फोटो गैलरी

अगला लेख

अगली खबर पढ़ने के लिए यहाँ टैप करें

Hindi News गुजरातगुजरात हाईकोर्ट में अनोखा मामला, मां ने अपहृत बच्चों के लिए लगाई याचिका, मांगी बेटी, गाय, भैंस और मुर्गियों की कस्टडी

गुजरात हाईकोर्ट में अनोखा मामला, मां ने अपहृत बच्चों के लिए लगाई याचिका, मांगी बेटी, गाय, भैंस और मुर्गियों की कस्टडी

वकील ने कोर्ट से कहा कि महिला अपने मवेशियों से भी बच्चों जैसा प्यार करती है, इसलिए उनकी कस्टडी भी उसे दी जानी चाहिए। हालांकि जानवरों के लिए हेबियस कॉर्पस लगाने को लेकर अदालत भी उलझन में थी।

गुजरात हाईकोर्ट में अनोखा मामला, मां ने अपहृत बच्चों के लिए लगाई याचिका, मांगी बेटी, गाय, भैंस और मुर्गियों की कस्टडी
Sourabh Jainलाइव हिन्दुस्तान,अहमदाबादThu, 18 Apr 2024 04:04 PM
ऐप पर पढ़ें

गुजरात में सामने आए एक अजीबोगरीब मामले में एक महिला ने गुजरात हाईकोर्ट में बंदी प्रत्यक्षीकरण की याचिका लगाते हुए अपनी अपहृत बेटी के साथ-साथ अपने चुराए गए मवेशियों की कस्टडी भी मांगी। इस याचिका को देखकर हाईकोर्ट के जज भी हैरान रह गए। वे इस बात को लेकर भ्रमित दिखे कि जानवरों के लिए हेबियस कॉर्पस (बंदी प्रत्यक्षीकरण) लगाया जा सकता है या नहीं। जिसके बाद उन्होंने वकील से याचिका में संशोधन करने के लिए कहा।

यह याचिका सूरत की एक महिला ने दायर की है, जिसमें उसने अपने चोरी गए पशु-पक्षियों को भी अपने बच्चों की तरह बताया है। ऑनलाइन सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता के वकील एबी पंड्या ने अदालत को बताया कि दो साल पहले महिला की बेटी का अपहरण हुआ था, और गुंडों ने उसकी झोपड़ी को जला दिया था साथ ही उसकी गायों, भैंसों और मुर्गियों को भी ले गए थे।

दो FIR के बाद भी कार्रवाई नहीं हुई

वकील के मुताबिक, 'महिला ने इस बारे में अगस्त 2022 और फरवरी 2023 में दो FIR दर्ज करवाई थीं, लेकिन पुलिस ने उसकी बेटी और मवेशियों को वापस लाने के लिए कुछ नहीं किया।' याचिका में दावा करते हुए बताया गया कि यह करतूत दो भूमाफियाओं की थी, जिनके इशारे पर नगर निगम ने बाद में उसकी झोपड़ी को तोड़ दिया और उसके रहने की जगह से उसे हटा दिया।

महिला के लिए मवेशी बच्चों जैसे

इस केस की सुनवाई के दौरान जस्टिस एवाय कोग्जे और जस्टिस एसजे दवे की पीठ ने महिला के वकील से याचिका में मवेशियों की सुरक्षित कस्टडी सुनिश्चित करने के संबंध में की गई प्रार्थना के बारे में सवाल किया। जवाब में पंड्या ने बताया कि उनकी मुवक्किल इन मवेशियों और पक्षियों के लिए मां की तरह हैं, और इसलिए उनकी कस्टडी उन्हें दी जानी चाहिए। 

कोर्ट ने वकील से पूछा सवाल

न्यायमूर्ति कोग्जे ने जब महिला के वकील से पूछा कि हाईकोर्ट इस मामले में बंदी प्रत्यक्षीकरण क्षेत्राधिकार के तहत कैसे अपनी शक्ति का प्रयोग कर सकता है? इसका जवाब देते हुए वकील ने बताया कि महिला अपने मवेशियों और पक्षियों से भी अपने बच्चों जैसा प्यार करती है, ऐसे में यह उनकी मां है और वे इसके लिए इंसान की तरह हैं। 

हालांकि महिला के वकील की इस दलील से जज संतुष्ट नहीं दिखे, इसके बाद दोनों जजों ने वकील से याचिका में लिखी जानवरों और पक्षियों की कस्टडी की बात को हटाने के लिए कहा। इसकी वजह बताते हुए उन्होंने कहा, 'हम आश्वस्त नहीं हैं कि हम जानवरों और पक्षियों के लिए बंदी प्रत्यक्षीकरण क्षेत्राधिकार लागू कर सकते हैं।' इस मामले में अगली सुनवाई 19 अप्रैल को होगी। 

हिन्दुस्तान का वॉट्सऐप चैनल फॉलो करें