाहिने हाथ पर स्थायी विकलांगता हो गई है। 

त्रिवेदी ने ये भी दावा किया कि बायोप्सी के लिए 1,000 रुपए देने के बाद भी पूजा लैब ने उन्हें रिपोर्ट नहीं दी, जिसपर उन्होंने लैब के मालिक डॉक्टर नारायणी भट्ट को मामले में पार्टी बना दिया। त्रिवेदी ने अस्पताल से चिकित्सा लापरवाही का दावा करते हुए 3 लाख रुपए और स्थायी विकलांगता के लिए 1 लाख रुपए की मांग की थी. साथ ही पूजा लैब से बायोप्सी रिपोर्ट नहीं देने के लिए 25,000 रुपए की मांग की थी।

वहीं कोर्ट में डॉक्टर के वकील ने तर्क देते हुए कहा कि, त्रिवेदी के जीवन को बचाने के लिए ही डॉक्टर ने गर्दन से कैंसर वाले हिस्से को हटा दिया गया था। अगर ऐसा न किया जाता तो मरीज़ की जान को खतरा बना रहता।