
गजनवी की लूट से पटेल के संकल्प तक… कहानी सोमनाथ की, आज भी है अटूट आस्था का प्रतीक
महमूद गजनवी द्वारा सोमनाथ मंदिर पर किए गए हमले के 1000 साल पूरे होने पर देशभर में 'सोमनाथ स्वाभिमान पर्व' मनाया जा रहा है, जिसमें 11 जनवरी को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी शामिल होंगे।
आज का दिन इतिहास की किताबों में एक काले अध्याय की तरह दर्ज है। ठीक 1000 साल पहले, जनवरी 1026 में महमूद गजनवी की सेना ने सोमनाथ मंदिर पर धावा बोला था। लूट, तोड़फोड़ और क्रूरता की वो घटना, जो भारतीय सभ्यता पर गहरा आघात थी। लेकिन आज देशभर में 'सोमनाथ स्वाभिमान पर्व' मनाया जा रहा है, जो ये बताता है कि हमारी आस्था कितनी मजबूत है। ये पर्व साल भर चलेगा,इसकी शुरुआत 8 से 11 जनवरी तक खास कार्यक्रमों से हो रही है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी 11 जनवरी को सोमनाथ जाएंगे। उन्होंने सोमनाथ मंदिर से जुड़ी कुछ तस्वीरें और यादें भी शेयर की हैं।
बेहद खास है सोमनाथ मंदिर की कहानी
अरब सागर के किनारे बना हुआ आज का खूबसूरत सोमनाथ मंदिर एक ऐसी आस्था का गवाह है, जो कभी डगमगाई नहीं। सोमनाथ मंदिर 12 ज्योतिर्लिंगों में सबसे पहला माना जाता है। पुराणों में कथा है कि चंद्रमा ने यहां तपस्या कर श्राप से मुक्ति पाई, इसलिए नाम पड़ा सोमनाथ – सोम (चंद्र) का नाथ (स्वामी)। प्राचीन काल में ये मंदिर चालुक्य शैली में बना था, जहां की पहचान विशाल शिवलिंग, रत्न जड़ित दीवारें, सोने-चांदी की घंटियां और हजारों गांवों से आने वाला दान था। रोज हजारों लोग दर्शन को आते। ये सिर्फ मंदिर नहीं, भारत की दौलत और हौसले का प्रतीक था।

1026 की वो काली सुबह, जब लुटेरा गजनवी आया
महमूद 30 हजार घुड़सवारों के साथ 18 अक्टूबर 1025 को गजनी से निकला। रेगिस्तान पार कर, स्थानीय राजाओं को हराते हुए जनवरी 1026 में सोमनाथ पहुंचा। 6 जनवरी को किला घेरा, 7 को भयंकर हमला और 8 तक मंदिर पर कब्जा कर लिया। मंदिर की रक्षा करते-करते हजारों पुजारी और भक्तों ने जान दे दी। लेकिन क्रूर महमूद की सेना ने शिवलिंग तोड़ा और मंदिर लूट लिया। कहा जाता है कि मंदिर की रक्षा के लिए 50 हजार से ज्यादा निहत्थे और समर्पित भक्तों ने अपने प्राणों की आहुति दे दी थी, लेकिन वे मंदिर के गर्भगृह को अपवित्र होने से नहीं बचा सके।
इतिहासकारों के अनुसार, गजनवी यहां से 20 मिलियन (2 करोड़) दीनार की संपत्ति लूटकर ले गया था। सोने-चांदी के बर्तन, बेशकीमती रत्न और मंदिर के भारी किवाड़ तक उखाड़ लिए गए थे। गजनवी ने न केवल धन लूटा, बल्कि आस्था पर चोट करने के लिए मुख्य ज्योतिर्लिंग को अपने गदा से खंडित कर दिया था। इतना ही नहीं वो मंदिर के टुकड़े भी अपने साथ ले गया और उन्हें मस्जिदों में लगाया, ताकि पैरों तले कुचले जाएं।
गजनवी ने क्यों बनाया सोमनाथ को निशाना?
उस समय सोमनाथ मंदिर केवल एक मंदिर नहीं, बल्कि एक आर्थिक और सांस्कृतिक केंद्र था। कई विदेशी यात्रियों के वृत्तांत बताते हैं कि सोमनाथ का मुख्य शिवलिंग चुंबकों की सहायता से हवा में अधर (झूलता हुआ) टिका था, जिसे देखकर गजनवी और उसके इंजीनियर दंग रह गए थे। इसके अलावा मंदिर की व्यवस्था के लिए 10,000 गांव दान में मिले थे। मंदिर के गर्भगृह में सोने की जंजीरें और रत्न जड़ित 56 खंभे थे। इसे 'शाश्वत तीर्थ' माना जाता है, क्योंकि कहा जाता है कि इसे पहले चंद्रमा ने सोने से, रावण ने चांदी से और श्री कृष्ण ने चन्दन की लकड़ी से बनवाया था।

टूटा बार-बार, उठा बार-बार
गजनवी के जाने के बाद राजा भोज और अनहिलवाड़ा के राजा भीमदेव ने मंदिर का पुनर्निर्माण कराया। गजनवी के हमले के बाद भी सोमनाथ पर कई विदेशी मु्स्लिम शासकों ने भी हमला किया। अलाउद्दीन खिलजी से लेकर औरंगजेब तक सोमनाथ को कई बार तोड़ा गया। लेकिन हर बार भारतीय राजाओं और भक्तों ने इसे खड़ा किया। 1783 में अहिल्याबाई होलकर ने पास में नया मंदिर बनवाया। आजादी के बाद सबसे बड़ा मोड़ आया जब 13 नवंबर 1947 को सरदार वल्लभभाई पटेल ने पुनर्निर्माण का संकल्प लिया। जनता से चंदा इकट्ठा हुआ, चालुक्य शैली में नया मंदिर बना और 11 मई 1951 को राष्ट्रपति राजेंद्र प्रसाद ने प्राण-प्रतिष्ठा की। उन्होंने तब कहा था, 'विनाश की शक्ति निर्माण की शक्ति से कभी बड़ी नहीं हो सकती।'
इस साल भारत सरकार 'सोमनाथ स्वाभिमान दिवस' मना रहा है। 8-11 जनवरी तक धार्मिक अनुष्ठान, प्रदर्शनियां, संगीत और ड्रोन शो। हजारों भक्त जुट रहे हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी सोमनाथ जाएंगे। इससे पहले उन्होंने सोमनाथ मंदिर से जुड़ी अपनी यादों को सांझा किया है।

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Anubhav Shakyaलेटेस्ट Hindi News , बॉलीवुड न्यूज, बिजनेस न्यूज, टेक , ऑटो, करियर , और राशिफल, पढ़ने के लिए Live Hindustan App डाउनलोड करें।




